शरद शर्मा बेगमगंज रायसेन
तहसील बेगमगंज एवं सुल्तानगंज में राजस्व विभाग की व्यवस्था को लेकर बड़ा सवाल सामने आ रहा है। तहसील में कुल 33 हल्के हैं, लेकिन पटवारी सिर्फ 21 हैं। यानी नियम के मुताबिक जहां एक हल्के की जिम्मेदारी एक पटवारी के पास होनी चाहिए, वहां कई पटवारियों को अतिरिक्त हल्कों का काम संभालना पड़ रहा है। जिसके कारण किसानों के काम बिलंब से हो रहे है तो पटवारी भी बहुत ज्यादा परेशान है।
कमोवेश यही स्थिति सुल्तानगंज तहसील में भी दिखाई दे रही है। यहां 28 हल्कों के लिए सिर्फ 13 पटवारी पदस्थ हैं। ऐसे में एक पटवारी को एक से अधिक हल्कों की जिम्मेदारी संभालनी पड़ रही है।
अब सवाल यह है कि इसका सीधा असर किस पर पड़ रहा है?सबसे ज्यादा परेशानी किसानों और ग्रामीणों को उठानी पड़ रही है।राजस्व विभाग में नामांतरण, बंटवारा, सीमांकन और दुर्घटना जैसी घटनाओं की रिपोर्ट तैयार करने सहित कई महत्वपूर्ण काम पटवारियों के माध्यम से होते हैं।
जब एक पटवारी के पास एक से ज्यादा हल्कों की जिम्मेदारी होती है, तो उसे अलग-अलग गांवों और क्षेत्रों में जाकर काम करना पड़ता है। ऐसे में काम का दबाव बढ़ना स्वाभाविक है और कई मामलों में निर्धारित समय-सीमा में काम पूरा करने में देरी हो सकती है।
नियम के अनुसार एक पटवारी को एक हल्का सौंपा जाना चाहिए। वहीं अतिरिक्त हल्का दिए जाने पर एक हजार रुपये मानदेय का प्रावधान बताया जा रहा है। लेकिन सवाल सिर्फ मानदेय का नहीं है।
सवाल यह है कि अतिरिक्त जिम्मेदारी के कारण अगर काम का दबाव बढ़ रहा है और किसानों के जरूरी राजस्व कार्य प्रभावित हो रहे हैं, तो इसकी व्यवस्था कब सुधरेगी?किसानों के लिए जमीन से जुड़े काम बेहद महत्वपूर्ण होते हैं। नामांतरण हो, बंटवारा हो या सीमांकन—इन कामों के लिए ग्रामीणों को कई बार तहसील और पटवारी कार्यालय के चक्कर लगाने पड़ते हैं।
ऐसे में जरूरत इस बात की है कि रिक्त पदों को भरा जाए और हल्कों के हिसाब से पर्याप्त पटवारियों की व्यवस्था की जाए, ताकि किसानों को समय पर राजस्व सेवाएं मिल सकें।
एक पटवारी के पास कई हल्के होने से किसानों को काम का इंतजार करना पड़ रहा है।
अब देखना होगा कि राजस्व विभाग के जिम्मेदार अधिकारी इस समस्या को कितनी गंभीरता से लेते हैं और किसानों को समय पर राहत कब मिलती है।
किसान नेताओं ने अपील की है कि क्षेत्र में भी राजस्व संबंधी किसी काम में अनावश्यक देरी हो रही है, तो इसकी शिकायत संबंधित विभाग के समक्ष जरूर रखें और अपनी समस्या की जानकारी जिम्मेदार अधिकारियों तक पहुंचाएं।