मनुष्य जब केवल अर्थ की चिंता छोड़कर परमार्थ के मार्ग पर चलता है, तभी उसका जीवन बनता हे सार्थक-मुनि श्री चंद्रसागर महाराज
सागर । आचार्य श्री विद्यासागर महाराज के परम प्रभावक शिष्य मुनि श्री चंद्रसागर महाराज ने प्रवचनों में कहा कि मनुष्य जब केवल अर्थ की चिंता छोड़कर परमार्थ के मार्ग पर चलता है, तभी उसका जीवन सार्थक बनता है। जो व्यक्ति अर्थ से हटकर परमार्थ में लग जाता है, वही वास्तविक अर्थों में श्रेष्ठ और गरिष्ठ बनता है।
मुनि श्री ने आचार्य श्री विद्यासागर महाराज के तप, त्याग और चरित्र का स्मरण करते हुए कहा कि उन्होंने अपने पूरे जीवन में किसी लिफाफे को खोलकर नहीं देखा और न ही कभी खिड़की- दरवाजे खोलने जैसे सांसारिक कार्यों में रुचि ली। वे चरित्र, कार्य और अनुमोदना—इन तीनों की पवित्रता पर विशेष बल देते थे तथा जीव और अजीव दोनों के प्रति सम्यक दृष्टि रखते थे। उन्होंने कहा कि साधु की दृष्टि सीसीटीवी कैमरे की तरह सजग होती है। आहार के समय भी साधु पूर्ण जागरूकता के साथ प्रत्येक परिस्थिति का अवलोकन करता है।
उन्होंने अभिभावकों को संबोधित करते हुए कहा कि आज के समय में बेटियों के संस्कार और सुरक्षा पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है। बच्चों को ऐसे वातावरण में शिक्षा मिले, जहां संस्कारों का विकास हो।
इस अवसर पर मुनि श्री गरिष्ठ सागर महाराज ने कहा कि निर्यापक श्रमण मुनि श्री अभय सागर महाराज दिनभर अध्ययन और लेखन में निरंतर लगे रहते हैं। वे अपनी जागरूकता, अनुशासन और गुरु के प्रति अद्भुत समर्पण के लिए जाने जाते हैं। उन्होंने कहा कि मुनि श्री अभय सागर महाराज ने ऐसे अनेक कार्य संपन्न कराए हैं, जो सदैव स्मरणीय रहेंगे। उनकी प्रेरणा से जबलपुर-अजमेर रेलगाड़ी का नाम दयोदय एक्सप्रेस तथा जबलपुर-रायपुर रेलगाड़ी का नाम मूकमाटी एक्सप्रेस रखा गया।
मुनि श्री गरिष्ठ सागर महाराज ने कहा कि मुनि श्री अभय सागर महाराज सदैव संतुलित रहकर उचित समय पर उचित निर्णय लेने की क्षमता रखते हैं और गुरु के बताए सूत्रों पर चलना ही उनके जीवन का आधार है। उन्होंने आचार्य श्री विद्यासागर महाराज का सूत्र स्मरण कराते हुए कहा कि “उत्साह बनाए रखोगे तो प्रत्येक कार्य सानंद संपन्न होगा।” उन्होंने कहा कि मुनि श्री अभय सागर महाराज की संवाद शैली अत्यंत प्रभावशाली है। वे बालक से बालक की भाषा में तथा विद्वानों से विद्वत्ता के अनुरूप सहज ढंग से संवाद कर सभी को धर्म का संदेश समझा देते हैं।
बच्चों की संस्कार पाठशाला प्रति रविवार लगेगी
चातुर्मास के दौरान मुनि श्री चंद्र सागर महाराज के द्वारा बच्चों की संस्कार पाठशाला प्रति रविवार को दोपहर 3.30 बजे से 4:30 बजे तक भाग्योदय तीर्थ के पंडाल में लगाई जाएगी।
बच्चों में धार्मिक एवं नैतिक संस्कारों का विकास होना चाहिए। शरीर में स्थित जीव तत्व की सुरक्षा और आत्मकल्याण के विचार बचपन से ही विकसित किए जाने चाहिए।
पाठशाला में कक्षा 5 वीं से 12 वीं तक के विद्यार्थियों के लिए श्रेष्ठाचार संस्कार शिक्षा का आयोजन किया जाएगा।
मुकेश जैन ढाना ने सभी अभिभावकों से अपने बच्चों को भाग्योदय तीर्थ पंडाल में प्रति रविवार लगने वाली पाठशाला में भेजने की अपील की है। जिससे बच्चों को पढ़ाई के साथ-साथ नैतिक संस्कार मिल सके।