इंदौर। भूमाफिया चंपू उर्फ रितेश अजमेरा के बेटे आर्जव अजमेरा पर 15 करोड़ रुपये के जमीन घोटाले में दर्ज एफआइआर को लेकर हाई कोर्ट में चल रही याचिका में कोर्ट ने सभी पक्षों को सुनने के बाद आदेश सुरक्षित रख लिया। आर्जव ने याचिका निरस्त करने की मांग करते हुए याचिका दायर की है।
सोमवार को सुनवाई के दौरान शासन की तरफ से कोर्ट को बताया गया कि मामले में जांच चल रही है। पीड़ित भी सामने आ रहे हैं। पुलक बिल्डकान के बैंक खाते में आरोपित आर्जव के पास हस्ताक्षर करने के अधिकार थे। इधर, आरोपितों के वकील ने कहा कि जान-बुझकर नया प्रकरण दर्ज किया गया है। यह सिर्फ दबाव बनाने का प्रयास है। जब कालिंदी गोल्ड मामले में हाई कोर्ट द्वारा गठित कमेटी सुनवाई कर रही है तो नया प्रकरण दर्ज करने की आवश्यकता ही नहीं थी। चंपू और आर्जव ने न जमीन खरीदी, न बेची।
इसी सर्वे का हिस्सा है
शासन के वकील ने तर्क रखा कि 2010 में नगर तथा ग्राम निवेश से नक्शा स्वीकृत कराते वक्त सर्वे नंबर 25/2 कालिंदी गोल्ड का ही हिस्सा था। बाद में इसे अलग कर दिया गया। कालिंदी के पीड़ितों से कहा जा रहा है कि जमीन नहीं है, जबकि इस जमीन पर 28 लोगों को प्लाट दिए जा सकते हैं। आर्जव ने अगर कंपनी से इस्तीफा दे दिया था तो उसके हस्ताक्षर अब तक अधिकृत कैसे हैं। आवासीय जमीन को खेती की जमीन बताकर स्टांप शुल्क में भी गड़बड़ी की गई है। कोर्ट ने तर्क सुनने के बाद आदेश सुरक्षित रख लिया।
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