उदयपुरा रायसेन ।मानस मानस सम्मेलन समिति पचामा के तत्वाधान में आयोजित मानस प्रवचन श्रृंखला के पंचम दिवस की सत्संग सभा को संबोधित करते हुए मानस विद्यापीठ के आचार्य सुरेंद्र स्थापक ने बताया कि तुलसीदास के राम कामदेव के शत्रु, जन्म मृत्यु के भय को हरने वाले, ज्ञान के द्वारा जानने योग योगियो के स्वामी, गुण की निधि, माया से परे देवताओं के स्वामी, दुषटो के बध में तत्पर, सज्जन पुरुषों के एकमात्र रक्षक, पृथ्वी पति राजा के रूप में परम देव श्री राम जी परम बंदनीय है, प्रभु श्री राम दुष्टों को दंड देने वाले हैं, वह परम कल्याणकारी हैं, प्रभु श्री राम सत्गुणों के समूह हैं, न्याय के रक्षक इस तरह श्री राम सद प्रवृत्तियों का नाम है, वहीं रावण जो अत्याचारी,

अनाचारी, दुराचारी, पापचारी, निकृष्ट प्रवृत्तियों का पालक एवं पक्षधर रहा, जिसके पास धन, संपत्ति, वैभव, राज सभी कुछ था लेकिन अपने अहंकार के वस, और सदाचार से दूर था, रावण के अंदर दुष्टता का ढेर लगा हुआ था, आचार्य ने बताया कि चरित्रवान ही सर्वत्र बंदनीय एवं पूजनीय हैं, चरित्रहीन व्यक्ति का सम्मान केवल भय और डर से ही होता है, ऐसी दुष्ट प्रवृत्तियों का हमें सम्मान नहीं करना चाहिए, प्रभु श्री राम को अहंकार बिल्कुल पसंद नहीं है, प्रभु श्री राम अहंकार को नष्ट करते हैं, इसलिए आज भी जगत में पूजनीय है, उनके आदर्श हम सबके लिए अनुकरणीय है, संगीताचारी हरिदास एवं अमरनाथ रामायणी ने भी अपनी सुमधुर शैली से रामचरितमानस के माध्यम से समाज सुधार की बातों को प्रस्तुत किया,