शिवपुरी । जिला इन दिनों आदिवासी भूमि खुर्दबुर्द करने वाले शातिर गिरोहों का केंद्र बन चुका है। सहरिया समुदाय की विक्रय से वर्जित जमीनों पर समानान्तर नेटवर्क के जरिए भारी पैमाने पर फर्जीवाड़ा चल रहा है, और प्रशासन की भूमिका शर्मनाक तरीके से मूकदर्शक बनी हुई है। हालात इतने भयावह हैं कि पूरे प्रदेश में शिवपुरी को सहरिया शोषण का हब कहा जाने लगा है।
सूत्रों के मुताबिक, तहसील दफ्तर से लेकर रजिस्ट्रार कार्यालय और कमिश्नरी तक कुछ कर्मचारियों की मिलीभगत से सहरिया जमीनों की फर्जी खरीदी-बिक्री का खेल खुलेआम चल रहा है। भूदान की जमीनें, दशकों पुराने पट्टे, और विक्रय से पूर्णतः प्रतिबंधित सहरिया भूमि सबकुछ ‘निगमों’ की तरह बेच दिया गया। पीड़ित आदिवासियों की पुश्तैनी जमीनें कागजों में पल भर में किसी और की हो जाती हैं, जबकि प्रशासन चुपचाप देखता रहता है।
इन्हीं निरंकुश हालात से आहत होकर सहरिया क्रांति ने बड़ा आंदोलन छेड़ने का फैसला लिया है। संगठन ने घोषणा की है कि पहले जिला कलेक्टर कार्यालय पर धरना-प्रदर्शन कर ज्ञापन सौंपा जाएगा, इसके बाद कमिश्नरी पर एक दिवसीय धरना, और अंत में भोपाल स्थित मुख्यमंत्री आवास घेरकर अंतिम लड़ाई लड़ी जाएगी। यह आंदोलन चरणबद्ध, मजबूत और न्याय पाने की लड़ाई का निर्णायक कदम माना जा रहा है।
सहरिया क्रांति के संयोजक संजय बेचैन ने दावा किया कि पिछले 25 साल, यानी सन 2001 से लेकर आज तक सहरिया समुदाय की विक्रय से वर्जित जमीनों का जो भी फर्जी हस्तांतरण हुआ है, यदि इसकी जांच देश की बड़ी एजेंसियों से कराई जाए तो 85 प्रतिशत मामले फर्जी दस्तावेज़ों और मिलीभगत के आधार पर पाए जाएंगे। यह सिर्फ भ्रष्टाचार नहीं एक पूरी जाति के अस्तित्व पर हमला है।
संजय बेचैन का आरोप है कि शिवपुरी में एक समानान्तर ‘लैंड माफिया नेटवर्क’ सक्रिय है, जो गरीब और अशिक्षित आदिवासियों को छलकर उनकी जमीनें हथियाने में माहिर है। चौंकाने वाली बात यह है कि इस नेटवर्क के तार प्रशासनिक तंत्र के कुछ कर्मचारियों तक जाते हैं, जो भू-माफिया को सुरक्षा कवच प्रदान करते हैं।
जमीनों की इस लूट ने सहरिया समाज की पीढ़ियों की कमर तोड़ दी है। अब यह लड़ाई सिर्फ जमीन की नहीं, बल्कि अस्तित्व, सम्मान और न्याय की लड़ाई बन चुकी है।
सहरिया क्रांति का यह उग्र आंदोलन शिवपुरी ही नहीं, पूरे प्रदेश की सत्ता और प्रशासन को कठघरे में खड़ा करने वाला साबित होगा। अब देखने वाली बात यह है कि सरकार जागती है या फिर माफिया का दंश और गहरा होता जाता है।