साधु का भेष धारण कर लंका पति राजा रावण ने किया माता सीता का हरण
सी एल गौर रायसेन
ऐतिहासिक रामलीला के चलते गुरुवार को रामलीला मैदान में स्थानीय कलाकारों द्वारा सीता हरण प्रसंग की आकर्षक लीला का मैदानी मंचन किया जिसे देखकर दर्शन मंत्र मुग्ध हो गए। प्रस्तुत की गई लीला के अनुसार अपनी बहन सूर्पनखा की नाक का बदला लेने के लिए लंका पति रावण योजना बनाता है और मन में विचार करते हुए मामा मरीच को बुलाता है और कहता है कि मुझे उन राजकुमारों की भारणी सीता का हरण करना है तुम्हें मेरा साथ देना होगा जिस पर मामा मरीच रावण को समझाते हैं कि ऐसा आप गलत कर रहे हैं किसी नारी का हरण करना सही नहीं है । इतनी बात सुनकर लंका पति रावण गुस्से में आ जाता है और मारीच से कहता है कि तुम अगर मेरा कहना नहीं मानोगे तो अंजाम बुरा होगा इस प्रकार से मां मेरी सोचता है कि रावण के हाथों से मरना

ठीक नहीं मैं इनके कहने से सोने का मृग बन जाता हूं जिससे कि भगवान राम के हाथों से मेरी मृत्यु हो तो मेरा उद्धार हो जाएगा । इस प्रकार से मारीच मृग बनकर जंगल में पहुंचते हैं। इधर सीता जी की निगाह मृग के ऊपर पड़ती है तो वह उसे लाने के लिए भगवान राम से कहती हैं कितना सुंदर मृग है इसको पकड़ कर लाओ, फिर भगवान राम वन में मृग के पीछे-पीछे चलते हैं और मृग को वान मार देते हैं जिसके मुंह से आवाज आती है कि हाय सीता हाय लक्ष्मण जब आवाज माता सीता के कानों में पड़ती है तो वह लक्ष्मण से कहती हैं कि हो सकता है आपके भाई राम किसी धर्म संकट में है आपको जाकर देखना चाहिए। माता सीता की आज्ञा से लक्ष्मण जाने के लिए तैयार होते हैं और सीता जी से कहते हैं कि मैं लक्ष्मण रेखा खींच कर जा रहा हूं इसको आप पर मत करना। परंतु मायावी लंका पति रावण साधु का भेष धारण कर और माता सीता से भिक्षा मांगने के लिए आता है परंतु वह लक्ष्मण रेखा नहीं लांघता है बाहर आकर भिक्षा देने की बात करता है माता सीता जैसे ही भिक्षा देने के लिए लक्ष्मण रेखा को पार करती हैं इस समय मायावी लंका पति रावण आकाश मार्ग से सीता का हरण कर ले जाता है।
इस प्रकार से रामलीला में सीता हरण प्रसंग की आकर्षक प्रस्तुति हुई। दिनों दिन आप रामलीला में प्रतिदिन बड़ी संख्या में धर्म प्रेमी रामलीला मेला को देखने के लिए रामलीला मैदान पहुंच रहे हैं।