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उपचुनाव में हारना और नेगेटिव फीडबैक के कारण सिंधिया समर्थक जसमंत का कटा टिकट, पुराने विधायक पर जताया भरोसा

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– करैरा विधानसभा से भाजपा ने रमेश खटीक को अपना उम्मीदवार बनाया

– वर्ष 2013 और 2018 में करैरा विधानसभा में चुनाव हार चुकी है भाजपा

रंजीत गुप्ता शिवपुरी

शिवपुरी जिले के करैरा विधानसभा सीट से भारतीय जनता पार्टी ने पूर्व विधायक रमेश खटीक को अपना प्रत्याशी बनाने की घोषणा की है। सोमवार को भारतीय जनता पार्टी ने 39 प्रत्याशियों की दूसरी सूची जारी कर दी। इस सूची में शिवपुरी जिले की करैरा विधानसभा सीट का नाम भी शामिल है। इस सीट से रमेश खटीक को भाजपा ने अपना उम्मीदवार बनाया है। इससे पहले इस सीट पर वर्ष 2018 में कांग्रेस उम्मीदवार के तौर पर जसमंत जाटव चुनाव लड़े थे। सिंधिया समर्थक जसमंत जाटव चुनाव जीतने के बाद वर्ष 2020 में हुए दलबदल के दौरान ज्योतिरादित्य सिंधिया के साथ भाजपा में आ गए। इस दलबदल के बाद करैरा सीट पर जो उपचुनाव हुआ उसमें बीजेपी ने जसमंत जाटव को अपना उम्मीदवार बनाया लेकिन इस चुनाव में जसमंत जाटव बुरी तरह हारे। उपचुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार प्रगीलाल जाटव ने भाजपा उम्मीदवार जसमंत जाटव को 30641 मतों से बुरी तरह हरा दिया। इतने अधिक मतों से हारने के कारण ऐसा शुरू से माना जा रहा था कि सिंधिया समर्थक नेता जसमंत जाटव को इस बार भाजपा अपना उम्मीदवार नहीं बनाएगी। इसके अलावा सूत्रों ने बताया है कि पार्टी के सर्वे में भी उनके बारे में नेगेटिव फीडबैक था। जिसके कारण सिंधिया समर्थक जसमंत जाटव को टिकट देने की बजाय भाजपा ने करैरा से वर्ष 2008 में विधायक रहे रमेश खटीक को मैदान में उतारा है।

सिंधिया के साथ आए जसमंत का भाजपा कार्यकर्ताओं से ज्यादा अच्छा तालमेल नहीं-

ज्योतिरादित्य सिंधिया के साथ कांग्रेस छोड़कर भाजपा में आए करैरा के पूर्व विधायक जसमंत जाटव का स्थानीय भाजपा कार्यकर्ताओं से ज्यादा अच्छा तालमेल नहीं। इस तरह का फीडबैक भी पार्टी के पास था। सूत्रों ने बताया है कि करैरा उपचुनाव में हार का बड़ा अंतर और उनकी जाति के जाटव समाज के वोट भी उन्हें उपचुनाव के दौरान नहीं मिले थे इसलिए पार्टी दोबारा से उन पर दांव लगाना नहीं चाहती थी। अब पुराने विधायक रमेश खटीक पर ही भाजपा ने दांव लगाया है।

सपाक्स पार्टी से चुनाव लड़ चुके हैं रमेश खटीक

भाजपा ने जिन रमेश खटीक को अपना उम्मीदवार बनाया है वह वर्ष 2018 में पार्टी छोड़कर सपाक्स पार्टी से चुनाव लड़ चुके हैं। सपाक्स से चुनाव लड़ने के दौरान उन्हें 9098 वोट मिले थे। वर्ष 2018 के चुनाव के दौरान रमेश खटीक भी भाजपा से टिकट के दावेदार थे लेकिन भाजपा ने इन्हें टिकट देने की बजाय राजकुमार खटीक को टिकट दिया था। राजकुमार खटीक को टिकट मिलने से नाराज होकर रमेश खटीक ने सपाक्स पार्टी से अपना परिचय दाखिल करके चुनाव लड़ा था लेकिन वह चुनाव हार गए थे।

वर्ष 2013 और 2018 के चुनाव में भाजपा को मिल चुकी है हार –

करैरा विधानसभा सीट पर भाजपा को वर्ष 2013 और 2018 के चुनाव में हार मिल चुकी है। वर्ष 2013 में कांग्रेस की शकुंतला खटीक यहां से चुनाव जीती थी। इसके बाद वर्ष 2018 के चुनाव में कांग्रेस के जसमंत जाटव चुनाव जीते। इसके बाद वर्ष 2020 में जब उपचुनाव हुआ तो इस उपचुनाव में भी भाजपा को हार का सामना करना पड़ा।

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