यशवन्त सराठे बरेली रायसेन
बुध्द पूर्णिमा के अवसर पर नगर के अम्बेडकर भवन में भगवान बुद्ध की जयन्ती अहिरवार समाज के द्वारा राष्ट्रीय अध्यक्ष जगदीश सूर्यवंशी की अध्यक्षता में हर्षोल्लास पूर्वक जयन्ती कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम के आरंभ मे भगवान विष्णु केनौवे अवतार माने जाने वाले भगवान बुद्ध की पूजा अर्चना के उपरांत समाज के विभिन्न पहलुओं पर वुध्दिजीवियो ने समाज में व्याप्त रूढ़ीवादिता, अशिक्षा, असमानता ओर युवाओं में व्याप्त नशाखोरी के विरुद्ध अपने विचार व्यक्त किए।समाज सेवी कार्यकर्ताओं ने वावा साहेब आम्बेडकर की सामाजिक विचारधाराओं पर युवा पीढ़ी को चलने की बात कही गयी।मनुवादी विचारो का विरोध किया गया।समाज में सभी को समानता के अधिकारों की बात रखी गयी इसके साथ ही भगवान वुद्ध के वताये गये सिध्दांत एवं मार्ग पर अपने जीवन को सचरित्र वनाने पर वल दिया गया।समाजसेविका लक्ष्मीबाई ने भगवान वुद्ध के जीवन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि भगवान वुद्ध का जन्म 563ईसा पूर्व नेपाल के लुम्वनी ग्राम में हुआ था।उनके माता-पिता शाक्य वंश के शाही घर से थें। लेकिन एक तपस्वी के रूप में उन्होंने अपना घरेलू जीवन त्याग दिया। भिक्षावृत्ति,तपस्या,ओर, ध्यान का जीवन जीने के वाद उन्होंने भारत के राज्य विहार में वोध गया में निर्वाण प्राप्त किया।भगवान वनने से पहले वे साधारण इंसान थे। उन्हें सिद्दार्थ कहा जाता था। भगवान गौतमबुद्ध की शिक्षा दीक्षा के कारण वौध्द धर्म का उदय हुआ।विश्व में वौध्दधर्म के बहुत से अनुयाई हैं।अंत में राष्ट्रीय उपाध्यक्ष हनुमत सिंह वौध्द ने उपस्थित सभी पत्रकारों का स्वागत एवं स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया।