सुरेंद्र जैन धरसीवा
संसार को जियो ओर जीने दो का शुभ संदेश देने वाले अंतिम केवली भगवान महावीर स्वामी का 2625 वा जन्म कल्याणक धरसीवा के सांकरा ओर तिल्दा नेवरा में भक्तिभाव के साथ मनाया गया.तिथि अनुसार चैत्र शुक्ल त्रयोदशी को भगवान महावीर जन्मकल्याणक प्रतिवर्ष मनाया जाता है.

तिल्दा नेवरा ओर सांकरा जैन मंदिर में प्रातः का भगवान महावीर स्वामी का जन्माभिषेक हुआ तत्पश्चात भगवान महावीर स्वामी की प्रतिमा को विमान में विराजित कर मुख्य मांगो से भव्य शोभायात्रा निकाली गई इस दौरान समाज के लोग भक्ति में नाचते ओर भजन गाते चल रहे थे साथ ही भगवान महावीर का शुभ संदेश जियो ओर जीने दो को जन जन तक पहुंचा रहे थे.यहां यह बताना लाजमी होगा कि जैन धर्म में प्रथम तीर्थंकर भगवान ऋषभदेव से लेकर अंतिम तीर्थंकर भगवान महावीर स्वामी तक चौबीस तीर्थंकर हुए हैं.

भगवान महावीर स्वामी का जन्म 2625 साल पहले कुंडलपुर के क्षत्रिय इक्ष्वाकु वंश के राजा सिद्धार्थ के राज कुल में हुआ था और तीस वर्ष की आयु में ही उन्हें वैराग्य हो गया ओर वह राजपाठ त्यागकर कठिन तपस्या करने वन को निकल गए.भगवान महावीर स्वामी ने अपने जीवनकाल में प्रत्येक प्राणी को अहिंसा दया करुणा जीवदया का संदेश दिया उनके काल में मूक प्राणियों में भी एक दूसरे के प्रति जियो ओर जीने दो की भावना इतनी प्रबल हुई कि गाय ओर शेर भी एक घांट पानी पीते थे