मुकेश साहू दीवानगंज रायसेन
सांची विकासखंड के अंतर्गत आने वाले गांव कुलहड़िया के पहाड़ों पर रविवार सुबह आग धधकती हुई नजर आई। आग किसने लगाई किसी को मालूम नहीं है
आंख धरे-धीरे जंगल में फैल रही थी लेकिन दोपहर के समय आग फिर से जलने लगी। आग धीरे-धीरे पहाड़ के नीचे और ऊपर फैलती जा रही थी। नर खेड़ा के ग्रामीणों ने बताया कि जंगल में आग शनिवार शाम से लग रही है। पहले तो पहाड़ के नीचे ही नीचे लग रही थी। मगर रविवार को आग धीरे-धीरे पहाड़ पर जा रही है। अगर आग को अभी नहीं बुझाया गया तो आग पूरे पहाड़ पर फैल जाएगी। जिस पेड़ पौधे भी जलेंगे साथ ही जंगल में रहने वाले पशु पक्षियों पर भी संकट आ सकता है। आग से जंगल में मौजूद जल सोखने वाले पेड़ नष्ट हो जाते हैं। साथ ही जल्दी आग पकड़ने वाले पेड़ अपना असर दिखाते हैं। पहाड़ी जंगलों में लगने वाली आग का सबसे बड़ा कारण चीड़ के पेड़ों को ही माना जाता है। यह जमीन को न सिर्फ सूखा बनाते हैं, बल्कि इस पेड़ की जल्दी जलने वाली सूखी पत्तियां भारी संख्या में गिरकर जमीन पर इकट्ठा हो जाती हैं। थोड़ी-सी चिंगारी मिलने पर ये तेजी से बहुत बड़े वन क्षेत्र को अपनी जद में ले लेती है। हालांकि, यह पेड़ों का ज्यादा नुकसान नहीं करती, लेकिन जमीन और मिट्टी के अंदर बिल बनाकर रहने वाले जीवों का इससे काफी नुकसान होता है।
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