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महाकाल महालोक में क्षतिग्रस्त सप्तऋषियों की मूर्तियों की गुणवत्ता जांच एंप्री में होगी

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भोपाल! उज्‍जैन में ज्योतिर्लिंग महाकाल मंदिर स्थित श्री महाकाल महालोक में आंधी में गिरकर खंडित हुईं सप्तऋषियों की मूर्तियों की गुणवत्ता जांच एडवांस मैटेरियल एवं प्रोसेस रिसर्च इंस्टीटयूट (एंप्री) भोपाल में कराने की तैयारी है। मामले की जांच कर रहे लोकायुक्त संगठन की तकनीकी टीम ने यहां से खंडित मूर्तियों के दो सैंपल लिए हैं। मूर्तियां फाइबर रीइंफोर्स प्लास्टिक (एफआरपी) से बनी हुई थीं। एंप्री में एफआरपी से बनी सामग्री जांचने की पूरी सुविधा है। स्मार्ट सिटी कंपनी उज्जैन से मूर्तियों के निर्माण संबंधी सभी दस्तावेज मिलने के बाद जांच के लिए सैंपल भेजे जाएंगे।

सैंपलों की जांच में यह पता चलेगा कि मूर्तियों का निर्माण निविदा की शर्तों और मापदंडों के अनुसार हुआ था या नहीं। सैंपलों की जांच के अलावा इस मामले में लोकायुक्त संगठन द्वारा एंप्री या मौलाना आजाद नेशनल इंस्टीट्यूट आफ टेक्नोलाजी (मैनिट) के विशेषज्ञों की राय लेने की भी तैयारी कर रहा है। इसमें यह पता चलेगा कि मूर्तियों का निर्माण एवं स्थापना निर्धारित मापदंडों के अनुसार हुई थी या नहीं। उनकी ऊंचाई और बेस (जहां स्थापित की गई थीं) मानकों के अनुरूप था या नहीं।

दस्तावेजों के लिए भेजना पड़ा रिमाइंडर

लोकायुक्त संगठन ने स्मार्ट सिटी कंपनी उज्जैन के कार्यपालक निदेशक को रिमाइंडर भेज कर श्री महाकाल महालोक के निर्माण से जुड़े दस्तावेज जल्द उपलब्ध कराने के लिए कहा है। दस्तावेज नहीं मिलने पर संगठन विशेष पुलिस स्थापना लोकायुक्त के माध्यम से इन्हें जब्त करने की कार्रवाई भी कर सकता है। बता दें कि मूर्तियां गिरने के पहले से ही महाकाल लोक के निर्माण में गड़बड़ी की दो शिकायतों की पहले से ही लोकायुक्त संगठन में जांच चल रही है। इन शिकायतों की जांच के लिए भी अभी तक सभी दस्तावेज स्मार्ट सिटी कंपनी ने संगठन को नहीं दिए हैं।

40 किलोमीटर प्रतिघंटे की गति से चली आंधी में गिर गई थीं छह मूर्तियां

28 मई को लगभग 40 किलोमीटर प्रतिघंटे की गति से चली आंधी में सप्तऋषियों की सात में से छह मूर्तियां गिर कर खंडित हो गई थीं। इस मामले में लोकायुक्त संगठन से स्वत: संज्ञान लेकर शिकायत दर्ज की थी। उधर, कांग्रेस ने भी निर्माण में गड़बड़ी को लेकर सरकार को घेरा था। बता दें कि महाकाल लोक निर्माण की परियोजना 856 करोड़ की है। इसमें पहले चरण में 351 करोड़ रुपये से निर्माण कराया गया है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पिछले वर्ष 11 अक्टूबर को उज्जैन आकर इसका लोकार्पण किया था।

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