-आचार्यश्री विद्यासागरजी का सानिध्य पाकर स्वयं को धन्य मान रहे सर्वधर्म के लोग
सुरेन्द्र जैन रायपुर
छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के समीप स्थित धर्म नगरी तिल्दा नेवरा इन दिनों अहिंसामय नजर आ रही है शनिवार से यहां 7 दिवसीय पंचकल्याणक जिनबिंब प्रतिष्ठा महामहोत्सव का आगाज विशाल घटयात्रा के साथ हुआ परम पूज्य संत शिरोमणी अचार्यश्री 108 विद्यासागरजी महामुनिराज का सानिध्य पाकर धर्म नगरी के सर्वधर्म के लोग अपने आपको धन्य मान रहे हैं ।

शनिवार को परम पूज्य संत शिरोमणी आचार्यश्री 108 विद्यासागरजी महामुनिराज जी के ससंघ सानिध्य व प्रतिष्ठाचार्य वाणी भूषण बाल ब्रह्मचारी विनय भैया के प्रतिष्ठाचार्यत्व में 7 दिवसीय श्रीमज्जिनेन्द्र पंच कल्याणक जिन बिंब प्रतिष्ठा गजरथ महामहोत्सव का आगाज हुआ ।

प्रथम दिवस शनिवार को सर्व प्रथम नवीन मन्दिर जी में श्रीजी का पुजन अभिषेक आचार्यश्री की पुजन इसके पश्चात आचार्य संघ की आहार चर्या हुई आचार्यश्री को आहार दान का शौभाग्य भगवान के मातापिता बने सिंघईं अभिषेक जैन व श्रीमत्ति मोनिका जैन के परिवार को प्राप्त हुआ पूज्य आचार्यश्री ससंघ की आहारचर्या उपरांत नवीन मन्दिर जी से भव्य घटयात्रा शुरू हुई जिसमें महिलाएं मंगल कलश लिए गुलाबी व केशरिया परिधान में चल रही थी साथ ही कर्नाटक की विश्व

प्रसिद्ध झांझ मंडली घटयात्रा में भजनों के साथ नृत्य करते घटयात्रा की शोभा बढ़ा रही थी आचार्यश्री के ससंघ सानिध्य में नेवरा के मुख्य मार्गों से होते हुए घटयात्रा पंचकल्याणक महामहोत्सव स्थल पहुची जहां आचार्यश्री के मंगल प्रवचन हुए साथ ही महोत्सव स्थल की शुद्धि के साथ ध्वजारोहण करते हुए 7 दिवसीय महामहोत्सव का आगाज हुआ।

सर्वधर्म समभाव का प्रतीक बना महामहोत्सव
महान तपस्वी दिगंबर जैनाचार्य श्री विद्यासागरजी महामुनिराज के ससंघ सानिध्य में आयोजित 7 दिवसीय पंचकल्याणक जिनबिंब प्रतिष्ठा महामहोत्सव सर्वधर्म सँभाव का प्रतीक बन गया है जिस तिल्दा नेवरा में जैन समाज बहुत छोटी सी समाज के रूप में है उस तिल्दा नेवरा में ब्राह्मण समाज सिंघी समाज माहेश्वरी समाज अग्रवाल समाज आदि सभी समाजों के सामाजिक संगठन और समाज के लोग जिस तरह से समर्पित होकर महामहोत्सव को सफल बनाने में लगे हैं ओर महान तपस्वी आचार्यश्री विद्यासागर जी महामुनिराज जी का सानिध्य पाकर अपने आपको धन्य मान रहे हैं उसे देखकर ऐंसा लग रहा जैंसे धरती का स्वर्ग बर्तमान में तिल्दा नेवरा बन गया है अहिंसा जीवदया की धर्म ध्वजा लहरा रही है जैन हिन्दू एकता की अनूठी मिसाल भी एक सबक के रूप में देखने को मिल रही है।

