– किसान के बेटे राजीव कुशवाहा ने करियर में मिली असफलताओं को बनाया सफलता की सीढ़ी
– सीए-सीपीटी और आईपीसीसी के बाद उच्च शिक्षा को बनाया करियर, जून 2026 में पास की नेट-जेआरएफ
– रायसेन जिले के नवोदय विद्यालय बाड़ी में मिली “हार न मानने” की सीख बनी राजीव की सफलता का मंत्र
रायसेन।जिंदगी में कुछ सपने पूरे नहीं होते, लेकिन कई बार वही अधूरे सपने हमें उस मंजिल तक पहुंचा देते हैं, जहां जाने का रास्ता हमने कभी सोचा भी नहीं होता। ग्राम उषापुर, रायसेन के किसान परिवार से आने वाले राजीव कुशवाहा की कहानी भी कुछ ऐसी ही है। उन्होंने चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) बनने का सपना देखा, कई बार कोशिश की, लेकिन सफलता नहीं मिली। इसके बाद उन्होंने रास्ता बदला, मेहनत जारी रखी और आखिरकार एमपीपीएससी असिस्टेंट प्रोफेसर (कॉमर्स) परीक्षा-2024 की मेरिट लिस्ट में चयनित होकर रायसेन जिले और समाज को गौरवान्वित किया।
कई प्रयासों के बाद सीए की तैयारी छोड़नी पड़ी
राजीव के पिता श्री निर्भय सिंह सिलवानी तहसील के ऊषापुर गांव के किसान हैं। राजीव ने कक्षा छठी से बारहवीं तक जवाहर नवोदय विद्यालय, बाड़ी से पढ़ाई की। नवोदय में पढ़ाई के साथ उन्हें अनुशासन और मुश्किलों से लड़ने की सीख मिली। राजीव कहते हैं कि वहीं से एक बात मन में बैठ गई कि “हार नहीं माननी है, चाहे परिस्थितियां कैसी भी हों। मंजिल मिलने तक कोशिश करते रहना है।” 12वीं के बाद उन्होंने बरकतउल्लाह विश्वविद्यालय, भोपाल से बीकॉम और एमकॉम (फाइनेंस) किया। इसके बाद सीए बनने की तैयारी शुरू की। सीए-सीपीटी और सीए-आईपीसीसी ग्रुप-1 पास किया, लेकिन कई प्रयासों के बाद सीए की तैयारी छोड़नी पड़ी। यह उनके लिए मुश्किल दौर था, लेकिन उन्होंने पढ़ाई से दूरी नहीं बनाई।
MPPSC असिस्टेंट प्रोफेसर (कॉमर्स) 2024 में राजीव का चयन
कॉमर्स में रुचि को आगे बढ़ाते हुए राजीव ने उच्च शिक्षा के क्षेत्र में करियर बनाने का फैसला किया। यूजीसी नेट की तैयारी शुरू की और पांच बार नेट क्वालीफाई किया। जून 2026 में कॉमर्स विषय में नेट-जेआरएफ हासिल किया। सीए की तैयारी के दौरान पढ़े विषय और अध्ययन सामग्री भी आगे उनकी तैयारी में काफी काम आई। एमपीपीएससी असिस्टेंट प्रोफेसर परीक्षा-2022 में राजीव लिखित परीक्षा और इंटरव्यू तक पहुंचे, लेकिन अंतिम चयन नहीं हो सका। उन्होंने हार नहीं मानी और दोबारा तैयारी की। लिखित परीक्षा के लिए सेल्फ स्टडी को हथियार बनाया और इंटरव्यू की तैयारी दोस्तों के साथ डिकस्शन और मॉक इंटरव्यू के जरिए की। आखिरकार मेहनत सफल हुई और 2024 की परीक्षा में उनका चयन हो गया।
असफलता मंजिल का अंत नहीं, बल्कि नई कोशिश के लिए अनुभव जैसी
राजीव अपनी सफलता का श्रेय माता-पिता, परिवार और दोस्तों के सहयोग को देते हैं। किसान परिवार से निकलकर CA की तैयारी, फिर UGC NET, NET-JRF और अंततः MPPSC असिस्टेंट प्रोफेसर तक पहुंचने वाले राजीव की कहानी उन युवाओं के लिए प्रेरणा है जो प्रतियोगी परीक्षाओं में बार-बार प्रयास के बावजूद सफलता का इंतजार कर रहे हैं। उनका सफर यही संदेश देता है कि असफलता मंजिल का अंत नहीं, बल्कि अगली कोशिश के लिए अनुभव हो सकती है