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माधव नेशनल पार्क में टाइगर पर भारी पड़ी बलारपुर माता के भक्तों की आस्था

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– नेशनल पार्क के अंदर आने वाले बलारपुर माता मेले में जुटी भारी भीड़

– कुछ दिन पहले ही इस नेशनल पार्क में छोड़े गए हैं तीन टाइगर लेकिन माता भक्तों को इनका कोई भय नहीं

रंजीत गुप्ता शिवपुरी

शिवपुरी जिले के माधव नेशनल पार्क के अंदर आने वाले प्रसिद्ध बलारपुर माता मंदिर में इस समय भक्तों की भारी भीड़ चैत्र नवरात्रा में देखने को मिल रही है। माता भक्तों की यह भीड़ यहां नेशनल पार्क के टाइगरों पर भारी पड़ रही है। कारण यह है कि माधव नेशनल पार्क में कुछ दिनों पहले ही तीन टाइगर लाए गए हैं और इन टाइगरों को बलारपुर के जंगल के पास ही छोड़ा गया है। लेकिन इस प्राचीन मंदिर से जुड़ी स्थानीय लोगों की आस्था इन टाइगर पर भारी पड़ रही है। दो दिन से इस मंदिर के आसपास भक्तों की भारी भीड़ है, क्योंकि यहां चैत नवरात्र में सप्तमी के दिन मेला लगता है। यहां पर यह माता मेला 100 सालों से लगता हुआ आ रहा है।

माता भक्तों को टाइगर का कोई भय नहीं –

माधव नेशनल पार्क में स्थित बलारपुर के जंगल में एक ओर जहां तीन टाइगर घूम रहे हैं, वहीं बलारी माता के मंदिर पर दर्शन करने के लिए भक्तों का तांता लगा हुआ है। इस मंदिर से जुड़े भक्तों की आस्था टाइगरों के भय पर भारी पड़ रही है। दर्शन करने जा रहे भक्तों का कहना है कि हम तो माता के दर्शन करने जा रहे हैं और वही हमारी रक्षा करेगी।

दो दिन से मंदिर पर भारी भीड़-

बलारी माता के मंदिर पर पिछले 2 दिन से यहां पर भीड़ देखी जा रही है। चैत्र नवरात्र की सप्तमी यानी कि मंगलवार को यहां पर मेला और विराट स्वरूप में दिखाई देगा। बलारी माता पर आयोजित मेले के पहले दिन कोई भक्त पैदल तो कोई पेंढ भरकर मन्नत मांगने माता के दरबार में पहुंचा। पहले इस माता मेले को लेकर संशय बना हुआ था कि यहां पर हर साल लगने वाला बलारपुर मेला आयोजित होगा कि नहीं लेकिन कुछ शर्तों के साथ जिला प्रशासन और वन विभाग ने यहां मिला लगाने की अनुमति दे दी।

माता मेले में आने वाली भीड़ को देखते हुए वन विभाग और पुलिस तैनात-

तीन दिवसीय मेले में आने वाले हजारों श्रद्धालुओं को देखते हुए माधव नेशनल पार्क प्रबंधन व पुलिस भी जंगल में जगह-जगह तैनात है। माधव नेशनल पार्क के अंदर माँ बलारी का मंदिर होने की वजह से उसे बलारपुर का नाम दिया गया। बियावान जंगल में यह मंदिर जिस जगह पर है, वहां टाइगर के लिए मुफीद जंगल माना गया है। यही वजह है कि बाहर से लाए गए टाइगरों को रखने के लिए जो बाड़े बनाए गए, उनके लिए भी बलारपुर का जंगल ही चुना गया। बलारपुर मंदिर पर मेला भरने को लेकर असमंजस बना हुआ था। चूंकि नवरात्र में बलारपुर का मेला बरसों से न केवल भरता रहा है, बल्कि लोगों की आस्था भी बलारी माता में है। इसी के चलते पार्क प्रबंधन ने भी प्रशासन व पुलिस के सहयोग से कुछ पाबंदियों के बीच मेला लगाए जाने पर सहमति जता दी थी। मेले का प्रभारी तहसीलदार शिवपुरी नरेशचंद्र गुप्ता को बनाया है।

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