क्रेशर संचालकों पर मेहरबान खनिज अधिकारी, आम लोगों पर कार्रवाई
उच्च अधिकारी की क्यों है चुप्पी..?
अभिषेक असाटी बक्सवाहा
बकस्वाहा में हाल ही में एक घटना ने सुर्खियां बटोरी हैं, जिसमें खनिज अधिकारी सहायक खनिज निरीक्षक रमाकांत तिवारी ने अवैध खनिज उत्खनन और क्रेशरों की जांच के दौरान एक ट्रैक्टर को पकड़ा, जो प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत निर्माण सामग्री ले जा रहा था। इस कार्रवाई से स्थानीय लोग और पत्रकार सवाल उठा रहे हैं कि अधिकारी केवल गरीबों पर ही कार्रवाई क्यों कर रहे हैं, जबकि क्रेशरों द्वारा नियमों का उल्लंघन जारी है।

क्रेशरों से उड़ती धूल और अवैध उत्खनन
बकस्वाहा नगर से 2 किलोमीटर दूर स्थित क्रेशरों पर अवैध उत्खनन और ब्लास्टिंग के कार्य निरंतर जारी हैं। हर शाम क्रेशरों से उड़ती धूल नेशनल हाइवे पर कोहरे की भांति फैलती है, जो सड़क हादसों का कारण बन रही है। कृषकों के लिए भी यह धूल समस्या बन गई है, क्योंकि यह उनकी फसलों को नुकसान पहुंचा रही है। वही देखा जाए एचएस क्रेशर जू अपनी मनमर्जी पर तारु है और अवैध उत्खनन में सबसे बड़ा क्रेशर है। स्थानीय पत्रकारों द्वारा इस मुद्दे को उठाए जाने पर, सहायक खनिज अधिकारी तिवारी ने क्रेशरों को नियमों के अनुसार संचालित होने की बात कही, जिससे क्रेशर संचालकों के हौसले बुलंद हो गए हैं।

गरीबों पर कार्रवाई, रसूखदारों पर चुप्पी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘हर घर’ के सपने को साकार करने में सहायक खनिज अधिकारी ने रोड़ा बनते हुए, प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत स्वीकृत आवास के निर्माण हेतु सामग्री एकत्रित कर रहे ट्रैक्टर चालक गोविंद यादव को थाने ले जाकर कार्रवाई की। गोविंद यादव ने बताया कि वे स्ट्रॉन क्रेशर से रेत लेकर घर जा रहे थे, जब अधिकारी ने उन्हें थाने ले जाकर कार्रवाई की। पत्रकारों द्वारा क्रेशरों पर कार्रवाई क्यों नहीं की जाती, इस सवाल पर अधिकारी ने कहा कि क्रेशर नियम से चल रहे हैं, और जो सही नहीं होगा, उस पर कार्रवाई करेंगे।
नियमों की अनदेखी और स्थानीय समस्याएं
स्थानीय लोग और पत्रकार इस बात से चिंतित हैं कि अधिकारी केवल गरीबों पर ही कार्रवाई कर रहे हैं, जबकि क्रेशर संचालकों द्वारा नियमों की अनदेखी की जा रही है। स्थानीय पत्रकारों ने इस मुद्दे को उठाया है, लेकिन अधिकारी की चुप्पी ने स्थिति को और भी जटिल बना दिया है।
*मोहन सरकार की सुशासन नीति पर सवाल*
शासन के द्वारा नियम नीति से क्रशरों का संचालन किया जाना चाहिए लेकिन बक्सवाहा में चल रहे क्रेशर अपनी मनमर्जी से चलने पर उतारू है वहीं क्षेत्र के लोग जब इस समस्या को शासन तक पहुंचाने के लिए अधिकारियों के पास जाते हैं तो उन्हें सिर्फ निराशा ही हाथ लगती है ऐसी कौन सी बात है जिससे गरीबों पर कार्यवाही और अवैध उत्खनन और अवैध रूप से सुचारू क्रशरों पर कार्यवाही नहीं। एक तरफ शासन गरीबों के लिए हर तरह से प्रयास कर रही है वहीं शासन के कुछ अधिकारी गरीबों को चूसने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं अब देखना है कि मोहन सरकार इन अधिकारियों पर क्या कार्यवाही करती है।