नर्मदापुरम। अंचल में पड़ रही गर्मी ने आम लोगों को ही नहीं, बल्कि वन्यप्राणियों को भी बेहाल कर दिया है। भीषण गर्मी से परेशान वन्यप्राणी भी ठंडे स्थान के लिए जहां तहां घूमते नजर आ रहे हैं। सतपुड़ा टाइगर रिजर्व का राजा माने जाने वाले बाघ को भी अपना ठिकाना बदलकर ठंडी जगह पर आना पड़ रहा है। सतपुड़ा टाइगर रिजर्व के गश्ती दल को सरोवर के पास दो बाघ का मूवमेंट नजर आया है। बाघ सरोवर के किनारे कभी पानी से प्यास बुझाता तो कभी छांव में लेटता हुआ दिखा। बाघ के इस मूवमेंट को गश्ती दल ने अपने कैमरे में रिकार्ड किया है। विभाग की ओर से इसे प्रसारित भी किया गया है। अधिकारियों की मानें तो बाघ विचरण करते हुए सरोवर के पास जाता है, लेकिन पिछले कुछ दिनों से पड़ रही गर्मी से बाघ का मूवमेंट लगातर एक ही जगह पर बना हुआ है। पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र सतपुड़ा टाइगर रिजर्व पर्यटकों के लिए पसंदीदा जगह बना हुआ है। दूरदराज से पर्यटक यहां पर बाघ देखने के लिए पहुंच रहे हैं।
बाघों की संख्या में भी इजाफा हुआ है
वर्ष 2018 की गणना के मुताबिक 45 बाघ थे, जबकि वर्तमान में बाघों का कुनबा 52 पर पहुंच गया है। विभाग द्वारा बाघों के संरक्षण के लिए बेहतर प्रयास किए जा रहे हैं। यहीं कारण है कि बाघों को भोजन पानी की सुविधा मिल पा रही है। चीतलों का किया गया विस्थापन बाघों को उनके रहवास के लिए उचित प्रबंधन किया गया है। पेंच राष्ट्रीय उद्यान से चीतल भी लाए जा रहे हैं। अब तक पेंच से 1100 चीतल छोडे जा चुके हैं, अन्य चीतल भी लाए जा रहे हैं। इसके साथ ही बारहसिंगा का भी विस्थापन किया जा रहा है। सतपुड़ा टाइगर रिजर्व को वन्यप्राणियों के लिहाज से अनुकूल माना जाता है। चीतल छोड़े जाने का फायदा यह हो रहा है कि बाघ को आसानी से भोजन उपलब्ध हो रहा है।
रखी जा रही नजर
सतपुड़ा टाइगर रिजर्व में वन्यप्राणियों की बढ़ती संख्या को देखते हुए विशेषज्ञ भी लगातार नजर बनाए हुए हैं। लगातार वन्यप्राणी विशेषज्ञों की टीम दौरा कर रही है। विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार विशेषज्ञों की टीम वन्यप्राणियों के रहवास स्थान की भी जानकारी जुटाते हैं। किसी तरह के संक्रमण का खतरा ना हो, इसका भी विशेष ध्यान रखा जा रहा है। छांव वाला स्थान तलाश रहे बाघ गर्मी से बेहाल बाघ ने सरोवर के किनारे अपना इलाका बना लिया है। बाघ के खौफ के कारण अन्य वन्यप्राणी रुख नहीं कर रहे हैं। गर्मी को मात देने के लिए बाघ छांव की जगह भी तलाश करता है। इसके साथ ही ठंडे स्थान पर भी आराम कर रहा है। दोपहर के समय सरोवर के किनारे बाघ को आराम करते हुए का नजारा सामने आया है। रिजर्व क्षेत्र में बाघों में इलाके को लेकर कई बार संघर्ष हो चुका है माना जा रहा है कि अन्य बाघ की भी मौजूदगी यहां पर हो सकती है। वर्जनगर्मी से निजात पाने के लिए बाघ सरोवर के किनारे अपना इलाका बना लेते हैं।
इनका कहना है
बाघ का मूवमेंट होने पर अन्य वन्यप्राणी उस ओर रुख कम ही करते हैं। विभाग की टीम लगातार नजर बनाए हुए है।
– संदीप फैलोज, उप संचालक, सतपुड़ा टाइगर रिजर्व नर्मदापुरम
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