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बुरहानपुर में राब्ता मदारिस इस्लामिया अरबिया मध्य प्रदेश का आम अधिवेशन संपन्न

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– 300 मदरसों के करीब 500 जिम्मेदारों ने की शिरकत, दीन की तालीम, मदरसों की पहचान और शैक्षणिक गुणवत्ता पर हुआ मंथन

– उलमा-ए-कराम ने मदरसों के मूल उद्देश्य की रक्षा, शिक्षकों के प्रशिक्षण, सामूहिक परीक्षाओं और मक्तबों को मजबूत बनाने पर दिया जोर

बुरहानपुर। मध्यप्रदेश के बुरहानपुर में 8 अक्टूबर राब्ता मदारिस इस्लामिया अरबिया मध्य प्रदेश का आम अधिवेशन गुरुवार को बुरहानपुर जिले के आदिलपुर स्थित दारुल उलूम शेख अली मुत्तकी में आयोजित किया गया। अधिवेशन की अध्यक्षता राब्ता मदारिस इस्लामिया अरबिया मध्य प्रदेश के सदर हजरत मौलाना मुफ्ती मोहम्मद अहमद खान साहब ने की, जबकि मुख्य अतिथि के रूप में राब्ता मदारिस इस्लामिया अरबिया, दारुल उलूम देवबंद के जनरल सेक्रेटरी एवं दारुल उलूम देवबंद में तफसीर, हदीस और अदब के उस्ताद हजरत मौलाना शौकत अली कासमी बस्तीवी शामिल हुए।

25 रबीउल आखिर 1448 हिजरी, गुरुवार 8 अक्टूबर 2026 को अस्र से ईशा तक दो सत्रों में आयोजित इस अधिवेशन में मध्य प्रदेश के लगभग 300 मदरसों के करीब 500 मोहतमिम, नाजिम, शिक्षक एवं अन्य जिम्मेदारों ने भाग लिया। मध्य प्रदेश के अलावा महाराष्ट्र के कई मदरसों तथा छत्तीसगढ़ के दो मदरसों के प्रतिनिधि भी अधिवेशन में शामिल हुए। कार्यक्रम में मदरसों की शैक्षणिक व्यवस्था, दीन की तालीम, छात्रों की तरबियत, शिक्षकों के प्रशिक्षण, सामूहिक परीक्षाओं और मदरसों के प्रशासनिक प्रबंधन सहित विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की गई।

मदरसों की दीन और शैक्षणिक पहचान कायम रखना जरूरी : मौलाना शौकत अली कासमी

मुख्य अतिथि हजरत मौलाना शौकत अली कासमी बस्तीवी ने अपने संबोधन में मदरसों की दीन एवं तालीम के क्षेत्र में अहम भूमिका पर प्रकाश डालते हुए कहा कि मदरसों के विशिष्ट धार्मिक स्वरूप और मूल उद्देश्य की रक्षा करना बेहद जरूरी है। उन्होंने मदरसों की शैक्षणिक गुणवत्ता बेहतर बनाने, शिक्षकों की क्षमता विकसित करने और विद्यार्थियों की शिक्षा एवं तरबियत पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता बताई।

उन्होंने मध्य प्रदेश में राब्ता मदारिस इस्लामिया अरबिया की गतिविधियों की सराहना करते हुए कहा कि प्रदेश में मदरसों के संगठनात्मक और शैक्षणिक कार्यों में पहले की तुलना में सुधार हुआ है। विशेष रूप से सामूहिक परीक्षाओं की व्यवस्था को सराहनीय बताते हुए इसे और अधिक प्रभावी बनाने पर जोर दिया।

मौलाना कासमी ने कहा कि लॉकडाउन के दौरान और उसके बाद अनेक मदरसों में स्कूल जैसी व्यवस्था का चलन बढ़ा है। ऐसे में इस बात का विशेष ध्यान रखा जाना चाहिए कि मदरसे अपनी मूल पहचान और उद्देश्य से दूर होकर केवल स्कूल बनकर न रह जाएं। उन्होंने कहा कि आवश्यकता के अनुसार आधुनिक शिक्षा हासिल करने में कोई हर्ज नहीं है, लेकिन इसके कारण दीन की तालीम, निर्धारित पाठ्यक्रम और मदरसों की मूल व्यवस्था प्रभावित नहीं होनी चाहिए।

