सही गिनती,सही आंकड़े सही हिस्सेदारी,सामाजिक न्याय : कांग्रेस
भोपाल।अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के सदस्य एवं उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के पूर्व अध्यक्ष श्री अजय कुमार लल्लू जी ने आज भोपाल स्थित मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी कार्यालय में पत्रकार वार्ता को संबोधित करते हुए जातिगत जनगणना के मौजूदा प्रारूप में गंभीर मूलभूत कमियों को उजागर किया। उन्होंने कहा कि जातिगत जनगणना देश के करोड़ों पिछड़े, दलित, आदिवासी एवं वंचित वर्गों के सामाजिक न्याय और उनके अधिकारों से जुड़ा विषय है। ऐसे में यदि आंकड़े ही गलत होंगे तो सामाजिक न्याय का पूरा आधार कमजोर हो जाएगा।
अजय कुमार लल्लू ने कहा कि जातिगत जनगणना के मौजूदा प्रारूप को कांग्रेस खारिज करती है और मांग करती है कि वर्तमान प्रश्नावली को रद्द कर नई प्रश्नावली तैयार की जाए। तेलंगाना और बिहार में अपनाई गई पद्धति के अनुरूप जातियों की प्रमाणित सूची अर्थात ड्रॉपडाउन सूची तैयार कर देशभर में पारदर्शी तरीके से जातिगत जनगणना कराई जानी चाहिए।
उन्होंने कहा कि नई प्रश्नावली तैयार करने से पहले राजनीतिक दलों, सामाजिक संगठनों, विशेषज्ञों और जनता से व्यापक विचार-विमर्श किया जाना चाहिए, ताकि प्रत्येक जाति और समुदाय की वास्तविक संख्या सामने आ सके और जातिगत जनगणना सामाजिक न्याय की नीतियों के लिए विश्वसनीय आधार बन सके।
ओपन-एंडेड जाति प्रविष्टि से आंकड़ों में पैदा होगी भारी विसंगति
अजय कुमार लल्लू ने कहा कि आगामी जनगणना के लिए अधिसूचित 40 प्रश्नों में सवाल नंबर 10 से ही सरकार की गंभीरता पर सवाल खड़े होते हैं। जाति की जानकारी के लिए सरकार ने ओपन-एंडेड व्यवस्था अपनाई है, जबकि ड्रॉपडाउन सूची का इस्तेमाल किया जाना चाहिए था।
उन्होंने समझाते हुए कहा कि ड्रॉपडाउन व्यवस्था में सरकार द्वारा मान्य जातियों की प्रमाणित सूची पहले से उपलब्ध रहती है और गणनाकर्मी नागरिक द्वारा बताई गई जाति को उसी सूची में दर्ज करता है। इसके विपरीत ओपन-एंडेड व्यवस्था में व्यक्ति अपनी जाति, उपजाति या स्थानीय नाम बताएगा और गणनाकर्मी उसे उसी रूप में दर्ज करेगा।
भारत जैसे विशाल और विविध देश में एक ही जाति अलग-अलग राज्यों और क्षेत्रों में अलग-अलग नामों, उपनामों, बोलियों और वर्तनी के साथ जानी जाती है। ऐसे में एक ही जाति के अनेक नाम दर्ज हो सकते हैं और आंकड़ों में भारी विसंगति पैदा हो सकती है। परिणामस्वरूप देश में जातियों की वास्तविक संख्या और जनसंख्या का सही आकलन करना मुश्किल होगा।
उन्होंने कहा कि SECC-2011 में 46 लाख से अधिक जातिगत प्रविष्टियां सामने आने का अनुभव सरकार के सामने पहले से मौजूद है। जब सरकार स्वयं इस समस्या से परिचित है तो फिर उसी तरह की व्यवस्था को दोहराना समझ से परे है।
OBC की वास्तविक संख्या ही सामने नहीं आएगी तो सामाजिक न्याय कैसे होगा?
अजय कुमार लल्लू ने कहा कि मौजूदा प्रारूप की सबसे बड़ी चिंता यह है कि प्रश्नावली में पिछड़ा वर्ग शब्द तक स्पष्ट रूप से शामिल नहीं है। इससे देश के OBC और EBC समुदायों की वास्तविक संख्या और सामाजिक-आर्थिक स्थिति का प्रमाणिक आंकड़ा सामने आने पर गंभीर प्रश्न खड़े होते हैं।
उन्होंने कहा कि गलत तरीके से होने वाली जातिगत जनगणना का सबसे ज्यादा नुकसान OBC, EBC और अन्य वंचित वर्गों को होगा। यदि अलग-अलग नाम, उपजाति और वर्तनी के कारण एक ही जाति कई हिस्सों में बंट गई तो उनकी वास्तविक संख्या और वंचना दोनों आंकड़ों से गायब हो सकती हैं।
“जितनी आबादी, उतना हक” की मांग का आधार ही सही जनसंख्या आंकड़े हैं। सही आंकड़ों के अभाव में आरक्षण की न्यायसंगत समीक्षा, शिक्षा एवं छात्रवृत्ति, कौशल विकास, सरकारी रोजगार, कल्याणकारी योजनाओं में लक्षित हिस्सेदारी तथा विभिन्न संस्थानों में प्रतिनिधित्व का सही आकलन संभव नहीं होगा।
उन्होंने कहा कि गलत आंकड़े केवल आंकड़ों की गलती नहीं होते, बल्कि वे आने वाली पीढ़ियों के अधिकारों को प्रभावित करते हैं। एक त्रुटिपूर्ण जातिगत जनगणना OBC-EBC और अन्य वंचित समुदायों को दशकों पीछे धकेल सकती है।
जब OBC की सूची मौजूद है तो ड्रॉपडाउन से परहेज क्यों?