महातपस्वी के पावन चरणों से धन्य हुआ तिल्दा नेवरा
जन जन के सन्त महातपस्वी आचार्यश्री 108 विद्यासागरजी महामुनिराज जी का तिल्दा नेवरा मंगल पदार्पण होने से हर वर्ग प्रसन्न है नवनिर्वाचित बलौदाबाजार विधायक टँकराम वर्मा नपाध्यक्ष लेमीक्षा गुरु जो आरंग विधायक खुशवंत सिंह की बहिन भी उन्होंने भी आचार्यश्री के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया सिंधी समाज अध्य्क्ष छम्मनदास हीरानन्द भोजवानी रजेश सैतपाल केशरवानी समाज के महेश केशरवानी विप्र समाज प्रमुख सत्यप्रकाश शर्मा दीपक शर्मा माहेश्वरी समाज डॉ भट्टड़ राजू बंटी अग्रवाल समाज प्रमुख ओम अग्रवाल अनिल अग्रवाल महेश अग्रवाल व स्थानीय पत्रकार ललित अग्रवाल समाज सेवी शिव अग्रवाल ,नरेंद्र शर्मा , कहते हैं महान तपस्वी आचार्यश्री के पावन चरण हमारे तिल्दा नेवरा में पड़ने से हम ओर हमारा यह क्षेत्र धन्य हो गया महामहोत्सव में हर वर्ग जिस तरह समर्पित होकर सहयोग कर रहा है उसे देखकर तिल्दा नेवरा के लोगो से प्रेरणा ली जा सकती है कि जब भी जैन व हिन्दुओ के कोई भी धार्मिक आयोजन हो या तपस्वियों का नगरागमन हो तो किस तरह हिलमिलकर काम करें।

आसान नहीं भगवान के माता पिता बनना
जैन धर्म मे पंचकल्याणक के माध्यम से भगवान के गर्भ जन्म तप ज्ञान और मोक्ष कल्याणक मनाए जाते हैं पांचों कल्याणक के लिए जैन समाज से पात्रों का चयन होता है भगवान के माता पिता कौन बनने वाले महाशौभाग्यशाली पुण्यशाली जीव होते हैं जिन्हें यह शौभग्य मिलता है लेकिन बनना यानी संसारी जीवन मे रहकर भी संसारी सुख सुविधाओं से दूर रहकर सात्विक जीवन जीना पड़ता है
अयोध्या के चौदहवें कुलकर राजा नाभिराय ओर महारानी मरुदेवी के घर आदि तीर्थंकर आदिनाथ भगवान का जन्म हुआ था जन्म के पहले महारानी को सोलह स्वप्न आये थे उन स्वप्नों के फल क्या हैं यह जानने से ही ज्ञात हुआ कि उनके गर्भ में होने वाले तीर्थंकर का जीव आ गया है
पंचकल्याणक में भगवान के मातापिता जो बनते हैं उन्हें जीवन पर्यंत ब्रह्मचर्य व्रत लेना पड़ता है साथ ही सूर्यास्त के 48 मिनिट पहले तक ही संध्या का भोजन पानी ले सकते हैं इसके बाद चारो प्रकार के आहार का त्याग जीवन पर्यंत को करना पड़ता है यानी रात्रि में भोजन तो दूर पानी तक नहीं पी सकते प्रतिदिन भगवान का अभिषेक पुजन घर मे कुंआ के शुद्ध जल से ही भोजन बनाकर लेना पड़ता है ऐंसे ही बहुत कठिन नियम संयम जीवन पर्यंत को जो लेते है त्याग करते हैं वही भगवान के मातापिता पिता बनने का शौभाग्य प्राप्त कर पाते हैं इसी तरह अन्य पात्रों के लिए भी जीवन पर्यंत कुछ नियम संयम रहते हैं ।
पंचकल्याणक में ये हैं पात्र
पंचकल्याणक पूजन के सौभाग्यशाली पात्र
माता-पिता-सिंघई श्री अभिषेक श्रीमती मोनिका जैन नेवरा निवासी.,सौधर्म इंद्र..सिंघई श्री मनोज श्रीमती ऋतु जैन ‘नेवरा निवासी.,कुबेर इंद्र सिघई मनीष श्रीमती वर्षा जैन नेवरा निवासी महायज्ञ नायक सिंघई श्री आकाश श्रीमती प्रिया जैन नेवर निवासीराजा श्रेयांश –श्री अमित श्रीमती राखी जैन नेवरा निवासी;भरत चक्रवर्ती श्री नितिन श्रीमती सपना जैन जबलपुर निवासी यज्ञ नायक –श्री रुपेश श्रीमती शालिनी जैन नेवरा निवासी बाहुबली –श्री प्रवीण श्रीमती सपना जैन नेवरानिवासी ईशान इंद्र-श्री अनिल श्रीमती नीलू जैन बिना निवासी
सनथ इंद्र-श्री संतोष जैन पाटन जबलपुर निवासी