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साँची विश्वविद्यालय में बौद्धधर्म-दर्शन एवं मूल्यपरक शिक्षा पर कार्यशाला

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• राष्ट्रीय शिक्षा नीति और भारतीय ज्ञान प्रणाली के परिप्रेक्ष्य में आयोजन

• लागू किये जाने योग्य सुझाव और पाठ्यक्रम सुझाएगी कार्यशाला

रायसेन। भारतीय ज्ञान प्रणाली के परिप्रेक्ष्य और राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के क्रियान्वयन के संदर्भ में साँची बौद्ध-भारतीय ज्ञान अध्ययन विश्वविद्यालय द्वारा 8 जुलाई से 12 जुलाई 2024 तक पांच दिवसीय कार्यशाला का आयोजन हो रहा है। बौद्धधर्म-दर्शन एवं मूल्यपरक शिक्षा पर केंद्रित कार्यशाला का उद्घाटन मध्य प्रदेश जनजातीय संग्रहालय, श्यामला हिल्स, भोपाल में 8 जुलाई 2024 को संस्कृति , पर्यटन, धार्मिक न्‍यास और धर्मस्‍व मंत्री श्री धमेन्द्र भाव सिंह लोधी करेंगे।


बौद्धधर्म-दर्शन एवं मूल्यपरक शिक्षा पर आधारित कार्यशाला में बुद्ध पूर्व के भारत में शिक्षा व्यवस्था की स्थिति से लेकर बुद्ध की शिक्षाओं, उनके बताए निर्वाण मार्ग, बुद्ध के बाद विभिन्न शिक्षा केंद्रों का विकास और पाठ्यक्रम के साथ ही विभिन्न बौद्धाचार्यों के शिक्षा में योगदान और आज के समाज में बौद्धधर्म-दर्शन पर केंद्रित मूल्यपरक शिक्षा की उपयोगिता पर चर्चा होगी। कार्यशाला में बौद्ध दर्शन के विशिष्ट विद्वान चिंतन मनन करेंगे। कार्यशाला में 5 कुलपति, प्रोफेसर एवं बौद्ध दर्शन के विद्वान शामिल हो रहे हैं। दत्तोपन्त ठेंगड़ी शोध संस्थान कार्यशाला में सह-आयोजक है।


बौद्ध धर्म-दर्शन, विश्व की सर्वाधिक प्रभावशाली प्रणालियों में से एक है, जो सत्य के परीक्षण हेतु तर्कसंगत और व्यवस्थित दृष्टिकोण के लिए विख्यात है। यहाँ हमेशा मूल्य आधारित और ज्ञानोन्मुखी शिक्षा प्रणाली पर जोर दिया गया है। स्व-शिक्षा के दृष्टिकोण के रूप में, बौद्ध नैतिक विचार शिक्षार्थियों को अपने आत्म-स्वभाव की खोज करने की प्रेरणा देते हैं। बौद्धधर्म- दर्शन नैतिकता, मैत्री, करुणा और समानता पर बल देती है जो आधुनिक शैक्षिक बिन्दुओं जैसे शांति शिक्षा, पारिस्थितिकी शिक्षा और शिक्षा में समानता के संवर्धन हेतु अपेक्षित हैं। बौद्ध दृष्टिकोण में, शिक्षकों से “सावधानीपूर्वक शिक्षण” का अभ्यास करते हुए मानसिक जागरुकतापूर्व अध्यापन आत्म-जिम्मेदारी, दयालु संचार और अपनेपन की एक शांतिपूर्ण, बौद्धिक संस्कृति बनाने पर जोर दिया गया है।
विश्व आज अभूतपूर्व चुनौतियों का सामना कर रहा है, ऐसे में नैतिक, दयालु और जिम्मेदार व्यक्तियों का पोषण करने वाली शिक्षा प्रणाली की आवश्यकता कहीं ज्यादा बढ़ गई है। “बौद्धधर्म-दर्शन और मूल्यपरक शिक्षा” पर यह कार्यशाला एक शैक्षिक प्रतिमान बनाने की दिशा में एक कदम है जो न केवल ज्ञान प्रदान करता है बल्कि बौद्ध धर्म की कालातीत शिक्षाओं से प्रेरणा लेते हुए सद्गुण और ज्ञान भी पैदा करता है।

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