सिकुड़ते जा रहे तालाब के आस पास होने लगी खेती:पानी के प्रदूषित होने और मवेशियों के चारागाह की हो सकती है कमी
रिपोर्ट धीरज जॉनसन,दमोह
दमोह जिले में सैकड़ों तालाब विद्यमान है जिनसे ग्रामीण,किसान और जीव जंतु भी लाभान्वित होते है परंतु अब इनके आकर छोटे होते जा रहे है और इनका पानी भी प्रदूषित हो रहा है।

शहर से लगभग 12 किमी दूर जमुनिया तालाब के हालात भी कुछ ऐसे ही है करीब 90 हेक्टेयर के इस तालाब के इर्द गिर्द अब खेत दिखाई देने लगे है और लोगों ने यहां फेंसिंग भी कर ली है तालाब की भूमि पर अब कृषि के लिए ट्रैक्टर चलते हुए दिखाई देते है और खेत की सिंचाई के लिए पाइप फैले रहते है, जानकारी तो यह भी है कि खेतों में पानी देने के लिए सिंचाई की मोटर का इस्तेमाल भी किया जाता है जिससे तालाब संकुचित होता जा रहा है साथ ही मवेशियों के चारागाह भूमि की कमी परिलक्षित होने लगी है। आश्चर्य तो यह है कि तालाब के निकट वन विभाग की एक नर्सरी भी बताई गई जहां पेड़ लगे हुए थे पर अब वहां भी फसल लगी हुई है। स्थानीय बुजुर्गो ने बताया कि पहले यहां काफी जंगल था पर धीरे धीरे पेड़ गायब हो गए। अगर यही स्थिति रही तो आने वाले समय में पानी की कमी और प्रदूषण की समस्या बढ़ सकती है क्योंकि किसान खेतों में रासायनिक खाद का उपयोग करते हैं जो बारिश के बाद तालाब के पानी में मिल जाता है और पेड़ों की कमी हो जाने से वाष्पीकरण भी बढ़ेगा, पर्यावरण संरक्षण के लिए इस पर भी ध्यान देना आवश्यक है।