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बालमपुर घाटी में फिर हादसा: गेहूं से भरा ट्रक 10 फीट गहरी खाई में पलटा, चालक घायल

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घाटी चढ़ते समय अचानक बंद हुआ ट्रक, पीछे रिवर्स होकर खाई में गिरा; आए दिन हो रहे हादसों के बावजूद सुरक्षा इंतजाम नाकाफी

 मुकेश साहू दीवानगंज रायसेन

भोपाल-विदिशा स्टेट हाईवे-18 पर स्थित बालमपुर घाटी एक बार फिर बड़े सड़क हादसे का गवाह बनी। मंगलवार-बुधवार की दरमियानी रात करीब 12 बजे गंजबासौदा से गेहूं भरकर इंदौर जा रहा ट्रक घाटी चढ़ते समय अचानक बंद हो गया। इसके बाद ट्रक पीछे की ओर रिवर्स होते हुए करीब 10 फीट गहरी खाई में जाकर पलट गया। हादसे में ट्रक चालक को मामूली चोटें आईं, जबकि ट्रक में भरी गेहूं की बोरियां खाई में बिखर गईं। गनीमत रही कि चालक ट्रक के नीचे नहीं दबा, अन्यथा बड़ा हादसा हो सकता था।

प्राप्त जानकारी के अनुसार ट्रक क्रमांक एमपी 09 एचएच 0572 गंजबासौदा से गेहूं की बोरियां भरकर इंदौर में माल खाली करने जा रहा था। जैसे ही ट्रक बालमपुर घाटी की चढ़ाई पर पहुंचा, अचानक उसकी सभी लाइटें बंद हो गईं और ट्रक का इंजन भी बंद हो गया। चालक ने ब्रेक लगाने का प्रयास किया, लेकिन ट्रक पीछे की ओर खिसकता चला गया और सड़क किनारे करीब 10 फीट गहरी खाई में पलट गया। हादसे के बाद गेहूं की बोरियां खाई में दूर-दूर तक बिखर गईं। वह तो गनीमत रही कि पीछे कोई दूसरा वाहन नहीं चल रहा था नहीं तो बड़ी दुर्घटना घटित हो सकती थी।

ट्रक चालक सागरीय निवासी चिराला ने बताया कि वह ट्रक लेकर घाटी चढ़ रहा था, तभी अचानक ट्रक की सभी लाइटें और इंजन बंद हो गए। ब्रेक लगाने के बावजूद ट्रक पीछे की ओर जाने लगा और देखते ही देखते खाई में पलट गया। गनीमत रही कि वह ट्रक के नीचे नहीं दबा, जिससे उसकी जान बच गई।

एक घाटी, जहां आए दिन पलट रहे भारी वाहन

भोपाल-विदिशा हाईवे-18 पर बालमपुर घाटी दुर्घटनाओं के लिहाज से बेहद खतरनाक साबित हो रही है। घाटी की एक तरफ करीब 10 फीट तो दूसरी तरफ लगभग 50 फीट गहरी खाई है। यहां चढ़ाई और ढलान के साथ एक अंधा मोड़ भी है। सड़क के दोनों ओर लगे घने पेड़ों के कारण वाहन चालकों को मोड़ पर सामने से आने वाले वाहन दिखाई नहीं देते। ऐसे में भारी वाहन चढ़ाई नहीं चढ़ पाने या अनियंत्रित होने पर पीछे की ओर खिसककर खाई में गिर जाते हैं।

कुछ ही दिनों में कई ट्रक खाई में समाए

बालमपुर घाटी पर हादसों का सिलसिला लगातार जारी है। कुछ दिन पहले चावल से भरा ट्रक खाई में पलट गया था। इसके तीन दिन बाद ही गेहूं से भरा एक अन्य ट्रक भी दुर्घटनाग्रस्त हो गया। वहीं, कुछ समय पहले एक ट्राला घाटी से उतरते समय टायर फटने के कारण गहरी खाई में जा गिरा था। हादसे में ट्राले के पहिए निकलकर खाई में जा गिरे थे। इन दुर्घटनाओं के कारण घाटी पर कई बार लंबा जाम भी लग चुका है। ट्राला हादसे के बाद करीब दो घंटे तक यातायात प्रभावित रहा था।

छह महीने भी नहीं टिक पाई रेलिंग, सुरक्षा इंतजाम फिर सवालों में

घाटी पर दुर्घटनाओं को रोकने के लिए एमपीआरडीसी द्वारा पहले लोहे की रेलिंग लगवाई गई थी, लेकिन भारी वाहनों के हादसों के चलते रेलिंग टूटकर क्षतिग्रस्त हो गई। इसके बाद खाई की तरफ सीमेंट की बोरियां रखकर अस्थायी सुरक्षा इंतजाम किए गए, लेकिन गर्मी और बारिश के कारण बोरियां भी खराब हो गईं। बाद में विभाग ने दोनों तरफ लोहे की रेलिंग लगवाई, लेकिन यह रेलिंग भी जगह-जगह अलग-अलग टुकड़ों में लगी हुई है। ऐसे में भारी वाहन अनियंत्रित होने पर उन्हें रोकने के लिए पर्याप्त सुरक्षा इंतजाम नजर नहीं आते।

कई दर्जन ट्रक हो चुके हैं हादसों का शिकार

बालमपुर घाटी पर अब तक कई दर्जन ट्रक दुर्घटनाओं का शिकार हो चुके हैं। इसके बावजूद घाटी के अंधे मोड़ को सुरक्षित बनाने, सड़क किनारे मजबूत क्रैश बैरियर लगाने और भारी वाहनों की आवाजाही को सुरक्षित करने के लिए स्थायी इंतजाम नहीं हो पाए हैं। लगातार हो रहे हादसों से वाहन चालकों में डर बना हुआ है। स्थानीय लोगों की मांग है कि एमपीआरडीसी घाटी का तकनीकी निरीक्षण कराकर मजबूत रेलिंग, चेतावनी संकेतक, रिफ्लेक्टर और पर्याप्त सुरक्षा इंतजाम करे, ताकि आए दिन होने वाले हादसों पर रोक लग सके। भोपाल विदिशा हाईवे 18 पर एक सप्ताह में यह छठवीं दुर्घटना घटित हुई है। जिसमें तीन लोगों की मौत हो गई तो चार घायल हुए हैं। भानपुर से लेकर सलामतपुर तक 40 किलोमीटर मार्ग में 18 महीनो में 40 से अधिक लोगों की मौत हुई तो 200 से अधिक घायल हुए हैं।

इनका कहना हे

बालमपुर घाटी पर रोजाना तीन से चार ट्रक चढ़ते समय बीच घाटी पर रुक जाते हैं या फिर चढ़ नहीं पाते हैं जिस कारण हमेशा जाम की स्थिति बनी रहती है। विभाग को घाटी की ऊंचाई कम करना चाहिए।

संतोष सिसोदिया स्थानीय निवासी बालमपुर घाटी 

कई बार बालमपुर घाटी पर रात के समय हादसे होते हैं अभी तक कई हादसे हो चुके हैं कई बार तो हम लोगों ने घायलों को ट्रक से बाहर निकालकर अस्पताल पहुंचाया है। एक जेसीबी हमेशा यहां पर खड़ी रहती है ताकि ट्रक को घाटी के ऊपर पहुंचा जा सके।

विनोद सिसोदिया स्थानीय निवासी बालमपुर घाटी

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