मुकेश साहू दीवानगंज रायसेन
इस वर्ष दीवानगंज क्षेत्र में तेंदूपत्ता खरीदी पर जंगल में पत्तों की कमी और बाघ-तेंदुए की बढ़ती गतिविधियों का असर साफ दिखाई दिया है। हर साल जहां क्षेत्र में करीब 16 लाख रुपये के तेंदूपत्ते की खरीदी होती थी, वहीं इस बार खरीदी घटकर 13 लाख 50 हजार रुपये पर सिमट गई। यानी पिछले वर्षों की तुलना में करीब ढाई लाख रुपये की कमी दर्ज की गई है।
जानकारी के अनुसार तेंदूपत्ता सीजन के दौरान जंगलों में पत्तों की उपलब्धता कम रही। वहीं कई इलाकों में बाघ और तेंदुए के मूवमेंट की खबरों के कारण ग्रामीण जंगल के भीतर गहराई तक जाने से बचते रहे। इसका सीधा असर तेंदूपत्ता संग्रहण पर पड़ा और ग्रामीण अपेक्षित मात्रा में पत्ते नहीं तोड़ पाए।
तेंदूपत्ता खरीदी के ठेकेदार अरबाज खान ने बताया कि इस वर्ष 16 लाख रुपये की खरीदी का लक्ष्य लेकर ठेका लिया गया था, लेकिन जंगल में पत्तों की कमी और ग्रामीणों द्वारा कम मात्रा में तेंदूपत्ता लाए जाने के कारण लक्ष्य पूरा नहीं हो सका। उन्होंने बताया कि कुल 13.50 लाख रुपये के तेंदूपत्ते की ही खरीदी हो पाई है। जबकि पिछले कई वर्षों की तुलना में इस वर्ष तेंदूपत्ता तोड़ने वाले मजदूरों को ज्यादा पैसा गाड़ियों पर मिल रहा था।

ग्रामीणों का कहना है कि तेंदूपत्ता संग्रहण उनके लिए गर्मी के मौसम में अतिरिक्त आय का महत्वपूर्ण साधन होता है। खरीदी में आई कमी से कई परिवारों की आमदनी प्रभावित हुई है। वन क्षेत्र में वन्यजीवों की बढ़ती गतिविधियों और प्राकृतिक परिस्थितियों के कारण इस बार तेंदूपत्ता सीजन अपेक्षाकृत कमजोर रहा।
क्षेत्र के जानकारों का मानना है कि यदि आने वाले वर्षों में पत्तों की स्थिति बेहतर रही और वन क्षेत्रों में सुरक्षित संग्रहण की व्यवस्था बनाई गई तो तेंदूपत्ता उत्पादन और खरीदी फिर से पुराने स्तर पर पहुंच सकती है। फिलहाल इस सीजन में तेंदूपत्ता संग्रहण से जुड़े मजदूरों और ग्रामीणों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा है।
दीवानगंज, अंबाडी, मुस्काबाद, संग्रामपुर, कयामपुर, नरखेड़ा, कुलहड़िया यदि जंगलों में तेंदुआ के मूवमेंट होने के कारण हम लोग पहाड़ के किनारे लगे हुए तेंदूपत्ता ही तोड़ पाए हैं ज्यादा अंदर तक तेंदुआ के डर के कारण नहीं गए।
ग्रामीणों का कहना हे
जंगल में तेंदूपत्ता की तो मौजूदगी ज्यादा थी लेकिन वन जीवों के डर के कारण हम लोगों ने इस वर्ष तेंदूपत्ता कम ही तोड़े हैं। अंदर जाने में हमेशा डर बना रहता था कोई जंगली जानवर हमला नाकर दे।
संतोष स्थान में निवासी कुलहड़िया