लखनऊ: रामनगरी अयोध्या में 22 जनवरी को राम मंदिर में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा की जाएगी जिसके लिए तैयारियां जोर-शोर से चल रही हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस समारोह के मुख्य यजमान रहेंगे। श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र न्यास ने समारोह में 7,000 से अधिक लोगों को देश-दुनिया से आमंत्रित किया है। पूरे देश में उत्साह का माहौल है। इस दिन को हर कोई यादगार बनाने में जुटा है। खबरों के मुताबिक इस समारोह में दुनियाभर से लोग पहुंच रहे हैं। रामोत्सव, राममंदिर दर्शन यात्रा और रामज्योति जैसे कार्यक्रमों लेकर सरकार और संगठन में तालमेल की स्पष्ट रेखा खींची जा रही है। राष्ट्रीय महामंत्री (संगठन) बीएल संतोष ने सोमवार को बैठक करके कई अहम रणनीति साझा की।
राम मंदिर दर्शन यात्रा में भाजपा कार्यकर्ताओं को झंडा ले जाने की होगी मनाही
श्री राममंदिर आंदोलन से लेकर फैसला और अयोध्या के अलौकिक विकास की यात्रा को भाजपा लोकसभा चुनाव में साधने की पूरी तैयारी कर चुकी है। अबकी बार 400 पार, तीसरी बार मोदी सरकार.. का नारा देकर समीकरण साधने में कोई कसर नहीं छोड़ी जा रही है। मगर, राम मंदिर दर्शन यात्रा में भाजपा कार्यकर्ताओं को झंडा ले जाने की मनाही होगी। राष्ट्रीय महामंत्री (संगठन) बीएल संतोष ने मुख्यमंत्री आवास में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात की। वे तीन दिन तक लखनऊ और अयोध्या में रहेंगे। उनके साथ प्रदेश महामंत्री संगठन धर्मपाल सिंह भी थे।
धार्मिक कार्यक्रम केवल एक पार्टी का न दिखे, इसके लिए रणनीति तय की गई
सूत्रों के अनुसार बैठक में धार्मिक कार्यक्रम केवल एक पार्टी का न दिखे, इसके लिए रणनीति तय की गई। मुख्यमंत्री ने रामोत्सव के लिए करोड़ों का बजट देकर पहले से ही सरकारी आयोजन घोषित कर रखा है। बीएल संतोष ने सरकार और संगठन के बीच समन्वय का ठीक वैसे ही रहने देने का उदाहरण दिया, जैसा विकसित भारत संकल्प यात्रा में दिख रहा है। इससे भाजपा अपने वोट साध रही है, जबकि खर्चा सरकार कर रही है।
पार्टीगत मामला होने पर बिगड़ सकता है माहौल
सूत्रों के अनुसार रणनीति बनी कि 22 जनवरी का उत्साह सभी घरों में दिखना चाहिए, ऐसा माहौल बनाना है। इसके लिए भाजपा कार्यकर्ता हर वर्ग, समुदाय, संगठन, बौद्धिक वर्ग आदि से मिलकर धार्मिक आयोजन का उत्साह बांटे। इसमें सरकारी तंत्र भी शामिल हो। कहा गया कि पार्टीगत मामला होने पर विरोधी पक्ष के लोग रामोत्सव और रामज्योति जलाने से दूर रह सकते हैं। यह भी हो सकता है कि राजनीतिक खेमेबाजी होने लगे, विरोधी अपने झंड़े के साथ दर्शन करने निकले और माहौल खराब हो, इसलिए ऐसा दृष्य न उपस्थित हो, इसके लिए धार्मिक आयोजन का ही उत्साह हो। तभी आयोजन में हर कोई उत्साह के साथ शामिल होगा। यह मंत्र गांव-गांव-घर- घर तक पहुंचाना है। इसमें सबसे अहम कड़ी सरकारी तंत्र को जोड़ना है, ताकि उत्साह कई गुना दिखे।