अजय कुमार लल्लू ने कहा कि सार्वजनिक रूप से सामने आई जानकारी के अनुसार 1 जून को हुई बैठक में सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय के अधिकारियों ने जातियों की गणना के लिए राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग के पास उपलब्ध OBC जातियों की सूची साझा करने की इच्छा जताई थी। बैठक के शुरुआती मसौदे में इस प्रस्ताव को सही तरीके से दर्ज नहीं किए जाने और बाद में सूची उपलब्ध होने की बात स्वीकार किए जाने की खबरें सामने आई हैं।
उन्होंने सवाल किया कि “जब OBC जातियों की सूची उपलब्ध है, केंद्र और राज्य सरकारों के पास जातियों की सूचियां मौजूद हैं, तो जातिगत जनगणना में ड्रॉपडाउन सूची का इस्तेमाल क्यों नहीं किया जा रहा है? पिछड़े वर्गों की प्रमाणित जाति सूची को इस प्रक्रिया में शामिल न करने का निर्णय किसके निर्देश पर लिया गया?”
उन्होंने कहा कि देश में लगभग 4,200 जातियों से संबंधित सूचियां केंद्र एवं राज्य सरकारों के पास उपलब्ध हैं। ऐसे में देशव्यापी जातिगत जनगणना जैसी ऐतिहासिक प्रक्रिया में प्रमाणित सूची का इस्तेमाल न करना गंभीर सवाल खड़े करता है।
सरकार के अपने पुराने हलफनामे और वर्तमान प्रक्रिया में विरोधाभास
अजय कुमार लल्लू ने कहा कि 21 सितंबर 2021 को सुप्रीम कोर्ट में दायर केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय के हलफनामे में केंद्र सरकार ने स्वयं माना था कि जातिगत जनगणना के लिए पहले से जातियों की ड्रॉपडाउन सूची तैयार होना आवश्यक है। इसके बावजूद आज उसी व्यवस्था को अपनाने से सरकार पीछे हटती दिखाई दे रही है।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस लंबे समय से सही और पारदर्शी जातिगत जनगणना की मांग कर रही है। यह मांग 2021 से लंबित है। कांग्रेस नेता एवं लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी वर्ष 2023 से लगातार जातिगत जनगणना की मांग उठाते रहे हैं।
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने भी इस विषय पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लगातार पत्र लिखे हैं। 16 अप्रैल 2023 को पहला पत्र और 5 मई 2025 को रचनात्मक सुझावों के साथ दूसरा पत्र भेजा गया। इसके बाद 20 अगस्त 2026 को कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने संयुक्त रूप से प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर जातिगत जनगणना की मौजूदा प्रक्रिया पर गंभीर आपत्ति दर्ज कराई।
अजय कुमार लल्लू ने कहा कि 2023 और 2024 के चुनावों के दौरान कांग्रेस द्वारा जातिगत जनगणना की मांग किए जाने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे लेकर आपत्तिजनक टिप्पणियां की थीं। लेकिन राहुल गांधी की लगातार मांग और देशव्यापी दबाव के बाद 30 अप्रैल 2025 को केंद्र सरकार को 2027 से जातिगत जनगणना कराने की घोषणा करनी पड़ी।उन्होंने कहा कि घोषणा करना पर्याप्त नहीं है, जातिगत जनगणना सही तरीके और सही नीयत से कराना जरूरी है।
अभी भी समय है, सरकार प्रारूप में सुधार करे
अजय कुमार लल्लू ने कहा कि सरकार के पास अभी भी जातिगत जनगणना के प्रारूप में आवश्यक सुधार करने का अवसर है। वर्तमान में प्रक्रिया कुछ क्षेत्रों में प्रारंभ हुई है और फरवरी 2027 से देशभर में जनसंख्या गणना का अगला चरण शुरू होना है।
उन्होंने केंद्र सरकार से मांग की कि मौजूदा जातिगत जनगणना प्रश्नावली को रद्द किया जाए। प्रमाणित जातियों की ड्रॉपडाउन सूची तैयार की जाए। तेलंगाना और बिहार की सफल पद्धतियों का अध्ययन कर उसे राष्ट्रीय स्तर पर लागू किया जाए। राजनीतिक दलों, विशेषज्ञों, सामाजिक संगठनों और जनता से व्यापक परामर्श किया जाए। SC, ST, OBC और सामान्य वर्ग के लिए राज्यवार प्रमाणित जाति सूचियों को प्रश्नावली में शामिल किया जाए।जातिगत आंकड़ों को सटीक, पारदर्शी और वैज्ञानिक तरीके से एकत्रित किया जाए।
अंत में अजय कुमार लल्लू ने कहा कि कांग्रेस पिछड़ों, दलितों, आदिवासियों और सभी वंचित वर्गों के अधिकारों की लड़ाई से पीछे नहीं हटेगी। सही जनगणना ही सही हिस्सेदारी और सामाजिक न्याय का आधार है। कांग्रेस की स्पष्ट मांग है “सही गिनती सही आंकड़े सही हिस्सेदारी →सामाजिक न्याय।
पत्रकार वार्ता में पिछड़ा वर्ग कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष पवन पटेल, पूर्व प्रदेश प्रवक्ता अवनीश बुंदेला, आनंद जाट, प्रवीण धौलपुरे, अभिनव बरोलिया, फिरोज सिद्दीकी एवं राहुल राज सहित कांग्रेस के पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
न्यूज सोर्स -मुकेश नायक,अध्यक्ष मीडिया विभाग मध्यप्रदेश कांग्रेस कमेटी