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“सच बात पूछती हूँ, बताना ना बाबूजी…” ने सभागार को किया भाव-विभोर

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शिक्षक सम्मान समारोह एवं कवि सम्मेलन में करीब 50 शिक्षकों का सम्मान, विद्यार्थियों ने भी प्रस्तुत किया स्वरचित काव्य

भोपाल। शिक्षक दिवस के अवसर पर  बाबूलाल गौर शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, भेल, भोपाल में शिक्षक सम्मान समारोह एवं कवि सम्मेलन का भव्य आयोजन किया गया। संस्कृति संचालनालय, मध्यप्रदेश के प्रायोजन तथा सोसायटी ऑफ एनजीओ अवेयरनेस, अवधपुरी, भेल के सहयोग से आयोजित कार्यक्रम में सुप्रसिद्ध कवि संजय सिंह मुख्य अतिथि रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. संजय जैन ने की।

कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों ने दीप प्रज्वलन और मां सरस्वती के चित्र पर पुष्प अर्पित कर किया। भारत के प्रथम उपराष्ट्रपति एवं द्वितीय राष्ट्रपति डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन को भी पुष्पांजलि अर्पित की गई। महाविद्यालय की छात्रा शशि वंशकार ने सरस्वती वंदना प्रस्तुत की, जबकि मुस्कान ठाकरे ने नृत्य के माध्यम से गुरु वंदना प्रस्तुत की। नन्हीं बालिका अंशिका पाण्डेय के भावपूर्ण भजन ने वातावरण को भक्तिमय बना दिया।

मुख्य अतिथि कवि संजय सिंह का प्राचार्य डॉ. संजय जैन ने नवपल्लवित पौधा, शॉल एवं श्रीफल भेंट कर स्वागत किया। अपने स्वागत उद्बोधन में प्राचार्य ने कहा कि शिक्षक दिवस के अवसर पर राष्ट्रीय स्तर के कवि के मार्मिक उद्गार महाविद्यालय परिवार के लिए चिरस्मरणीय रहेंगे। उन्होंने श्रीकृष्ण की शिक्षाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि शिक्षक हर युग और काल में वंदनीय एवं पूजनीय रहे हैं।

करीब 50 शिक्षकों का सम्मान

समारोह का प्रमुख आकर्षण शिक्षक सम्मान समारोह रहा। सोसायटी ऑफ एनजीओ अवेयरनेस के अध्यक्ष महेन्द्र प्रसाद शर्मा ने सर्वप्रथम प्राचार्य डॉ. संजय जैन को सम्मानित किया। इसके बाद महाविद्यालय के लगभग 50 शिक्षकों को शॉल ओढ़ाकर सम्मानित किया गया। इस सम्मान के माध्यम से शिक्षक समुदाय के प्रति कृतज्ञता, आदर और सम्मान की भावना व्यक्त की गई।

 

स्वरचित कविताओं से विद्यार्थियों ने बांधा समां

इसके बाद कवि सम्मेलन का आयोजन हुआ। महाविद्यालय के स्वरचित साहित्य मंच के विद्यार्थियों श्रीया विश्वकर्मा, मनन दीक्षित, प्राची विश्वकर्मा एवं तुषार पाण्डेय ने गुरु को केंद्र में रखकर अपनी स्वरचित कविताओं का प्रभावशाली पाठ किया।

भोपाल के शायर नितेश ने “हे नमन गुरुवर तुम्हें स्वीकार हो” प्रस्तुत कर खूब वाहवाही बटोरी। स्वरचित साहित्य मंच की संयोजक एवं हिंदी विभागाध्यक्ष डॉ. सुषमा जादौन ने अपने पिता पर लिखा भावपूर्ण गीत प्रस्तुत किया—

“मेरी खुशी, मेरा जहां, मेरे बाबूजी,कभी भूल नहीं पाएंगे हम।बेटी हूं, तुम्हीं से है ये पहचान बाबूजी,आंगन में मुस्कुराएंगे हम।”

भावनाओं से ओतप्रोत इस प्रस्तुति ने महाविद्यालय परिवार के साथ मुख्य अतिथि कवि संजय सिंह को भी भावुक कर दिया।

संजय सिंह की प्रस्तुति ने नम कर दीं आंखें

कवि सम्मेलन के मुख्य आकर्षण सुप्रसिद्ध कवि संजय सिंह रहे। उन्होंने अपने चर्चित गीत “सच बात पूछती हूँ, बताना ना बाबूजी…” से काव्य पाठ की शुरुआत की। पिता-पुत्री के भावनात्मक रिश्ते को अभिव्यक्त करती इस प्रस्तुति ने पूरे सभागार को भाव-विभोर कर दिया। अनेक श्रोता भावुक नजर आए।

इसके बाद उन्होंने अपनी चर्चित कविता “हाय मेरे लाल, कैसा दिन ये दिखाया” प्रस्तुत की, जिसे उपस्थित श्रोताओं ने खूब सराहा। उनकी संवेदनशील और प्रभावपूर्ण प्रस्तुतियों ने कवि सम्मेलन को विशेष ऊंचाई प्रदान की।

कार्यक्रम के अंत में विभिन्न गतिविधियों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले दस विद्यार्थियों को पारितोषिक प्रदान कर उनका उत्साहवर्धन किया गया।

कार्यक्रम का संचालन हिंदी विभाग के सहायक प्राध्यापक डॉ. कमलेश सिंह नेगी ने किया। अंत में स्वरचित साहित्य मंच की छात्रा श्रीया विश्वकर्मा ने अतिथियों, प्राचार्य, शिक्षकों, विद्यार्थियों एवं आयोजन से जुड़े सभी सहयोगियों के प्रति आभार व्यक्त किया।

समारोह में महाविद्यालय का समस्त शैक्षणिक एवं अशैक्षणिक स्टाफ तथा बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे। शिक्षक दिवस पर आयोजित इस कार्यक्रम ने गुरु-शिष्य परंपरा की गरिमा को रेखांकित करने के साथ विद्यार्थियों की साहित्यिक एवं सांस्कृतिक प्रतिभाओं को मंच प्रदान किया।

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