पंचायत विभाग के स्पष्ट दिशा निर्देश के बाबजूद पंचायतें बरत रही उदासीनता,आज तक नहीं बने आधे से गांवों में श्मशान।
जनपद पंचायत बेगमगंज के आधे से अधिक गांवों में आजतक शमशान नहीं बने
सत्यवन गोस्वामी सुल्तानगंज रायसेन
एक ओर सरकारें विकास के तमाम दावे कर रही है। और इसके लिए प्रयासरत नजर आती है। पर इसके उलट जमीनी हकीकत कुछ और ही कहती है।
जीने की मूलभूत सुविधाएं तो छोड़िए, कई ग्राम पंचायतों की उदासीनता के चलते अंतिम संस्कार भी सम्मानजनक तरीके से नहीं हो पा रहा है। वर्तमान प्रदेश सरकार के पंचायत विभाग ने इस तरह की अप्रिय स्थिति से बचने के लिए श्मशान घाट निर्माण के लिए पंचायतों को खुली छूट दी हुई है, पर पंचायतों को इससे कोई फर्क पड़ता नजर नहीं आता है।

ऐसी ही एक तस्वीर आज सामने आई ग्राम पंचायत शाहपुर सुल्तानपुर के ग्राम पिपलिया खुर्द से जहां इन्दुर सिंह की पत्नी काशीबाई का निधन हुआ, पर भारी बारिश होने के कारण उनको सम्मानजनक विदाई तक नसीब नहीं हुई। और छाता तिरपालों के साए में विदा किया गया। लकड़ी गीली होने के कारण पेट्रोल और टायरों का उपयोग करना पड़ा।
ग्रामीण गजराज यादव ने बताया कि हमारे यहां वर्षों से श्मशान घाट स्वीकृत है, पर पंचायत की उदासीनता के चलते यह अभी तक बन नहीं पाया है। सरकार कितने ही दावे करे पर निचले स्तर पर आते आते जिम्मेदार सरकार की मंशा को पलीता लगाते हैं।
जनपद पंचायत बेगमगंज के सी ई ओ मोगराज मीणा का कहना है कि मुझे अभी यहां ज्वाइन किए हुए 10-15 दिन हुए हैं, मेरे संज्ञान में आपने लाया है इसको तत्काल करवाते हैं, यह हमारी जिम्मेदारी है कि सभी जगह श्मशान हो। तत्काल सभी पंचायतों से में जानकारी लेकर निर्देशित करता हूं।