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चंबल ताप्ती बेतवा केन सहित 15 नदियों का संरक्षण प्लान तैयार कर रही मध्य प्रदेश सरकार

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भोपाल। चंबल, ताप्ती, बेतवा सहित मध्य प्रदेश की 15 नदियों के संरक्षण पर सरकार का फोकस है। इन्हें पुनर्जीवित और संरक्षित करने के लिए सरकार थ्री डी कार्ययोजना (मास्टर प्लान) तैयार करवा रही है।

पहले चरण में नदी से संबंधित समस्त जानकारी (शुद्धता का स्तर, लंबाई, प्रमुख घाट, इनके आसपास आबादी, जलस्तर और जिलों से जुड़ा डाटा) एकत्र की जा रही है। यह भी देखा जाएगा कि नदियां कहां प्रदूषित हो रही हैं और कहां उनकी धारा टूट रही है। कार्ययोजना तैयार होने के बाद प्राथमिकता के आधार पर उनके संरक्षण के उपाय किए जाएंगे।

मध्य प्रदेश में लगभग 207 छोटी-बड़ी नदियां बहती हैं। एक दर्जन से अधिक नदियां पड़ोसी राज्यों की आबादी और खेतों की प्यास बुझाती हैं। इनमें से ज्यादातर नदियों की स्थिति खराब है। कुछ की धारा अपने उत्पत्ति स्थल के करीब ही टूटने लगी है, तो कुछ उत्पत्ति स्थल के करीब से ही प्रदूषित हो गई हैं।

इनमें सैकड़ों गंदे नाले मिल रहे हैं। इससे इन नदियों का पानी पीने व नहाने योग्य भी नहीं बचा है। इसका डाटा एकत्रित किया जा रहा है। उल्लेखनीय है कि ताप्ती नदी बैतूल से निकलकर महाराष्ट्र और गुजरात में भी बहती है। सोन नदी मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और बिहार राज्य में बहती है।

चंबल नदी मध्य प्रदेश से निकलकर उत्तर प्रदेश और राजस्थान में बहती है। बेतवा नदी रायसेन जिले से निकलकर उत्तर प्रदेश में हमीरपुर के पहले यमुना नदी में मिलती है। केन नदी मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश से होकर बहती है।

संरक्षण कार्ययोजना में नदियों के उद्गम स्थल से आखिरी छोर तक का सर्वे होगा।

इसमें नदी की श्रेणी (रेतीली, चट्टानी, मैदानी, दलदली) देखी जाएगी। यह भी देखेंगे कि नदी में किस-किस प्रजाति के जलीय जीव, वनस्पति है। सहायक या उप नदियों का खाका भी तैयार होगा। कार्ययोजना में नदियों के प्रदूषण स्तर की अध्ययन रिपोर्ट होगी। हर महीने प्रदूषण के स्तर की जांच होगी।

शहरों के मास्टर प्लान की तरह नदियों की कार्ययोजना भी सैटेलाइट इमेज से तैयार होगी। इससे शोध आसान होगा। इसमें नदी पर बने बांध, उसके निर्माण, अधिकतम जलभराव, उससे पानी के उपयोग का बिंदु भी शामिल होगा।

घर बैठे मिलेगी नदी की जानकारी

नदी के उच्चतम बाढ़ स्तर से थ्री डी नक्शे को बनाने की प्लानिंग है। इससे नदी की वास्तविक स्थिति की जानकारी घर बैठे मिल सकेगी। नदियों का संयुक्त नक्शा भी बनेगा।

विभाग खंगाल रहा नदियों से जुड़े आदेश

पर्यावरण विभाग ने अब तक निकाले गए नदियों से जुड़े आदेश, प्रविधान और नदियों के संबंध में केंद्र के नियमों का अध्ययन प्रारंभ कर दिया है। प्रारंभिक खाका तैयार होने के बाद इससे जुड़े अन्य विभागों के अफसरों के साथ मंथन किया जाएगा। इसके बाद तय होगा कि कहां क्या काम किया जाना है।

पहले चरण में 15 नदियों की योजना

पहले चरण में चंबल, ताप्ती, बेतवा, केन, तवा, सोन, क्षिप्रा, सिंध, वेनगंगा, शक्कर, कालीसिंध, वर्धा, कुंवारी, पार्वती, गार आदि नदियों की कार्ययोजना तैयार की जाएगी।

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