बाड़ी के आदिवासी सेवा संघ में 5.5 लाख का ‘वर्दी कांड’! 25 साल से कुर्सी पर जमे कोषाध्यक्ष पर संस्था को दीमक की तरह चाटने का आरोप
विनोद कुमार साहू बाड़ी रायसेन
बारना नदी किनारे गोंड राजा के ऐतिहासिक किले में 1954 से संचालित आदिवासी सेवा संघ में अब पावन उद्देश्य के नाम पर भ्रष्टाचार का बड़ा खेल सामने आया है। आश्रम के आदिवासी बच्चों की गणवेश के नाम पर निकले 5 लाख 50 हजार रुपये के मामले ने पूरी प्रबंध कार्यकारिणी को कठघरे में खड़ा कर दिया है।
सचिव का सीधा हमला – 25 साल से संस्था को खोखला कर रहे हैं कोषाध्यक्ष
संस्था के हाईकोर्ट के आदेश से SDM और अपर कलेक्टर द्वारा कराए गए चुनाव में बहुमत से जीते हुए निर्वाचित सचिव प्रदीप चीचाम ने कोषाध्यक्ष जतन सिंह उईके पर सीधा हमला बोला है।
प्रदीप चीचाम का आरोप है – 25 वर्षों से किसी न किसी पद पर रहने वाले कोषाध्यक्ष जतन सिंह उईके बच्चों की संस्था को अंदर ही अंदर दीमक की तरह खोखला कर रहे हैं।
सचिव के अनुसार सत्र 2025-26 में छात्र-छात्राओं की गणवेश के लिए 5,50,000 रुपये की राशि बैंक से निकाली गई थी। यह चेक उन्होंने खुद से नहीं, बल्कि अध्यक्ष विजय सिंह बरकरे के कहने पर और कोषाध्यक्ष जतन सिंह उईके के माध्यम से भोपाल की शुभजीत यूनिफॉर्म कंपनी / अभिजीत मेहता के खाते में दिया था। पैसा चला गया, लेकिन एक साल बाद भी वर्दी बच्चों तक नहीं पहुंची।
सचिव ने आरोप लगाया कि जतन सिंह उईके हमेशा दबाव बनाते थे – “तुम्हें किसी भी समय पद से हटा सकता हूं, जैसा कहता हूं वैसा करता जा।” विरोध करने पर उन्हें पद से हटाने का नोटिस दे दिया गया।

कार्यकारी सचिव राजीव गौर की नियुक्ति पर भी अवैधानिकता का बड़ा सवाल
इस पूरे कांड में सबसे बड़ा कानूनी पेंच कार्यकारी सचिव की नियुक्ति है। सचिव के अनुसार अध्यक्ष ने पत्र क्र. 51 दिनांक 28/09/26 से राजीव गौर को अस्थायी सचिव नियुक्त कर दिया।
सवाल यह है कि जब तक महासभा समिति की विधिवत बैठक बुलाकर इस बर्खास्तगी और नई नियुक्ति का अनुमोदन नहीं होता, तब तक राजीव गौर को संस्था के बजट, सरकारी कागजों और अनुदान प्रस्तावों पर हस्ताक्षर करने की अनुमति किस नियम के तहत दी गई? बिना महासमिति के निर्णय के यह प्रक्रिया पूरी तरह अवैधानिक है।
क्या कहते हे जिम्मेदार
– इस पूरे मामले में अध्यक्ष और सचिव के ही हस्ताक्षर होते हैं, उनके द्वारा ही राशि निकाली गई है, इसमें मेरा कोई लेना-देना नहीं है।
जतन सिंह उईके, कोषाध्यक्ष
– “मैं अभी गांव में हूं, मुझे जानकारी नहीं है, मैं आकर आपसे मिलता हूं।
विजय सिंह बरकरे, अध्यक्ष
– यह वैधानिक प्रक्रिया तो नहीं है। कार्यकारिणी ने सचिव को हटाने का नोटिस दिया और राजीव गौर को सचिव बना दिया, जबकि ऐसा होता नहीं है। महासमिति ही निर्णय लेती है।
रामकुमार सिंह ठाकुर, प्राचार्य
“पिछले दो वर्ष से महासमिति की बैठक नहीं रखी गई है। महासमिति की बैठक जल्द से जल्द बुलाकर कार्यकारिणी समिति के खिलाफ निर्णय लिया जाएगा।”
विनोद इरपाचे, पूर्व अध्यक्ष
– आप लोगों के माध्यम से मुझे जानकारी लगी कि सचिव दोषी है, तो अध्यक्ष क्यों नहीं? क्योंकि दोनों के हस्ताक्षर के बिना तो पैसा ही नहीं निकलता। और उसमें कोषाध्यक्ष की कितनी भूमिका है, यह भी देखने लायक होगा। यदि कार्रवाई होगी तो सभी पर होगी। महासमिति को जल्द से जल्द बुलाया जाएगा।
विजय राम, महासमिति सदस्य