उन्होंने शिक्षकों के प्रशिक्षण के लिए तदरीबुल मुअल्लिमीन कार्यक्रम आयोजित करने, अधिक से अधिक मदरसों को राब्ता मदारिस इस्लामिया अरबिया दारुल उलूम देवबंद से जोड़ने तथा पाठ्यक्रम में यथासंभव एकरूपता लाने की आवश्यकता पर बल दिया। साथ ही उन्होंने प्रदेश के अच्छे और व्यवस्थित मदरसों से भी संगठन से जुड़ने की अपील की।

मक्तबों की मजबूती और बच्चों की दीन की तालीम पर जोर

मौलाना शौकत अली कासमी ने मक्तबों की व्यवस्था को मजबूत बनाने पर विशेष जोर देते हुए सुझाव दिया कि मदरसों की आमदनी का 10 प्रतिशत हिस्सा मक्तबों की तालीम पर खर्च किया जाए, ताकि बच्चों को शुरुआती स्तर से ही बेहतर धार्मिक शिक्षा मिल सके।

उन्होंने विद्यार्थियों की शैक्षणिक क्षमता, नैतिक प्रशिक्षण और धार्मिक समझ विकसित करने के लिए प्रभावी कदम उठाने की बात कही। साथ ही शकीलियत, कादियानियत और अन्य धार्मिक एवं वैचारिक चुनौतियों से समुदाय को जागरूक करने में मदरसों के जिम्मेदारों की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया।

उन्होंने बच्चों और बच्चियों के धर्म परिवर्तन से जुड़ी चिंताओं का उल्लेख करते हुए नई पीढ़ी के लिए सही धार्मिक शिक्षा, नैतिक प्रशिक्षण और प्रभावी मार्गदर्शन की आवश्यकता पर जोर दिया, ताकि उनके धार्मिक विश्वास और आस्था की रक्षा की जा सके।

गौरतलब है कि मौलाना शौकत अली कासमी बस्तीवी की तबीयत नासाज होने के बावजूद वे मदरसों के प्रति अपनी गहरी प्रतिबद्धता और लगाव के चलते अधिवेशन में शामिल हुए। उन्होंने अपने संबोधन में महत्वपूर्ण सुझाव और मार्गदर्शन दिया। इस अवसर पर सदर-ए-इजलास मौलाना मुफ्ती मोहम्मद अहमद खान साहब ने उपस्थित लोगों से उनके शीघ्र स्वस्थ होने और पूर्ण स्वास्थ्य के लिए दुआ करने की अपील की।

मदरसों को अपनी मूल पहचान बनाए रखनी चाहिए : मुफ्ती मोहम्मद अहमद खान

अधिवेशन की अध्यक्षता कर रहे हजरत मौलाना मुफ्ती मोहम्मद अहमद खान साहब ने अपने संबोधन में कहा कि मदरसों का बुनियादी उद्देश्य कुरआन, हदीस और अन्य दीनी उलूम की शिक्षा देना है। इसलिए मदरसों को अपनी मूल पहचान और धार्मिक वातावरण को कायम रखना चाहिए।

उन्होंने कहा कि आधुनिक शिक्षा समय की आवश्यकता के अनुसार हासिल की जा सकती है, लेकिन इसके नाम पर मदरसों के मूल धार्मिक स्वरूप और विशिष्ट पहचान को समाप्त नहीं होने देना चाहिए। बेहतर व्यवस्था यह हो सकती है कि आधुनिक शिक्षा के लिए अलग स्कूल, कॉलेज और विश्वविद्यालय स्थापित किए जाएं तथा उन संस्थानों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों को मक्तबों से जोड़कर उनकी दीनी तालीम और तरबियत का भी इंतजाम किया जाए।

मौलाना मुफ्ती मोहम्मद अहमद खान साहब ने दारुल उलूम देवबंद और इस्लामी विद्वानों की शैक्षणिक एवं धार्मिक सेवाओं का उल्लेख करते हुए मदरसों के संरक्षण, विकास और सुधार के लिए सामूहिक प्रयास करने की अपील की। उन्होंने दीन और मिल्लत से जुड़े कार्यों में उलमा की रहनुमाई और नेतृत्व की अहमियत पर भी प्रकाश डाला।

