सागर। दिगंबर जैन परंपरा के अनुसार इस वर्ष दीपावली का महापर्व 9 नवंबर को श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जाएगा। जैन दर्शन के अनुसार दीपावली का संबंध केवल तिथि या अमावस्या के संयोग से नहीं, बल्कि वर्तमान शासन नायक 24 वें तीर्थंकर भगवान महावीर स्वामी के मोक्ष कल्याणक और गौतम गणधर के केवलज्ञान से जुड़ा हुआ है। 9 नवंबर को प्रातःकाल जैन मंदिरों में भगवान महावीर स्वामी का निर्वाण लाडू चढ़ाया जाएगा।
मुकेश जैन ढाना ने बताया कि भाग्योदय तीर्थ में लाडू बनाओ-सजाओ प्रतियोगिता का आयोजन भी किया गया है। इसमें प्रतिभागी 5 किलो से अधिक वजन के लाडू बनाकर तैयार करेंगे। सर्वश्रेष्ठ पांच लाडू बनाने वाले प्रतिभागियों को चातुर्मास कमेटी द्वारा पुरस्कृत किया जाएगा, जबकि अन्य सभी प्रतिभागियों को सांत्वना पुरस्कार दिए जाएंगे।निर्वाण लाडू चढ़ाने के बाद घरों, दुकानों एवं प्रतिष्ठानों में दीपावली पूजन के लिए मुहूर्त रहेगा।
दीपावली के दिन सभी जैन मुनियों के वर्षायोग (चातुर्मास) का निष्ठापन भी होगा। गुरु पूर्णिमा पर चातुर्मास कलश स्थापना के साथ मुनिराजों का वर्षायोग प्रारंभ होता है और दीपावली के दिन सभी मुनिराज उपवास रखकर चातुर्मास का निष्ठापन करते हैं।
दीपावली के बाद सभी मुनि संघों एवं आर्यिका संघों के पिच्छिका परिवर्तन समारोह आयोजित होंगे। इसके पश्चात मुनि संघों का एक स्थान से दूसरे स्थान पर विहार प्रारंभ हो जाएगा।
सागर में 29 नवंबर को 25 एकड़ स्थित विद्योदय जैन तीर्थ क्षेत्र में, भाग्योदय तीर्थ के सामने, समवशरण विधान के बीच पिच्छिका परिवर्तन समारोह आयोजित किया जाएगा।