हॉस्टल भवनों में जरूरी सुविधाओं का भी टोटा
अनुराग शर्मा सीहोर
आर्थिक रूप से विपन्न अनुसूचित जाति एवं जनजाति परिवारों के बच्चे भी उच्च पाकर अपने जीवन में कोई मुकाम हासिल कर सकें। इसके लिए यूं तो सरकार तमाम योजनाएं संचालित कर रही है। उनके लिए छात्रावास भी बने हुए हैं, लेकिन इन छात्रावासों के हालात ठीक नहीं हैं। जिला मुख्यालय पर ही इसकी बानगी देखने को मिलती है। रेल्वे क्रांसिग के पास स्िथत एसएसीएसटी बालक छात्रावास में सुविधाओं का टोटा तो है ही भवन भी जर्जर हो रहा है। जिसे मरम्मत की दरकार है।
उल्लेखनीय है कि जिला मुख्यालय पर रेल्वे क्रासिंग के पास स्थित छात्रावास बदहाली के दौर से गुजर रहा है। इसमें करीब 50 छात्र स्नातक और स्नातकोत्तर में पढ़ने वाले निवास रत हैं। अब इस छात्रावास की हालत पर गौर किया जाए तो कमरों में कई जगह से प्लास्टर उखड़ रहा है, दीवारों पर रंग रोगन नहीं है। भवन के आसपास गंदगी का अंबार लग रहा है। बिजली की वर्षों पुरानी लाईन है। जिसके चलते यहां आए दिन बिजली गुल हो जाती है। यहां पर रहने वाले छात्रों को काफी परेशानी होती है।
77 होस्टलों में 4 हजार विद्यार्थी
जिले में अनुसूचित जाति जनजाति छात्रावासों की बात की जाए तो 77 छात्रावास मौजूद हैं। जिनमें कक्षा 6 से लेकर स्नातकोत्तर तक के विद्यार्थी रह कर अध्ययन कर रहे हैं। इन छात्रावासों में करीब 4 हजार से अिधक विद्यार्थी रह रहे हैं । जिले में एससी बालक छात्रावास 25, एससी कन्या छात्रावास 23, एसटी बालक छात्रावास 20, और एसटी कन्या छात्रावास 9 हैं। इस प्रकार जिले में कुल 77 छात्रावास आदिम जाति कल्याण विभाग के द्वारा संचालित किये जा रहे हैं। वहीं इन छात्रावासों में एससी बालक 1250, एससी बालिका 1200, एसटी बालक 1090, एसटी बालिका 460 हैं।
कैसे निखरेंगी प्रतिभाएं
इस दौर में शिक्षा तेजी से आधुनिक हुई है। लेकिन जिले के कई छात्रावास पुराने ढर्रों पर ही संचालित हो रहे हैं। जहां खेल, मनोरंजन कक्ष, और जिम जैसी सुविधाएं नहीं है। अध्ययन के लिए पत्र पत्रिकाएं भी उपलब्ध नहीं हो पा रही हैं। विषम परिस्थितियों में विद्यार्थी यहां रहकर पढ़ाई कर रहे हैं। होस्टल में रहने वाले छात्र ने बताया कि कई बार इस समस्या को लेकर आदिमजाति कल्याण विभाग में बतला चुके हैं कोई सुनता ही नही।
इस सम्बंध में आदिमजाति कल्याण के जिला संयोजक हिरेन्द्र कुशवाह का कहना है कि पुराने भवनों को चिन्हित कर उनका इस्टीमेट तैयार किया जा गया है। बजट प्राप्त होने पर कार्य प्रारम्भ होगा।