पदाधिकारियों और सदस्यों ने रखे महत्वपूर्ण सुझाव

अधिवेशन में राब्ता मदारिस इस्लामिया अरबिया मध्य प्रदेश के नायब सदर हजरत मौलाना गाजी वली अहमद गाजी वली चिश्ती, नायब सदर हजरत मौलाना तसव्वुर हुसैन फलाही, खजांची हाफिज व कारी मोहम्मद तकी, कार्यकारिणी सदस्य हजरत मौलाना मुफ्ती अब्दुल हकीम सिंकां, हजरत मौलाना मुफ्ती शम्सुद्दीन सीहोर, हजरत मौलाना मुफ्ती जकाउल्लाह शिबली इंदौर, मोहिउद्दीन उर्फ बब्बू भाई देवास, हजरत मौलाना मुफ्ती सलामतुल्लाह खंडवा तथा हजरत मौलाना मुफ्ती मजहर (मुफ्ती मालवा) ने अपने विचार रखे।

इसके अलावा राब्ता मदारिस इस्लामिया अरबिया मध्य प्रदेश के सचिव हजरत मौलाना काजी अबू रैहान फारूकी के प्रतिनिधि, जमीयत उलमा खंडवा के सदर हजरत मौलाना मशहूद इकबाल, राब्ता मदारिस इस्लामिया ग्वालियर जोन के सदर हजरत मौलाना मोहम्मद इसहाक, विशेष आमंत्रित अतिथि प्रोफेसर हलीम, मौलाना आजाद नेशनल उर्दू यूनिवर्सिटी के रीजनल डायरेक्टर सआदत खान, हजरत मौलाना सलीम गनूरी तथा दारुल उलूम शेख अली मुत्तकी के मोहतमिम हाफिज मोहम्मद जुबैर मुत्तकी सहित अन्य जिम्मेदारों ने भी विभिन्न विषयों पर विचार व्यक्त किए।

वक्ताओं ने मदरसों में शिक्षा एवं प्रशिक्षण की गुणवत्ता सुधारने, शिक्षकों की जिम्मेदारियां सुनिश्चित करने, विद्यार्थियों के नैतिक विकास, पाठ्यक्रम में सुधार तथा अकाबिर के बताए रास्ते से जुड़े रहने की आवश्यकता पर जोर दिया। साथ ही दारुल उलूम देवबंद की रहनुमाई से लाभ उठाने और प्रदेश के मदरसों के बीच आपसी सहयोग बढ़ाने पर चर्चा की गई।

एनआईओएस, सामूहिक परीक्षाओं और प्रशासनिक व्यवस्था पर चर्चा

अधिवेशन में आधुनिक शिक्षा की आवश्यकता, दसवीं एवं बारहवीं कक्षा की पढ़ाई के लिए एनआईओएस (NIOS) की व्यवस्था, सामूहिक परीक्षाओं को बेहतर बनाने तथा शिक्षकों के प्रशिक्षण जैसे विषयों पर सुझाव प्रस्तुत किए गए।

मदरसों के आंतरिक एवं बाहरी प्रशासनिक मामलों पर भी चर्चा हुई। वक्ताओं ने मदरसों की जमीनों से संबंधित दस्तावेजों को व्यवस्थित रखने, आय-व्यय के लेखा-जोखा में पारदर्शिता बरतने तथा विद्यार्थियों के आवश्यक रिकॉर्ड सुरक्षित रखने की जरूरत बताई। उन्होंने कहा कि मजबूत प्रशासनिक व्यवस्था से मदरसों के संचालन में सुविधा होगी और भविष्य में आने वाली समस्याओं से बचने में मदद मिलेगी।

परीक्षा व्यवस्था और निरीक्षण फॉर्म की रिपोर्ट प्रस्तुत

हजरत मौलाना मुफ्ती मोहम्मद तबरेज खान साहब ने अधिवेशन में परीक्षा व्यवस्था, विभिन्न शैक्षणिक स्तरों की परीक्षाओं, पिछली परीक्षाओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को पुरस्कार देने तथा परीक्षा प्रणाली को और व्यवस्थित बनाने से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी प्रस्तुत की।

