बाजार की गिरावट में छुपा है दूरगामी मौका, निवेशकों को रखना होगा लंबा नजरिया, आर्थिक विशेषज्ञ दुर्गेश गौड़ के जानिए विचार
– सेंसेक्स-निफ्टी में 15% तक की गिरावट, एफपीआई ने 4.08 लाख करोड़ की बिकवाली की
– मैक्रो फंडामेंटल मजबूत, जीडीपी ग्रोथ 7.8% – प्राइमरी मार्केट में विदेशी निवेशकों का भरोसा बरकरार
रंजीत गुप्ता शिवपुरी
भारतीय शेयर बाजारों में गिरावट का जबरदस्त दौर जारी है। चालू कैलेंडर वर्ष में अब तक सेंसेक्स और निफ्टी में लगभग 15% और 14% की गिरावट आ चुकी है। तात्कालिक आर्थिक और भू-राजनीतिक घटनाक्रम पर नजर डालें तो यह सिलसिला आगे भी जारी रह सकता है।
शिवपुरी के रहने वाले आर्थिक विशेषज्ञ दुर्गेश गौड़ ने बताया किविदेशी पोर्टफोलियो निवेशक (एफपीआई) जो बाजार के मुख्य चालक हैं, बिकवाली के ट्रेंड में बने हुए हैं। इस कैलेंडर वर्ष में अब तक एफपीआई 4.08 लाख करोड़ रुपये की शुद्ध बिकवाली कर चुके हैं, जो गत कैलेंडर वर्ष में 1.66 लाख करोड़ रुपये थी।
विदेशी निवेशकों की बिकवाली की एक बड़ी वजह अमेरिका, कोरिया, ताइवान आदि बाजारों में चल रहा एआई शेयरों में तेजी का सिलसिला है, जिसके आगे भी जारी रहने का आंकलन विशेषज्ञ कर रहे हैं। स्पेसएक्स का बहुचर्चित 85 बिलियन डॉलर का आईपीओ ऊंचे मूल्यांकन पर ओवरसब्सक्राइब होना और लिस्टिंग प्राइस से 50% तक ऊपर उछलना इस ट्रेंड का एक उदाहरण है।
इसके अलावा भू-राजनीतिक संकट, कच्चे तेल की ऊंची कीमतों के कारण लागत बढ़ना, वैश्विक ब्याज दरों में तेजी का रुझान, आपूर्ति श्रृंखला में व्याप्त अड़चनें मिलकर निवेशकों में भय का संचार कर रही हैं। भारतीय मुद्रा में लगातार गिरावट भी विदेशी निवेशकों की डॉलर आधारित कमाई को नकारात्मक बनाती है।
हालांकि, विदेशी निवेशकों की इस बिकवाली की भरपाई काफी हद तक घरेलू निवेशकों ने की है। इस वर्ष में अब तक घरेलू निवेशकों ने 6.83 लाख करोड़ रुपये की खरीद की है, जो गत दो वर्षों में क्रमशः 7.88 और 5.26 लाख करोड़ रुपये रही थी। घरेलू निवेशकों की खरीद ने गिरावट को थामने में बड़ी भूमिका निभाई है।
बढ़ती वैश्विक मुद्रास्फीति का असर ब्याज दरों पर दिखने लगा है, जिसके चलते हाल ही में रिजर्व बैंक ने रेपो रेट में 0.25% की बढ़ोतरी की है और सख्त मौद्रिक रुख के चलते यह वृद्धि आगे भी जारी रह सकती है।
विशेषज्ञों के अनुसार मोटे तौर पर भारतीय बाजारों का मैक्रो आउटलुक निकट काल में नकारात्मक नजर आता है, लेकिन दीर्घकाल में तस्वीर अलग है। चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में जीडीपी वृद्धि 7.8% रही। विश्व बैंक, आईएमएफ, एशियन डेवलपमेंट बैंक और आरबीआई ने वृद्धि अनुमान बढ़ाकर 7.1% कर दिया है। सरकार की प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष कर आय में बढ़ोतरी भी अर्थव्यवस्था की मजबूती दर्शाती है।
डेटा सेंटर, सेमीकंडक्टर, डिफेंस, एनर्जी, एआई और इंफ्रास्ट्रक्चर में हो रहा निवेश अर्थव्यवस्था को दूरगामी गति दे रहा है। भारी बिकवाली के बीच भी विदेशी निवेशकों ने प्राइमरी मार्केट (आईपीओ) में 56,485 करोड़ रुपये का निवेश किया है, जो उनका सकारात्मक दीर्घकालीन नजरिया दर्शाता है।
वर्तमान में सेंसेक्स और निफ्टी का पीई मूल्यांकन 19 गुना के आसपास ट्रेड कर रहा है, जो कोरोना काल के मूल्यांकन से भी कम है। ऐसे में निवेशकों को अल्पकाल की गिरावट को दूरगामी मौके के रूप में देखना चाहिए और अच्छी गुणवत्ता वाले शेयरों को पोर्टफोलियो में जगह देनी चाहिए।