200 एमएम बारिश से साढ़े तीन फीट बढ़ा जलस्तर, 40 एमसीएम पानी रिजर्व रखना जरूरी; 100% भरने पर खोले जा सकते हैं चैनल गेट
मुकेश साहू दीवानगंज रायसेन
रायसेन जिले में स्थित हलाली डैम यानी सम्राट अशोक सागर जलाशय में पानी की आवक लगातार बनी हुई है। जलाशय का भराव अब करीब 61.43 प्रतिशत पहुंच गया है। अधिकारियों के अनुसार यदि इसी तरह की दो अच्छी बारिश और हो जाती है तो जलाशय 100 प्रतिशत तक भर सकता है। जलस्तर बढ़ने की स्थिति में जलाशय के चैनल गेट खोले जा सकते हैं।
जलाशय का एफटीएल 459.61 मीटर है, जबकि वर्तमान जलस्तर 457.65 मीटर दर्ज किया गया है। यानी जलस्तर एफटीएल से महज 1.96 मीटर नीचे है। जलाशय की एफटीएल क्षमता 252.13 एमसीएम है, जबकि वर्तमान जल भंडारण 154.87 एमसीएम है।
कार्यपालन यंत्री किरण भाबोर और अनुविभागीय अधिकारी बी.के. बागुल्या ने बताया कि हलाली डैम में करीब 40 एमसीएम पानी रिजर्व रखना पड़ता है। अधिकारियों के मुताबिक दो दिन पहले हुई करीब 200 एमएम बारिश के कारण जलाशय का जलस्तर लगभग साढ़े तीन फीट बढ़ गया था। यदि इसी तरह की दो और अच्छी बारिश होती है तो जलाशय के 100 प्रतिशत भरने की संभावना है।
40 हजार हेक्टेयर भूमि को मिलेगा सिंचाई का लाभ
हलाली डैम के पूरी तरह भरने से विदिशा और रायसेन जिले की करीब 40 हजार हेक्टेयर कृषि भूमि को सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध होता है। विदिशा और रायसेन जिले में पानी को नहरों के द्वारा खेत खेत के तक पहुंचाया जाता है।
इसके साथ ही दोनों जिलों के कई क्षेत्रों में पेयजल आपूर्ति के लिए भी हलाली डैम महत्वपूर्ण जलस्रोत है। ऐसे में जलाशय में पर्याप्त पानी का भंडारण किसानों के साथ-साथ आम लोगों के लिए भी बड़ी राहत माना जा रहा है।

