-देश की सबसे ऊंची अटल बिहारी वाजपेयी जी की प्रतिमा चढ़ी भ्रष्टाचार की भेंट चढी
-लोकार्पण से पहले ही जर्जर हुई 60 लाख की लागत से बनाई पूर्व पीएम अटल की प्रतिमा
-कांग्रेसी बोले भारत रत्न को भी नहीं छोड़ा, जांच कर कार्रवाई की उठाई मांग
अनुराग शर्मा सीहोर
भारत रत्न स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेयी भाजपा के इकलौती वो शख्शियत हैं जिन्होंने भाजपा को जमीन से सत्ता के शिखर पर पहुंचाया। जनसंघ, जनता पार्टी और बाद में बीजेपी की नींव रखने वाले चेहरों में से एक नाम स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेयी का भी है 6 अप्रैल 1980 को बीजेपी का गठन हुआ था और एक राजनीतिक दल के रूप में पहले लोकसभा चुनाव में पार्टी के खाते में महज दो सीटें ही आई थी इसके बावजूद स्वर्गीय वाजपेयी ने हार नहीं मानी और उन्होंने कहा था, ‘अंधेरा छंटेगा, सुरज निकलेगा, कमल खिलेगा.’ इसी का नतीजा है कि मौजूदा समय में केंद्र की सत्ता से लेकर देश के 12 से ज्यादा राज्यों में बीजेपी की सरकारें हैं और भारत रत्न स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेयी भारतीय जनता पार्टी के आधार स्तंभों में से एक थे जिन्होंने बीजेपी में प्राण फूंकने का काम किया था और कांग्रेस के तिलिस्म को तोड़ने में स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेई की अहम भूमिका थी लिहाजा वे पहले ऐसे गैर कांग्रेसी प्रधानमंत्री बने थे जिन्होंने पांच साल तक सरकार चलाई थी। वहीं आज बीजेपी भले ही अपने सुनहरे काल में चल रही हो लेकिन अटल विचार कहीं न कहीं खोती जा रही है बीजेपी अटल विचार से उलट चल रही है इसका उदाहरण सिहोर जिले की आष्टा विधानसभा में देखने को मिल रहा है जहां भाजपा को श्रीमती हेमकुंवर मेवाड़ा की नगर सरकार अपने ही आधार स्तंभ भारत रत्न स्वर्गीय अटल बिहारी की सबसे ऊंची प्रतिमा भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ा चुकी है और अब आष्टा सहित पूरे जिले में भाजपा की किरकिरी हो रही है
60 लाख रुपए लागत वाली देश की सबसे बड़ी अटल बिहारी वाजपेयी की प्रतिमा की साल भर में खुली पोल
पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेई की सबसे ऊंची प्रतिमा सीहोर जिले के आष्टा की आवास कालोनी में भाजपा श्रीमती हेमकुंवर मेवाड़ा की नगर सरकार ने लगाई। जिसकी ऊचाई 42 फिट है वही इसके प्लेटफार्म की ऊचाई 12 है जिसकी कुल ऊंचाई 54 फिट के लगभग है और जिसकी लागत 60 लाख रुपए अनुमानित बताई जा रही जिसका ढाई टन वजनी के लगभग और बहुत मजबूती का दावा किया गया था लेकिन महज 1 साल के अंतराल में यह 60 लाख रुपए लागत की स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेई को प्रतिमा अब भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ती हुई नजर आ रही है और उक्त प्रतिमा में जनप्रतिनिधियों के साथ अफसरों पर भी भ्रष्टाचार करने के आरोप लग रहे हैं लिहाजा उक्त प्रतिमा को जांच के दायरे में लाने की मांग अब उठने लगी है।
बगैर लोकार्पण के खुली पोल, जांच के दायरे में लाने की उठी मांग
भाजपा की हेमकुंवार मेवाड़ा की नगर सरकार द्वारा शहर की आवास कालोनी में लगाई गई देश की सबसे ऊंची प्रतिमा का अनावरण अटल बिहारी वाजपेई की जयंती 25 दिसंबर 2023 में बीते वर्ष होना था। लेकिन साल भर होने को है उक्त प्रतिमा का अब तक अनावरण नहीं हुआ है और तो औ रअनावरण से पहले इस 60 लाख रुपए लगात की प्रतिमा में भ्रष्टाचार की जंग लगने के कारण 1 वर्ष में प्रतिमा पूरी कहानी बयां करने लगी है लिहाजा शहर भर में भाजपा के जनप्रतिनिधियों की नैतिकता पर भी सवाल खड़े होने शुरू हो गए हैं कि अपने ही आधार स्तंभ नेता की प्रतिमा को इन भ्रष्टाचारीयो ने नहीं बख्शा! और अब बकायदा जनप्रतिनिधियों ने सीहोर कलेक्टर को लिखित में शिकायत कर उक्त प्रतिमा को जांच में लाने की मांग उठाई है। खेर देखना यह है की भोली भाली जनता के टैक्स के पैसे का दुर्पयोग पर सीहोर कलेक्टर क्या संज्ञान लेते हैं या भाजपा के जिला पदाधिकारियों सहित स्थानीय नेताओं का जमीर जागता है या फिर इसी तरह अपने आधार स्तंभ भारत रत्न स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेई के विचारों को भ्रष्टाचार की तले रौंदते रहेंगे।
कांग्रेस ने कसा तंज, भारत रत्न को भी नहीं छोड़ा, जांच कर कार्रवाई होनी चाहिए
शहर में भाजपा की नगर सरकार द्वारा लगाई गई अपनी ही पार्टी के आधार स्तंभ भारत रत्न स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेई की प्रतिमा पर कांग्रेस के iccc सदस्य हरपाल सिंह ने तंज कसते हुए कहा कि भाजपा ने भारत रत्न अपने ही आधार स्तंभ पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेई की प्रतिमा को भी नहीं छोड़ा जिस तरीके से भाजपा की नगर पालिका परिषद द्वारा भारत रत्न पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेई की प्रतिमा को लेकर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए जा रहे हैं निश्चित तौर से जो पार्टी अपने नेता के प्रतिमा में भ्रष्टाचार कर सकती है वह बेहद निंदनीय है और इसकी जांच कर दोशियों पर कार्रवाई की जाना चाहिए।