सुरेन्द्र जैन धरसीवां
“उत्तेजना” हमें भावनात्मक रूप से कमजोर बनाती है” उपरोक्त उदगार मुनि श्री प्रमाण सागर महाराज ने ”उत्तेजना” के लक्षण तथा उसके कू परिणाम एवं निवारण पर अपने अनमोल बचनों से विद्या प्रमाण गुरुकुलम् अवधपुरी में व्यक्त किये”।
मुनि श्री ने कहा कि कुछ लोग “उत्तेजना” में ऐसे एक्साइट होते है जैसे कोई बम फटा हो किसी को भी विना सोचे समझे कठोर शव्द कह दैना यह “उत्तेजना” के प्रमुख लक्षण है,उत्तेजना में व्यक्ती सोचने समझने की शक्ती,और अपना सुधबुध खो देता है,तथा किसी भी बात को विना सोचे समझे त्वरित टिप्पणी कर अपनाआपा खो होशहबास खो बैठता है,फिर बाद में पश्चाताप करता है, यह उत्तेजना का सबसे विक्रत स्वरुप है
मुनि श्री ने चार प्रमुख कारणो में “ईगो”-दूसरों पर नियंत्रण करने की इच्छा- त्वरित प्रक्रिया करने कीआदत तथा अस्वीकारता को स्वीकार नहीं करने से व्यक्ति “उत्तेजित” हो उठता है मुनि श्री ने कहा कि यह व्यक्ती के उथलेपन की पहचान हुआ करती है,उन्होंने उत्तेजना के परिणामों की चर्चा करते हुये कहा कि इससे सम्वंधों में खटास उत्पन्न हो जाती है, तथा व्यक्ति बाद में पश्चाताप करता है।

मुनि श्री ने निवारण का उपाय बताते हुये कहा कि रोजाना इन बाक्यों को दोहराते हुये “भावनायोग” कीजिये मुझे शांत रहना है- मुझे संयम रखना है- मुझे सहज रहना है, मुझे सकारात्मक रहना है ये चार बाक्यों पर यदि आपने पांच मिनट तक भावनायोग कर लिया तो उत्तेजना की इन आदतों में बदलाव आ जाऐगा तथा आप उत्तेजना से मुक्त हो जाओगे।उपरोक्त जानकारी प्रवक्ता अविनाश जैन विद्यावाणी ने देते हुये बताया मुनि श्री के प्रवचन हिंदी वर्णमाला के “उ” अक्षर से प्रतिदिन विद्या प्रमाण गुरुकुलम् अवधपुरी में प्रातः8:30 बजे से 9:30 तक हो रहे है एवं सांयकाल 6:20 से शंकासमाधान कार्यक्रम संपन्न होता है।