देश में कोरोना महामारी का खतरा एक बार फिर बढ़ने लगा है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा मंगलवार सुबह जारी आंकड़ों के अनुसार, पिछले 24 घंटों में देशभर में 5,676 नए मरीज सामने आए हैं। इसके साथ ही एक्टिव मरीजों की संख्या बढ़कर 37,093 हो गई है।
साप्ताहिक रिपोर्ट के मुताबिक, देश में पिछले 7 दिन के भीतर कोरोना के मरीजों में 79 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई है। 3 अप्रैल से 9 अप्रैल के हफ्ते में कोरोना से मरने वालों की संख्या 68 रही, जो उससे पहले के 41 मामले से अधिक है।
साप्ताहिक रूप से जिन प्रदेशों में कोरोना का प्रकोप बढ़ा हैं, उनमें शामिल हैं केरल, महाराष्ट्र, दिल्ली, हरियाणा, गुजरात, तमिलनाडु और हिमाचल प्रदेश। सबसे ज्यादा हालात केरल में खराब नजर आ रहे हैं। 3 से 9 अप्रैल के बीच यहां 11,296 केस सामने आए, जो इससे पहले हफ्ते (27 मार्च से 2 अप्रैल) के बीच 4660 थे।
तीन वर्ष पहले कोरोना के इलाज में एंटीबायोटिक और दूसरी दवाइयों के अंधाधुंध इस्तेमाल से स्वास्थ्य की नई समस्याएं पैदा हो गईं, लेकिन इस बार डॉक्टर सतर्क हैं। यही कारण है कि सामान्य खांसी बुखार व वायरल संक्रमण की तरह ही कोरोना के हल्के संक्रमण का इलाज किया जा रहा है।
फोर्टिस अस्पताल के पल्मोनरी मेडिसिन के विशेषज्ञ डा. विकास मौर्या ने कहा कि कोरोना से संक्रमण से ज्यादातर लोगों को हल्की बीमारी हो रही है। मरीजों को 100 से 103 डिग्री तक बुखार, खांसी, जुकाम, गले में खराश की समस्या देखी जा रही है।
बुजुर्ग व पुरानी बीमारियों से पीड़ित कुछ मरीज कोरोना के संक्रमण के कारण भर्ती हो रहे हैं। हल्की बीमारी से पीड़ित मरीजों को लक्षण के आधार पर बुखार, खांसी, एलर्जी की दवाएं दी जा रही है। कोई एंटीबायोटिक व एंटीवायरल दवाएं नहीं दी जा रही है। किसी मरीज को फेफड़े में संक्रमण पाए जाने पर जरूरत के मुताबिक रेमडेसिवीर दवा दी जा रही है
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