– नवाबी शासनकाल की धरोहर पर संकट गहरीकरण और संरक्षण की मांग,
-सैयद मसूद अली पटेल गैरतगंज रायसेन
जिले की गैरतगंज तहसील अंतर्गत ग्राम पंचायत गढ़ी का ऐतिहासिक तालाब आज उपेक्षा और बदहाली का शिकार बना हुआ है। वर्ष 1857 से पूर्व नवाबी शासनकाल में निर्मित यह प्राचीन जलाशय कभी गांव की जीवनरेखा माना जाता था, लेकिन वर्षों से गहरीकरण और संरक्षण नहीं होने के कारण इसकी जलधारण क्षमता लगातार घटती जा रही है। ग्रामीणों, जनप्रतिनिधियों और पर्यावरण प्रेमियों ने शासन-प्रशासन से तालाब के शीघ्र जीर्णोद्धार एवं संरक्षण की मांग की है।

पांच एकड़ में फैला था गांव की जीवनरेखा
गढ़ी किले के समीप स्थित यह तालाब पांच एकड़ से अधिक क्षेत्र में फैला हुआ है। पक्के पत्थरों, अलंगों और मजबूत पारों से निर्मित यह तालाब कभी 25 से 30 फीट गहरा हुआ करता था। बरसात के दौरान तालाब लबालब भर जाता था और गांव के लोगों, पशुओं तथा पक्षियों के लिए प्रमुख जलस्रोत का कार्य करता था। साथ ही यह भूजल संरक्षण, पर्यावरणीय संतुलन और गांव की सुंदरता का भी महत्वपूर्ण आधार रहा है।

मिट्टी भरने से घट गई जल संग्रहण क्षमता
ग्रामीणों के अनुसार वर्षों से खेतों और ऊपरी क्षेत्रों से बहकर आने वाली मिट्टी तालाब में जमा होती रही, जिससे इसकी गहराई लगातार कम होती गई। वर्तमान में तालाब की गहराई कई स्थानों पर मात्र 5 से 10 फीट रह गई है। परिणामस्वरूप इसकी जल संग्रहण क्षमता भी काफी कम हो गई है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते संरक्षण नहीं किया गया तो आने वाली पीढ़ियां इस ऐतिहासिक धरोहर को केवल इतिहास के पन्नों में ही देख पाएंगी।

1984 में हुआ था व्यापक गहरीकरण कार्य
वर्तमान में सांची विधानसभा क्षेत्र से विधायक एवं पूर्व कैबिनेट मंत्री डॉ. प्रभुराम चौधरी ने वर्ष 1984 में कांग्रेस पार्टी से विधायक रहते हुए तथा तत्कालीन मुख्यमंत्री स्वर्गीय मोतीलाल वोरा सरकार में संसदीय सचिव के रूप में जल संसाधन विभाग से 4 लाख 45 हजार रुपये की राशि स्वीकृत कराई थी। इस राशि से तालाब का गहरीकरण, पारों की मरम्मत, वेस्ट वीयर निर्माण तथा तालाब का विस्तार कराया गया था। उस कार्य को अब लगभग 42 वर्ष बीत चुके हैं और पुनः बड़ी मात्रा में मिट्टी भर जाने से तालाब अपनी मूल स्थिति खो चुका है।

कलेक्टर के निर्देशों के बावजूद अधूरी रही खुदाई
ग्रामीणों ने बताया कि कलेक्टर अरुण कुमार विश्वकर्मा को तालाब की स्थिति से अवगत कराया गया था। निरीक्षण के बाद कलेक्टर ने मध्यप्रदेश रोड डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (एमपीआरडीसी) के अधिकारियों को निर्देश दिए थे कि रायसेन-राहतगढ़ सड़क निर्माण कार्य कर रही कंपनी तालाब से आवश्यक मुरम निकालकर उसके गहरीकरण और सौंदर्यीकरण का कार्य करे।
इसके तहत सड़क निर्माण कंपनी द्वारा मार्च माह में तालाब का पानी भी खाली करा दिया गया था, लेकिन ग्रामीणों का आरोप है कि तालाब की मात्र लगभग 15 प्रतिशत खुदाई ही की गई, जबकि शेष कार्य अब तक अधूरा पड़ा है। ग्रामीणों का कहना है कि कंपनी वर्तमान में निजी खेतों से मुरम निकाल रही है, जबकि तालाब में अभी भी पर्याप्त खुदाई कार्य शेष है।

