अनुराग शर्मा सीहोर
राज नीति है ही ऐसी बला… इसमें विपक्षी पार्टी व उनके नेताओं से तो दो-चार होना ही पड़ता है, लेकिन कई बार अपनी ही पार्टी के नेताओं के षडय़ंत्र का सामना भी करना पड़ जाता है।
ऐसे ही षडय़ंत्र की राजनीति इन दिनों जिले में भी देखने को मिल रही है। दरअसल, पार्टी विशेष के जिलाध्यक्ष अपनी सक्रियता की वजह से बहुत ही कम समय में विरोधी पार्टी के नेताओं और सिस्टम के लिए परेशानी का सबब बने हुए हैं। जिलाध्यक्ष की सक्रियता की वजह से जिले में पार्टी भी नजर आ रही है, लेकिन जिलाध्यक्ष की यह सक्रियता पार्टी के ही वरिष्ठ नेताओं को रास नहीं आ रही है और पार्टी में अंदर ही अंदर बहुत कुछ खिचड़ी पक रही है। पार्टी के ही अनुभवी नेता अपने ही जिलाध्यक्ष के लिए परेशानी का सबब बनने लगे हैं। आए दिन शिकवे शिकायतों की वजह से जिलाध्यक्ष अपनी ही पार्टी के नेताओं से दो-चार हो रहे हैं। जिलाध्यक्ष की इस परेशानी को उनके समर्थक सोशल मीडिया के माध्यम से सार्वजनिक कर रहे हैं तो वहीं अब जिलाध्यक्ष द्वारा भी सोशल मीडिया पर अपनी पीड़ा जताना शुरू कर दिया है। इधर राजनीति के जानकारों का कहना है कि यदि अच्छा हो रहा है तो साथ देना चाहिए, न की मनोबल तोडऩा चाहिए।