सागर। रामपुरा स्थित श्री आदिनाथ जिनालय, गोदरेवाड़ा में आयोजित सिद्धचक्र महामंडल विधान के दौरान आर्यिका श्री ओमकारमति माताजी ने अपनी मंगल देशना में कहा कि व्यक्ति एक समय में एक ही पैर से चलता है, दूसरा पैर केवल सहायक होता है। यदि दोनों पैरों का एक साथ उपयोग किया जाए तो चलना नहीं, बल्कि उछलना होता है। इसी प्रकार जीवन में भी एक समय में एक ही उपयोग रखना चाहिए और एक ही कार्य में मन लगाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि यदि मन भगवान के ध्यान में है तो उसे अन्य विषयों में नहीं भटकाना चाहिए। एक समय में या तो सांसारिक संबंधों का स्मरण करें या जिनवाणी माता का, दोनों में एक साथ मन लगाने से साधना सफल नहीं होती। एकाग्रता और भगवान के ध्यान से ही भवसागर से पार पाया जा सकता है।
सिद्धचक्र महामंडल विधान आचार्य श्री विभव सागर महाराज के मंगल आशीर्वाद तथा उपस्थित मुनि संघ एवं आर्यिका संघ के सान्निध्य में संपन्न हो रहा है। विधान के प्रतिष्ठाचार्य पं अंकित शास्त्री के निर्देशन में सभी धार्मिक क्रियाएं विधिवत संपन्न कराई जा रही हैं।
मनीष नायक एवं संजय शास्त्री ने बताया कि सौधर्म इंद्र के रूप में आकाश, कलशा गोदरे और श्रीपाल मैना सुंदरी नितिन,सपना चौधरी सहित विभिन्न पात्रों का निर्वहन करने वाले इंद्र-इंद्राणियों द्वारा प्रतिदिन भक्ति भाव से अभिषेक, शांतिधारा, पूजन एवं विधान की सभी क्रियाएं संपन्न की जा रही हैं। साथ ही नगर के अनेक जिनालयों से श्रद्धालु विधान के लिए भक्तिद्रव्य समर्पित कर धर्मलाभ अर्जित कर रहे हैं।