समय से पहले पानी खाली होने से बढ़ी पेयजल समस्या
स्थानीय लोगों के अनुसार तालाब का पानी समय से पहले खाली कर दिए जाने से आसपास के नलकूपों और जल स्रोतों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा। गर्मी के दौरान तालाब के आसपास बसे क्षेत्रों में पेयजल संकट की स्थिति बनी रही। ग्रामीणों का मानना है कि यदि तालाब का समुचित गहरीकरण किया जाता तो वर्षा जल का बेहतर संचयन संभव होता और भूजल स्तर में भी सुधार आता।

बारिश से पहले खुदाई पूरी करने की मांग
ग्रामीणों ने मांग की है कि मानसून शुरू होने से पहले सड़क निर्माण कंपनी तालाब की शेष खुदाई पूरी कर आवश्यक मुरम का भंडारण कर ले, जिससे एक ओर सड़क निर्माण कार्य के लिए सामग्री उपलब्ध हो सके और दूसरी ओर तालाब की जलधारण क्षमता भी बढ़ सके। उनका कहना है कि इससे गांव के किसानों, पशुपालकों और आम नागरिकों को दीर्घकालिक लाभ मिलेगा।

30 लाख से अधिक की आवश्यकता, स्थायी योजना बनाने की मांग
ग्रामीणों के अनुसार पूर्व में तालाब के जीर्णोद्धार के लिए कई बार छोटी-छोटी राशियां स्वीकृत हुईं, लेकिन कोई स्थायी समाधान नहीं निकल सका। जानकारों का मानना है कि तालाब के पूर्ण गहरीकरण, पारों की मरम्मत, सौंदर्यीकरण और जल संरक्षण संबंधी कार्यों के लिए 30 लाख रुपये से अधिक की आवश्यकता होगी।
जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों ने उठाई आवाज
ग्राम पंचायत गढ़ी के सरपंच सैयद मसूद अली पटेल, उपसरपंच बृजेश जाटव, जनपद सदस्य फैमीदा बी. रिजवान खान, भाजपा नेता भागचंद चौरसिया, पूर्व जनपद सदस्य खेमचंद चौरसिया, नंदकिशोर यादव, मोहन जाटव, मोहन माहेश्वरी, नीरज पंडा चौरसिया, सतीश कुमार जैन, सादी लाल सेन, सैयद आफताब अली, रतनलाल आदिवासी, सैयद दाऊद अली पटेल, ऋषभ कुमार जैन, मुजफ्फर हसन सहित अनेक ग्रामीणों ने शासन-प्रशासन से शीघ्र सर्वे कराकर स्थायी कार्ययोजना बनाने तथा ऐतिहासिक तालाब के संरक्षण एवं जीर्णोद्धार की मांग की है।

जल संरक्षण के साथ इतिहास भी बचेगा
पर्यावरण प्रेमियों का कहना है कि शासन द्वारा चलाए जा रहे जल संरक्षण एवं जल-जंगल संवर्धन अभियानों के तहत इस ऐतिहासिक तालाब का पुनर्जीवन किया जा सकता है। इससे न केवल भूजल स्तर में सुधार होगा, बल्कि गढ़ी गांव की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और पर्यावरणीय विरासत भी सुरक्षित रह सकेगी।
विधायक, सांसद और कलेक्टर से लगाई गुहार
स्थानीय जनप्रतिनिधियों एवं ग्रामीणों ने क्षेत्रीय विधायक एवं पूर्व कैबिनेट मंत्री डॉ. प्रभुराम चौधरी, क्षेत्रीय सांसद एवं केंद्रीय कृषि तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान तथा कलेक्टर अरुण कुमार विश्वकर्मा से मांग की है कि गढ़ी के इस प्राचीन एवं ऐतिहासिक तालाब का शीघ्र जीर्णोद्धार कराया जाए, ताकि जल संरक्षण के साथ-साथ क्षेत्र की ऐतिहासिक धरोहर भी सुरक्षित रह सके।