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129 वाँ मृदंगाचार्य नाना साहेब पानसे स्मृति गुरूपूर्णिमा संगीत समारोह

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डाँ.अनिल जैन दमोह

एक छोटे से गाँव बकायन में सतत् 129 वर्ष से संपन्न हो रहे देष के सर्वाधिक प्राचीन संगीत केन्द्रित समारोह इस वर्ष 03 एवं 04 जुलाई 2023 को संपन्न होने जा रहा है. जिसमें 03 जुलाई को प्रातः सभा का शुभारंभ बकायन संगीत अखाड़े के युवा शिष्यवर्ग द्वारा पारंपरिक पुरातन शास्त्रीय बंदिषों यथा – ध्रुपद, तराना, ख्याल, ताल प्रबंध आदि की प्रस्तुति से होगा. रात्रिकालीन सभा रात्रि 8 बजे प्रारंभ होगी,जिसमें बकायन संगीत अखाड़े द्वारा ध्रुपद, बंदिष गायन होगा. इंदौर से पधारे ख्यात बांसुरी वादक सलिल दाते की प्रस्तुति होगी जिनकी तबला संगति सारंग लासूरकर करेंगे. अगले क्रम में पद्मश्री उल्लास कषालकर के सुयोग्य षिष्य निर्भय सक्सेना का गायन होगा. जो वर्तमान में इम्फाल (मणिपुर) में पदस्थ हैं तथा जिन्होंने अपने गुरू को भलीभांति आत्मसात किया है, इनके साथ तबले पर संगति बाल्यकाल से बकायन संगीत समारोह से जुड़े रामेन्द्र सिंह सोलंकी करेंगे. हारमोनियम पर संगति भोपाल के जितेन्द्र शर्मा करेंगे जो अनेक वर्षों से बकायन संगीत समारोह से जुड़े हुये हैं तथा सारंगी पर संगति उस्ताद फारूख लतीफ करेंगे. अगले क्रम में कत्थक नृत्य की बनारस परंपरा में पली-बढ़ी सुश्री आस्था गोडबोले-कार्लेकर अपने सहयोगी कलाकारों के साथ कत्थक नृत्य समूह प्रस्तुत करेंगी, जो पुणे से पधारी हैं. अंतिम प्रस्तुति ख्यात ध्रुपद गायक अभिजीत सुखदाणे की होगी. जो ग्वालियर तथा बेहट (तानसेन का जन्म स्थान) में संस्कृति विभाग द्वारा स्थापित ‘‘ध्रुपद केन्द्र’’ में गुरू के नाते कार्यरत हैं तथा आपके अनेक षिष्य भी आकाषवाणी के ग्रेड प्राप्त कलाकार हैं. 04 जुलाई 2023 को परंपरागत अपरान्ह मंदिर सभा सायं 5 से 7 बजे तक श्री इमला वाले हनुमान मंदिर में संपन्न होगी. जिसमें बकायन संगीत अखाड़ा के षिष्यगण द्वारा पुरातन बंदिष, गायन-वादन तथा आमंत्रित अतिथि कलाकारों की प्रस्तुति होगी. इसके पूर्व गंडाबंधन, प्रसाद वितरण तथा संगीत यात्रा उप्रस्थान होगा जो हनुमान मंदिर पहुंचकर संगीत सभा में परिवर्तित होगी. रात्रिकालीन सभा रात्रि 8 बजे से प्रारंभ होगी. जिसमें प्रथम संगीतमय रामायण गायन तथा बकायन संगीत अखाड़़ा के षिष्यगण द्वारा परंपरागत ध्रुपद, तराना, तिरवट गायन किया जायेगा. मृदंगाचार्य नाना साहेब पानसे के श्रेष्ठ षिष्य पं. सखाराम पंत आगले के उप्रपौत्र, विख्यात पखावज वादक एवं गुरू पं. संजय आगले द्वारा एकल पखावज वादन की प्रस्तुति होगी. इनके साथ सारंगी पर लहरा संगति उस्ताद फारूख लतीफ देंगे जो पिछले 15 वर्षों से सतत् बकायन संगीत समारोह में ‘हाजिरी’ देने पधार रहे हैं. अगले क्रम में इंदौर से पधारी पूर्वी निमगांवकर का गायन होगा. इनके साथ हारमोनियम पर संगति दिल्ली के पं. देवेन्द्र वर्मा तथा तबला पर संगति हरिसिंह गौर विष्वविद्यालय में प्रोफेसर डॉ. राहुल स्वर्णकार करेंगे. तत्पष्चात् इंदौर की आकृति जैन तथा साथियों द्वारा कथक समूह नृत्य की प्रस्तुति होगी. अंतिम प्रस्तुति मुंबई से पधारीं ख्यात गायिका सुश्री नीलिमा देहाडराय के गायन से होगी, इनके साथ तबला संगति करेंगे उनके जीवनसाथी तथा सुयोग्य तबला वादक पांडुरंग देहाडराय जो अभियांत्रिकी स्नातक तथा एयर इंडिया में अतिरिक्त महाप्रबंधक रहे हैं. उहारमोनियम पर संगति पं. देवेन्द्र वर्मा दिल्ली करेंगे.

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