सुरेंद्र जैन रायपुर
तलवार की कीमत उसकी धार से होती है और इंसान की कीमत उसके व्यवहार से होती है।
यह बात पूज्य आचार्यश्री विद्यासागरजी महामुनिराज के परम प्रभावक शिष्य पूज्य निर्यापक श्रमण मुनिश्री प्रसाद सागर जी ने अपने प्रवचनों में समीपस्थ ग्राम बरोदा में सोमवार को कही।
निर्यापक मुनि श्री प्रसाद सागर जी महाराज ने धर्मसभा को सम्वोधित करते हुये कहा कि”तलबार की कींमत उसकी धार से होती है,इंसान कींमत उसके व्यवहार से होती है,जैसा उसका व्यवहार होता है उसकी कींमत बैसी ही बनती है आप अपना व्यवहार ऐसा रखो कि जंहा पर भी आप रहो वंहा के लोग आपको चांहे और प्रेम करे और आपको करे प्यार और जब आप वंहा से निकल जाओ तो लोग करें आपको याद और जंहा पर तुम जा रहे हो बंहा के लोग करें तुम्हारा इंतजार” उपरोक्त बात परमपूज्य आचार्य गुरूदेव के चरित्र और जीवन पर लागू होती है,बह जंहा पर रहते है बंहा के लोग उनको चाहते है,और वह जंहा से निकल जाते है,उधर के लोग उनको याद करते है।मुनि श्री ने कहा कि गुरु की महिमा वरणी ना जाय यह तो छत्तीसगढ़ का पुण्य है जोआचार्य महाराज को लगभग एक बर्ष हो गया है,और अभी आपके सामने चंद्रगिरि तीर्थ के पदाधिकारी आगामी समय में पंचकल्याणक का निवेदन कर रहे थे मुनि श्री ने कहा जंहा पर दबा काम नहीं करती है वंहा पर दुआ काम करती है और जंहा पर दबा काम नहीं करती है वंहा पर आपके स्वं का आत्मचिंतन काम करता है, जब कोई व्यक्ति अल्सर से बीमार होता है,तो डाक्टर कहता है कि आप अपनी सोच को बदल लीजिये आप एकदम ठीक हो जाऐंगे इसीलिये कहा गया है कि आयुर्वेद का प्रथम सूत्र है पहला सुख निरोगी काया अर्थात अपनी मानसिकता अच्छी रखो प्रसस्त रहो क्योंकि प्रसस्तता से हर समस्या का समाधान मिल जाता है उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में जो लोग पहली पहली बार राजनीति में आऐ है उनके कंधों पर राज्य की कमान सोंप दी है उन्होंने कहा कि “बतन की कमान का आधार सम्विधान होता है और सम्विधान का आधार शिक्षा और संस्कार होते है” मुनि श्री ने कहा कि आचार्य श्री ने मूटमाटी में कहा कि “पूत के पांव पालने में दिखते है” यह पालना और कोई नहीं आपके संस्कार ही होते है जो आपको दिये जाते है उन्होंने कहा कि भारत की राजनीति में जो नये नये लोगों को युवा लोगों के कंधों पर बागडोर सोंपी जा रही है नईजो मौका दिया जा रहा है उससे ही भारत को आगे ले जाया जा सकता है। इस अवसर पर चंद्रगिरि तीर्थ डोंगरगढ़ जो कि छत्तीसगढ़ का प्रथम तीर्थ है वंहा पर वन रहे भगवान श्री चंद्रप्रभु के विशाल जिनालय के आगामी समय में होंने बाले भव्य पंचकल्याणक की रुपरेखा कार्यकारी अध्यक्ष विनोद बड़जात्या एवं महामंत्री चंद्रकांत जैन ने रखते हुये सभी धर्मप्रेमी वंधुओ को छत्तीसगढ़ के प्रथम तीर्थ पर पधारने का अनुरोध किया। दयोदय महासंघ प्रवक्ता अविनाश जैन विदिशा ने बताया आचार्य गुरूदेव को रायपुर नगर के सभी जिनालय कचना, लाभान्डी,शंकरनगर, मालवीय रोड़ टैगोर नगर पदमनाभ नगर दुर्ग आदि स्थानों से आये भक्तों ने श्री फल अर्पित कर पधारने का अनुरोध किया कार्यक्रम का संचालन राजेश जैन रज्जन ने किया।
राजधानी रायपुर में हुई भव्य अगवानी
संत शिरोमणि आचार्य श्री विद्यासागरजी महाराज ससंघ का मंगल पदार्पण छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में दौपहर में बरोदा ग्राम से हुआ एवं विधान सभा रोड़ से होते हुये शहर में भव्य मंगल अगवानी की गयी।
समीपस्थ ग्राम बरोदा में दूरदराज से आये सैंकड़ो भक्तजनों को अपने अनमोल वचनों से सदमार्ग दिखाते हुए प्रातःकालीन बेला मे ग्राम बरोदा में आचार्य श्री संघ की मंगल अगवानी छत्तीसगढ़ राज्य के विभिन्न नगरों से तथा रायपुर शहर के विभिन्न जिनालयों से भक्तजनों ने की तत्पश्चात अष्टमंगल द्रव्यों से पूजन कर मंगल आशीष लिया इस अवसर पर ग्राम बरोदा में