तीन दिनों से दीवानगंज-सेमरा रेलवे स्टेशन पर कर रही अपनों का इंतजार
मुकेश साहू दीवानगंज रायसेन
सांची विकासखंड के अंतर्गत आने वाले दीवानगंज-सेमरा रेलवे स्टेशन से मानवता को झकझोर देने वाला मामला सामने आया है। यहां पिछले तीन दिनों से करीब 65 वर्षीय बुजुर्ग महिला रेलवे स्टेशन परिसर में बेसहारा अवस्था में बैठी हुई है। महिला चलने-फिरने में असमर्थ है और आंखों से भी कम दिखाई देता है। बावजूद इसके उसे सहारा देने वाला कोई अपना सामने नहीं आया।
बुजुर्ग महिला ने अपना नाम प्रेमबाई, पति स्वर्गीय गिरवर लोधी, निवासी बनखेड़ी बताया। उन्होंने कहा कि उनकी तीन बेटियां हैं, जिनकी शादी हो चुकी है। एक बेटी अशोकनगर जिले के निगोरा गांव में, दूसरी देवरी और तीसरी की शादी ग्राम सेमरा में हुई है। इसके बावजूद आज उन्हें अपने ही परिवार का सहारा नहीं मिल पा रहा है।
प्रेमबाई ने भावुक होकर बताया कि पति का कई वर्ष पहले निधन हो चुका है। अब इस उम्र में उनके सामने दो वक्त की रोटी का भी संकट खड़ा हो गया है। उन्होंने कहा, “मेरी तीन बेटियां हैं, लेकिन कोई भी मुझे अपने साथ रखने को तैयार नहीं है। मैं कई दिनों से रेलवे स्टेशन पर बैठी हूं, इस उम्मीद में कि कोई रिश्तेदार या बेटी मुझे लेने आएगी। जब मुझे मेरी बेटियां साथ नहीं दे रही है तो उम्र के इस पड़ाव में कोई मुझे अपने घर बनखेड़ी छोड़ दे मेरे पति की मृत्यु जिस घर में हुई है मैं भी उसी घर में मरना चाहती हूं।
रेलवे स्टेशन पर मौजूद स्थानीय लोगों ने मानवता का परिचय देते हुए उन्हें भोजन और पानी की व्यवस्था कराई, लेकिन यह केवल एक दिन की मदद है। सबसे बड़ी चिंता यह है कि उनके रहने, इलाज और नियमित भोजन की कोई स्थायी व्यवस्था नहीं है।
यह घटना समाज और परिवार व्यवस्था पर कई सवाल खड़े करती है। जिस मां ने अपने बच्चों का पालन-पोषण कर उन्हें बड़ा किया, वही मां आज जीवन की अंतिम अवस्था में बेसहारा होकर रेलवे स्टेशन पर दिन-रात गुजारने को मजबूर है।
स्थानीय लोगों ने प्रशासन और समाजसेवी संस्थाओं से मांग की है कि बुजुर्ग महिला को तत्काल सुरक्षित आश्रय, भोजन, चिकित्सा सुविधा और आवश्यक सामाजिक सहायता उपलब्ध कराई जाए, ताकि उन्हें सम्मानपूर्वक जीवन जीने का अधिकार मिल सके।