Let’s travel together.

इलेक्टोरल बॉन्ड की जानकारी तुरंत क्यों नहीं दे पा रहा SBI? सुप्रीम कोर्ट में दिए ये तर्क

0 78

इलेक्टोरल बॉन्ड मामले में सुप्रीम कोर्ट ने SBI को बड़ा झटका दिया और उसे राजनीतिक दलों को दिए जाने वाले चुनावी चंदे की जानकारी देने के मामले में कोई राहत नहीं दी है. सुप्रीम कोर्ट ने एसबीआई को आदेश देते हुए कहा है कि वह 12 मार्च तक चुनाव आयोग को जानकारी दे और 15 मार्च तक पोर्टल पर जानकारी को सार्वजनिक करे. साथ ही साथ एसबीआई की समय बढ़ाने की अर्जी खारिज कर दी.

एसबीआई का पक्ष रखने के लिए सुप्रीम कोर्ट में वरिष्ठ वकील हरीश साल्वे पेश हुए. उन्होंने तर्क रखते हुए कहा कि इलेक्टोरल बॉन्ड लेने वालों के नाम और नंबर देने के लिए समय चाहिए. हमें पूरा प्रोसेस रिवर्स करना होगा. यह जानकारी सीक्रेट थी और अब चुनाव आयोग (ईसीआई) को देनी है. इस पर मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ (CJI) ने कहा कि पूरी जानकारी मुंबई की सेंट्रल मेन ब्रांच भेज दी जाती है, ऐसे में फिर से चुनाव आयोग को देने में परेशानी क्या है?

साल्वे ने सुप्रीम कोर्ट से कहा कि उनकी समस्या ये है कि सभी नाम अलग फिजिकली रखे गए हैं, जबकि बॉन्ड नंबर और किस राजनीतिक दल को बॉन्ड दिया गया, ये अलग है. साल्वे ने कहा कि ये बैंक की समस्या है. बॉन्ड किसने खरीदे हैं ये जानकारी दी जा सकती है, लेकिन नाम के साथ बॉन्ड नंबर देने के लिए समय चाहिए होगा. इस प्रोसेस के लिए कम से कम तीन महीने चाहिए होंगे, ऐसे में कोई गलती नहीं कर सकते हैं, नहीं तो लोग उनके खिलाफ केस दर्ज करवा देंगे.

यह एक बहुत गंभीर मामला है- सुप्रीम कोर्ट

एसबीआई से कोर्ट ने पूछा कि पिछले 26 दिन में आपने क्या किया है? एसबीआई का कहना है कि बॉन्ड नंबर, नाम और कितने का बॉन्ड हैं, ये दो-तीन हफ्ते में ईसीआई को मुहैया करवा दिए जाएंगे. सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपने हुए निर्देश दिए कि तत्काल प्रभाव से आदेश का पालन होना चाहिए. एसबीआई चुनाव आयोग के सामने जानकारी रखे. यह एक बहुत गंभीर मामला है.

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हमने एसबीआई का पक्ष सुना है, जिसमें बताया गया कि जानकारी सिक्रेसी के चलते दो जगह रहती है, ऐसे में जानकारी देने के लिए तीन सप्ताह का समय मांगा. इसकी वजह डोनर और बॉन्ड की मैचिंग की परेशानी वजह बताई गई. साथ ही कानूनी प्रावधानों का जिक्र किया गया. उसने बताया कि जानकारी को मैच करना बहुत समय लेने वाली प्रक्रिया है और दो अलग जगह जानकारी रहती है. 22027 बॉन्ड और 44434 बॉन्ड को मैच करने में बहुत समय लगेगा.

सुप्रीम कोर्ट इलेक्टोरल बॉन्ड को कर चुका अवैध घोषित

एसबीआई ने पहले आवेदन कर 30 जून तक समय मांगा था, दूसरी ओर एडीआर, कांग्रेस व अन्य ने अवमानना दाखिल की थी. संविधान पीठ ने 15 फरवरी को इलेक्टोरल बॉन्ड को अवैध घोषित किया था. एसबीआई बॉन्ड की जानकारी चुनाव आयोग को 12 अप्रैल 2019 से 15 फरवरी तक की मुहैया कराने को कहा गया था. एसबीआई को यह जानकारी 6 मार्च तक चुनाव आयोग को मुहैया करानी थी. इसमें बॉन्ड किसने लिया, बॉन्ड नंबर, किस पार्टी को दिया ये जानकारी देना शामिल था और इसके बाद चुनाव आयोग को 30 मार्च तक जानकारी पोर्टल पर सार्वजनिक करनी है.

Leave A Reply

Your email address will not be published.

27 साल अस्थायी सेवा के बाद कर्मचारी को नियमित करने का हाईकोर्ट का आदेश     |     सेन्ट्रल बैंक ऑफ इंडिया के एमएसएमई क्रेडिट आउटरीच कार्यक्रम में उद्यमियों को 63 करोड़ के वितरित किए गए ऋण स्वीकृति पत्र     |     कार्यालय समय में कृषि विभाग पर लटका रहा ताला, किसान हुए परेशान     |     आरिफ अली भाजपा जिला कार्यकारिणी में विशेष आमंत्रित सदस्य बने     |     पानी के लिए मचा घमासान! दो गांवों में मारपीट, पुलिस तक पहुंचा विवाद,महिला घायल     |     करघे की खनक से वैश्विक मंच तक पहुंची भारत की आवाज, रंजीता प्रियदर्शिनी ने साड़ी में बुनी महिला अधिकारों की कहानी     |     रायसेन में एक सप्ताह से जलसंकट, महामाया चौक पर नागरिकों का आमरण अनशन     |     रायसेन में पानी के लिए हाहाकार महिलाओं ने नपा के सामने फोड़े मटके, विदिशा रोड पर लगाया जाम     |     मध्यप्रदेश पर्यटन क्विज: छात्रों को मिली प्रदेश के पर्यटन एवं सांस्कृतिक विरासत की जानकारी     |     महामृत्युंजय अनुष्ठान की पूर्णाहुति, असंख्य शिवलिंग निर्माण के साथ  में सुख-समृद्धि और अच्छी बारिश की कामना     |    

Don`t copy text!
पत्रकार बंधु भारत के किसी भी क्षेत्र से जुड़ने के लिए इस नम्बर पर सम्पर्क करें- 9425036811