मुकेश साहू दीवानगंज रायसेन
जमुनिया के राम जानकी खेड़ापति हनुमान मंदिर परीसर में आयोजित सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा के सातवें और आखिरी दिन कथावाचक हरि नारायण शास्त्री ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण व सुदामा अच्छे मित्र थे। गोकुल में वह एक साथ खेल-खेलकर बड़े हुए। बाद में पाप का अंत करने के लिए भगवान मथुरा आ गए। वहां पर उन्होंने कंस का संहार किया। कृष्ण के मथुरा जाने के बाद सुदामा के घर काफी गरीबी आ गई। स्थित यह हो गई कि उनके घर दो वक्त की रोटी के लाले पड़ गए। गरीबी से तंग सुदामा की पत्नी सुशीला ने सुदामा से कहा कि तुम अपने बचपन के मित्र श्रीकृष्ण से मिलो, वह मदद कर सकते हैं। पत्नी के कहने पर सुदामा बचपन के मित्र से मिलने के लिए तैयार हुए। जाते समय सुशीला से सुदामा को चावल दिया और कहा कि इसे भेंट में श्रीकृष्ण को देना। जब सुदामा मथुरा पहुंच कर द्वारपाल के माध्यम से सूचना दिया तो भगवान दौड़कर सखा सुदामा से गले मिले। वहां पर उपस्थित लोग आश्चर्य चकित हो गए।

सुदामा का भगवान श्रीकृष्ण से स्वागत सत्कार किया। बाद में पूछा की भाभी ने हमारे लिए कुछ भेजा है। तब सुदामा ने चावल दे दिए। भगवान ने उस चावल में से दो मुट्ठी चावल खाया तो सुदामा दो लोक के मालिक हो गए। जब उन्होंने तीसरी मुट्ठी में चावल लिया तो रुक्मणि ने रोक दिया। प्रभु यदि आपने यह चावल खाया तो एक लोक जो बचा हुआ है, उसके मालिक भी सुदामा हो जाएंगे और देवता कहां जाएंगे। कहा कि लोगों को भगवान श्रीकृष्ण व सुदामा की मित्रता से सीख लेनी चाहिए। इससे पूर्व भगवान श्रीकृष्ण व रुक्मणि के विवाह की लीला का मंचन किया है।क्षेत्रीय लोग प्रसाद प्राप्त कर राधे-कृष्ण के जायकारे लगाए। भागवत कथा और महायज्ञ की समाप्ति पर गांव में विशाल भंडारा का आयोजन हुआ। जिसमें आसपास के ग्रामीण इलाकों के भक्तों ने प्रसाद के रूप भोजन प्राप्त किया। जो देर रात तक चलता रहा।