24.59 करोड़ की लागत से बने पांच चैनल गेट
हलाली डैम के ओवरफ्लो क्षेत्र में करीब दो वर्ष पहले लगभग 24.59 करोड़ रुपए की लागत से पांच चैनल गेट बनाए गए हैं। इससे पहले जलाशय का जलस्तर बढ़ने पर कयामपुर, संग्रामपुर सहित आसपास के कई गांवों और खेतों में पानी भरने की स्थिति बन जाती थी। जिससे फसलों और ग्रामीणों के मकानों को भी भारी नुकसान होता था।
अब जलाशय के 100 प्रतिशत भरने की स्थिति में इन चैनल गेट के माध्यम से अतिरिक्त पानी को नियंत्रित तरीके से बाहर निकाला जा सकता है। इससे हजारों एकड़ फसल और ग्रामीण आबादी को जलभराव से बचाने में मदद मिलती है।अशोक सम्राट हलाली डैम में किसानों की खरीफ की फसल हर साल डूब में आने से खराब होती आ रही थी। इससे किसानों को नुकसान उठाना पड़ता रहा था। इस समस्या को देखते हुए सरकार ने हलाली डेम के ओवरफ्लो वाले स्थान पर 5 चैनल गेट का निर्माण कार्य कार्य 2 साल पहले ही कराया गया है। निर्माण कार्य में लगभग 24.59 करोड़ रुपए की लागत आई है। इसके लिए 12 मीटर ऊंचाई वाले 5 पिलर का निर्माण कार्य कराया गया है।
सम्राट अशोक हलाली डैम का जल स्तर बढ़ने से इन 5 गेटों से 1750 क्यूसेक पानी छोड़ा जा सकता है। इस निर्माण से 27 गांवों के किसानों की 1500 हेक्टेयर जमीन में बोई गई खरीफ की फसल को डूबने से बचाया जा सकता है इतना ही नहीं, फसल खराब होने के अलावा निनोद और कायम पुर गांव के रास्ते बारिश के समय में डूब में आ जाने के कारण गांव टापू बन जाया करते थे। अब इन गांवों के रास्ते भी डूब में नहीं आएंगे इससे बारिश के दिनों में यहां से आवागमन चालू रहने लगेगा।
पिलर के ऊपर छत डालकर एक 57.50 मीटर लंबाई बाला ब्रिज का निर्माण भी किया गया है। यह ब्रिज सिंचाई परियोजना के कर्मचारियों के उपयोग के लिए ही रहेगा। यहां से आम लोगों की आवाजाही प्रतिबंधित रहेगी। विभागीय कर्मचारी इस ब्रिज का उपयोग गेट की मॉनिटरिंग से लेकर सभी आवश्यक कामों के लिए कर पाएंगे। अलग से राशि स्वीकृत कराकर आम लोगों के लिए डाउन स्ट्रीम में दूसरा ब्रिज बनाया गया है इस ब्रिज का उपयोग आम लोगों के आवाजाही के लिए हैं।

बारिश का दौर धीमा पड़ने के बावजूद जिले के प्राकृतिक पर्यटन स्थलों पर रौनक बढ़ गई है। हलाली डैम के पास स्थित मिनी पचमढ़ी इन दिनों सैलानियों के आकर्षण का प्रमुख केंद्र बनी हुई है। करीब 60 फीट की ऊंचाई से गिरता झरना, चारों ओर फैली हरियाली, चट्टानों के बीच बहता पानी और मनमोहक प्राकृतिक नजारे लोगों को यहां खींच ला रहे हैं। विदिशा, भोपाल समेत आसपास के जिलों से बड़ी संख्या में परिवार और युवा यहां पहुंच रहे हैं।
मानसून में झरने के सक्रिय होने के साथ मिनी पचमढ़ी की खूबसूरती और भी निखर गई है। यहां का ‘ब्लू वाटर’ भी पर्यटकों के लिए खास आकर्षण बना हुआ है। झरने से ऊपर गिरता पानी सफेद दिखाई देता है, लेकिन नीचे बने कुंड में पहुंचने पर उसका रंग नीला नजर आता है। यही वजह है कि लोग इस नजारे को कैमरे में कैद करने के लिए बड़ी संख्या में पहुंच रहे हैं।

पुराना रास्ता फिर हुआ चालू, कच्चे मार्ग से मिली राहत
हलाली डैम के पुराने रास्ते पर कंक्रीट सीसी रोड का निर्माण पूरा होने के बाद आम लोगों और वाहनों की आवाजाही शुरू कर दी गई है। इससे पहले लोग और वाहन नीचे बने कच्चे रास्ते से होकर गुजरते थे। बारिश के कारण कच्चे मार्ग में कई जगह दरारें पड़ने और सड़क खराब होने के बाद पुराने रास्ते को दोबारा चालू किया गया है।
अब निगाहें आने वाली बारिश पर
हलाली डैम में वर्तमान में पानी की स्थिति संतोषजनक है और जलस्तर एफटीएल के काफी करीब पहुंच चुका है। अधिकारियों के मुताबिक आने वाले दिनों में यदि दो अच्छी बारिश होती हैं तो जलाशय के 100 प्रतिशत भरने की संभावना है। ऐसे में अब क्षेत्र के किसानों और ग्रामीणों की निगाहें आने वाली बारिश पर टिकी हैं।