वहीं हजरत मौलाना मुफ्ती शकील अहमद वाजदी ने मदरसों को राब्ता मदारिस से जोड़ने की प्रक्रिया और संगठन की पूर्व गतिविधियों एवं उपलब्धियों की रिपोर्ट पेश की।

उन्होंने प्रदेश के मदरसों की शैक्षणिक और प्रशासनिक व्यवस्था का मूल्यांकन करने के लिए तैयार किए गए निरीक्षण फॉर्म की जानकारी भी दी। इस फॉर्म के माध्यम से मदरसों में पढ़ाई, विद्यार्थियों के रहने-खाने की व्यवस्था, आय-व्यय का हिसाब-किताब तथा अन्य आवश्यक सुविधाओं का जायजा लिया जा सकेगा। इसका उद्देश्य मदरसों की वास्तविक स्थिति का आकलन कर कमियों को दूर करना और आवश्यक सुविधाओं में सुधार के रास्ते तलाशना है।

मेजबानी और व्यवस्थाओं की हुई सराहना

अधिवेशन में शामिल सदर मौलाना मुफ्ती मोहम्मद अहमद खान साहब सहित अन्य अतिथियों ने मेजबान संस्था दारुल उलूम शेख अली मुत्तकी की ओर से किए गए इंतजामों की सराहना की।

दारुल उलूम शेख अली मुत्तकी के रुक्न-ए-आमिला एवं नाजिम हजरत मौलाना मुफ्ती रहमतुल्लाह साहब, मोहतमिम हाफिज मोहम्मद जुबैर मुत्तकी, संस्था के शिक्षकों, सदस्यों और विद्यार्थियों ने मेहमानों के स्वागत, नाश्ते, भोजन तथा ठहरने की व्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

मेहमानों ने कहा कि सभी व्यवस्थाएं अच्छे इंतजाम, सुविधा और शिष्टाचार के साथ की गईं। उन्होंने मेजबान संस्था के जिम्मेदारों के प्रेम, सहयोग और मेहमाननवाजी की सराहना करते हुए संतोष व्यक्त किया।

मौलाना मुफ्ती रहमतुल्लाह ने जताया आभार

कार्यक्रम के अंत में दारुल उलूम शेख अली मुत्तकी के नाजिम एवं राब्ता मदारिस इस्लामिया अरबिया मध्य प्रदेश की कार्यकारिणी के सदस्य हजरत मौलाना मुफ्ती रहमतुल्लाह साहब ने अधिवेशन में शामिल सभी उलमा, मेहमानों और प्रतिनिधियों का आभार व्यक्त किया।

उन्होंने दूर-दराज के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में पहुंचकर कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए सभी का धन्यवाद किया। साथ ही व्यवस्थाओं में किसी प्रकार की कमी रह जाने या किसी को असुविधा होने पर खेद व्यक्त करते हुए क्षमा भी मांगी।

अंत में मुख्य अतिथि हजरत मौलाना शौकत अली कासमी बस्तीवी की दुआ के साथ अधिवेशन संपन्न हुआ।

500 किलोमीटर तक मोटरसाइकिल से सफर कर पहुंचे मेहमान

अधिवेशन में दो मेहमानों की भागीदारी विशेष रूप से उल्लेखनीय रही। बताया गया कि इन दोनों मेहमानों ने आने-जाने में लगभग 500 किलोमीटर का सफर मोटरसाइकिल से तय किया और अधिवेशन में शामिल हुए।

मदरसों के कार्यों के प्रति उनका उत्साह, समर्पण और प्रतिबद्धता उपस्थित लोगों के बीच चर्चा का विषय रही। उनकी इस यात्रा को मदरसों के शैक्षणिक एवं धार्मिक कार्यों के प्रति गहरी दिलचस्पी और लगाव के रूप में देखा गया।

अधिवेशन में मदरसों की दीन की तालीम, शैक्षणिक गुणवत्ता, शिक्षकों के प्रशिक्षण, विद्यार्थियों की तरबियत, मक्तबों की मजबूती और प्रशासनिक सुधार जैसे विषय प्रमुखता से उभरे। वक्ताओं ने इन क्षेत्रों में आपसी सहयोग और सामूहिक प्रयासों के माध्यम से मदरसों की व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने का आह्वान किया।

न्यूज सोर्स – सैयद मसूद अली पटेल गैरतगंज रायसेन 

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