देवेन्द्र तिवारी सांची, रायसेन
हमेशा की तरह जैसे जैसे त्योहारो का आगाज होता है शराब माफियाओं की सक्रियता आसमान छूने लगती हैं ।तब पुलिस त्यौहार के शांतिपूर्ण सम्पन्न कराने की जद्दोजहद मे जुट जाती हैं एवं आबकारी विभाग हमेशा की तरह इन माफियाओं पर नकैल कसने की जगह खुली छूट से शराब माफियाओं के हौसले बुलंद हो जाते है जिससे सरकार एवं प्रशासन के नशा मुक्ति अभियान की कल ई खुलती दिखाई देने लगती है।
जानकारी के अनुसार वैसे तो इस स्थल को एक शांति का स्थल माना जाता था इस स्थल से ही विश्व को शांति का संदेश दिया गया था परन्तु इस स्थल की शांति पर तब सवाल खड़े होने लगते है जब इस स्थल पर विभिन्न त्योहारों का आगाज होते ही शराब माफियाओ की सक्रियता बढ जाती हैं तथा खुलेआम मनमाने दामों सहित शराब का कारोबार का समय तो प्रशासन सुनिश्चित कर देता है परन्तु वह भी कागजी बनकर रह जाता है इतना ही नहीं जब जब विभिन्न त्योहारों पर सरकार शराब माफिया पर नकैल कसने प्रतिबंधित कर देती हैं परंतु सबंधित विभाग की मिली भगत सै शराब माफिया पिछला दरवाजा खोलने में सफल हो जाते है ।जबकि पुलिस अपनी जिम्मेदारी त्योहारों के शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराने में व्यस्त रहती हैं तब शराब माफिया अपनी सक्रियता बढाने में सफल हो जाती हैं जिससे न केवल त्यौहारो की खुशियां शराब माफिया की बलि चढ जाती हैं इतना ही नहीं इस स्थल को भी बौध अनुयायियों का पवित्र तीर्थ स्थल माना जाता है परन्तु इस स्थल पर ही विभाग द्वारा इसकी पवित्रता को ताक पर रखकर अपनी मनमानी करने में पीछे नहीं रहते जिसका खामियाजा महिलाओं को भुगतने पर मजबूर होना पडता है तब शराब दुकानों पर मेले जैसी भीड उमडती दिखाई देती हैं जहाँ हमेशा ही दुर्घटना का अंदेशा बना रहता है तथा शराब दुकानों पर भीड उमडऩे लगती है ।
प्रशासन का नशा मुक्ति अभियान को लगा पलीता।
हालांकि आमजन को नशे के विरुद्ध बडा स्तर पर जागरूकता अभियान चलाया गया एवं नशे से होने वाली बुराइयों का भी खूब बखान किया गया यहां तक कि नशे के विरुद्ध शपथ भी दिलाई गई बावजूद इसके इस अभियान को शराब माफियाओं ने पलीता लगा डाला तब आसानी से अंदाजा लगाया जा सकता है कि संबंधित विभाग कितने गंभीर होगे ।यहां तक कि शराब माफियाओं की सक्रियता ने गांव गांव घर घर तक शराब परोसना शुरू कर दी ऐसा भी नहीं है कि सरकार एवं प्रशासन शराब के इस गोरखधंधे से बेखबर हो परन्तु बताया जाता हैं शराब माफिया से सरकार को तो करोड़ों रुपये की आय होती ही है इसके साथ संबंधित भी अपनी आय से पीछे नहीं रहते यही कारण रहता है जब शासन प्रशासन के नशामुक्ति अभियान की धज्जियां उड जाती हैं ।नागरिकों ने भी शराब माफियाओं पर नकैल कसने की आवाज बुलंद करना शुरु कर दी है ।