राजधानी दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने केंद्रीय राज्य मंत्री एल. मुरुगन के आवास पर तमिल नववर्ष समारोह में भाग लिया। इस दौरान पुडुचेरी की उपराज्यपाल और तेलंगाना की राज्यपाल तमिलसाई सुंदरराजन भी मौजूद रहीं। इस मौके पर उपस्थित जन समुदाय को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि तमिल दुनिया की सबसे पुरानी भाषा है। इस पर हर भारतीय को गर्व है। तमिल साहित्य का भी व्यापक रूप से सम्मान किया जाता है। आजादी के आंदोलन में भी तमिल लोगों का योगदान बहुत ही महत्वपूर्ण रहा है। आजादी के बाद देश के नवनिर्माण में भी तमिलनाडु के लोगों की प्रतिभा ने देश को नई ऊंचाई दी है।
#WATCH | “India is the mother of democracy. There are several historical references. Of them, one of the most significant references is on Tamil Nadu where a place called Uthiramerur is very special. Several things on India’s democratic values are written on an 1100-1200 years… pic.twitter.com/R8LtAlPbfI
— ANI (@ANI) April 13, 2023
तमिलों का योगदान
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि कानून और शिक्षा के क्षेत्र में तमिल लोगों का योगदान अतुलनीय है। भारत दुनिया का सबसे प्राचीन लोकतंत्र है। तमिल संस्कृति में ऐसा बहुत कुछ है जिसने एक राष्ट्र के रूप में भारत को गढ़ा है, आकार दिया है। उन्होंने सभी का आभार जताते हुए कहा कि ये आप सब का प्यार है कि आज आपके बीच मुझे तमिल पुत्तांडु को मनाने का मौका मिल रहा है। पुत्तांडु प्राचीनता में नवीनता का पर्व है। इतनी प्राचीन तमिल संस्कृति और हर साल पुत्तांडु से नई ऊर्जा लेकर आगे बढ़ते रहने की यह परंपरा अद्भुत है।
लोगों का जताया आभार
पीएम मोदी ने कहा कि जब मैं गुजरात में था और विधायक था तो वहां बहुत बड़ी संख्या में तमिल मूल के लोग रहते थे। वे मेरे मतदाता थे और मुझे एमएलए और मुख्यमंत्री बनाते थे। उनके साथ बिताए हुए पल मुझे हमेशा याद रहते हैं। यह मेरा सौभाग्य है कि जितना प्यार मैंने तमिलनाडु को किया है, तमिल लोगों ने हमेशा उसे और ज्यादा करके मुझे वापस लौटाया है।
कब मनाते हैं तमिल नववर्ष?
हिंदू धर्म में जैसे चैत्र माह से शुक्लपक्ष की प्रतिपदा तिथि को जैसे नव वर्ष की शुरुआत होती है, वैसे ही तमिल नव वर्ष की शुरुआत को पुथांडु या पुत्तांडु कहा जाता है। इस वर्ष यह तिथि 14 अप्रैल 2023 को है। इस त्योहार को पुत्ताण्डु संक्रांति के नाम से भी जाता है। तमिल लोगों के लिए यह त्योहार बहुत महत्वपूर्ण और शुभ माना जाता है। मान्यता है कि इस विशेष दिन से भगवान ब्रह्मदेव ने सृष्टि निर्माण शुरू किया था साथ ही भगवान इंद्र स्वयं धरती पर लोगों के कल्याण के लिए उतरे थे। माना जाता है कि इस दिन पूजा करने से व्यक्ति को शुभ फल प्राप्त होते हैं साथ ही पूरा वर्ष अच्छा बीतता है।
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