इंदौर। दुल्हन बनी दादी के साथ पोती सेल्फी ले रही थी तो दूल्हा बने ससुर को दामाद शेरवानी पहना रहा था। किसी की जीवनसाथी व्हीलचेयर पर थी तो कोई एक-दूसरे को सहारा देते हुए आगे बढ़ रहे थे। यह दृश्य था रविवार शाम बायपास स्थित होटल गोल्डन लीव्स बायपास का। अवसर था अग्रसेन महासभा द्वारा आयोजित आठ राज्यों से आए विवाह के 60 वर्ष पूरे कर चुके 61 बुजुर्ग युगलों के शुभ षष्ठी परिणयोत्सव का।
शाम को दूल्हों को साफा, कलंगी और दुल्हनों को परंपरागत परिधान में परिवार के सदस्यों ने सजाया। इसके बाद 25 बग्घियों और चार विंटेज तथा 11 अन्य वाहनों में बिठाकर होटल परिसर में उनकी अनूठी बरात निकाली गई। बरात में राजस्थान से आए कलाकारों के अलावा युगलों के रिश्तेदारों और स्वजन ने भी जमकर नृत्य किया। जगह-जगह युगलों के लिए स्वल्पाहार, आइसक्रीम, शीतलपेय आदि की व्यवस्था उसी तरह की गई थी, जिस तरह आम बाने में की जाती है। इन्हें बग्घियों और गाड़ियों तक लाने के लिए 40 व्हीलचेयर की व्यवस्था भी की गई थी।
नाचते-गाते पहुंचे और पहनाई वरमाला
इस अनूठी बरात में कलाकारों ने राधाकृष्ण के रूप में सजकर नृत्य की प्रस्तुतियां दी। राजस्थान का घूमर नृत्य भी आकर्षण का केंद्र रहा। पुराने फिल्मी गीतों की धुनों पर इन कलाकारों ने जमकर समा बांधा। शाम करीब छह बजे से शुरू हुई यह शोभायात्रा लगभग डेढ़ घंटे बाद पुनः होटल के लान में पहुंची जहां महाराजा अग्रसेन के जयघोष के बीच वृंदावन से आए महामंडलेश्वर स्वामी भास्करानंद एवं साध्वी कृष्णानंद ने युगलों को आशीर्वचन दिए। महाराजा अग्रसेन की साक्षी में ही सभी 61 युगलों ने एक-दूसरे को एक साथ वरमाला पहनाकर इस परिणयोत्सव के माध्यम से नई पीढ़ी को बुजुर्गों का सम्मान करने, देश की संयुक्त परिवार परंपरा को कायम रखने और भारतीय विवाह पद्धति में विश्वास रखने के संदेश भी दिए।
ताजा हुईं मधुर स्मृतियां, कहा- उस समय घूंघट में थी संगिनी
परिणयोत्सव के बहाने बुजुर्ग युगलों की मधुर स्मृतियां एक बार फिर ताजा हो गई। मोहनलाल बंसल और चंद्रकला बंसल ने कहा कि पति-पत्नी का रिश्ता विश्वास का होता है। भारतीय संस्कारों पर विश्वास करने की आवश्यकता है। 60 साल पहले जब हमारी शादी हुई थी तो मेरी जीवन संगिनी घूंघट में थी। पिछले दो दिनों से हम दोनों को साथ बिताए सुख-दुख के पल याद आ रहे हैं। इस मौके पर स्वामी भास्करानंद एवं साध्वी कृष्णानंद ने कहा कि वर्तमान युग में वरिष्ठजन का यह सम्मान हमारी नई पीढ़ी को बुजुर्गों के प्रति सेवा, श्रद्धा और विश्वास की भावना को मजबूत बनाने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा। ऐसे आयोजन हर घर, हर शहर और हर परिवार में होने चाहिए।
हल्दी और साजनगोठ की रस्म भी हुई
उत्सव के प्रमुख मार्गदर्शक प्रेमचंद गोयल, अध्यक्ष जगदीश बाबाश्री एवं अरुण आष्टावाले ने बताया कि सुबह इन बुजुर्ग युगलों ने पूरे उत्साह के साथ हल्दी की रस्म में भाग लिया। इस दौरान उनके नाती-पोतों ने भी अपने दादा-दादी और नाना-नानी की शादी का उत्सव आत्मसात किया। हल्दी की रस्म के बाद साजनगोठ की रस्म भी पूरी की गई, जिसमें वधू पक्ष के लोगों ने वर पक्ष के लोगों को शाही दावत दी। सभी युगलों और उनके साथ आए मेहमानों को अनेक प्रकार के व्यंजन मनुहार सहित परोसे गए। अनेक युगलों ने इस मौके पर भाव विभोर होकर यहां तक कहा कि खुद उनकी शादी भी इतने शाही अंदाज में नहीं हुई थी।
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