मुकेश साहू दीवानगंज रायसेन
दीवानगंज, अंबाडी, सेमरा, नरखेड़ा, जमुनिया, सरार, कयामपुर ,संग्रामपुर,बालमपुर, देहरी,आदि गांवों सहित,सांची विकासखंड अंतर्गत आने वाले कई गांवों में इस समय ग्रीष्मकालीन मूंग की फसल भीषण जल संकट का सामना कर रही है। लगातार गिरते भूजल स्तर और पर्याप्त सिंचाई नहीं मिलने के कारण किसानों के सामने फसल बचाने का बड़ा संकट खड़ा हो गया है। क्षेत्र के कई गांवों में खेतों में खड़ी मूंग की फसल सूखने की कगार पर पहुंच गई है, जिससे किसानों की चिंता लगातार बढ़ती जा रही है।
किसानों का कहना है कि इस वर्ष गर्मी सामान्य से अधिक पड़ रही है। तेज धूप और लगातार बढ़ते तापमान के चलते खेतों की नमी तेजी से खत्म हो रही है। दूसरी ओर कुएं, ट्यूबवेल और बोरवेल भी जवाब देने लगे हैं। कई स्थानों पर मोटर चलाने के बावजूद पर्याप्त पानी नहीं निकल रहा, जिससे समय पर सिंचाई नहीं हो पा रही है। जिन किसानों ने उधार लेकर मूंग की बोवनी की थी, वे अब सबसे ज्यादा परेशान दिखाई दे रहे हैं।
ग्रामीण अंचलों में किसानों को रातभर जागकर सिंचाई करनी पड़ रही है। कहीं बिजली की समस्या तो कहीं पानी की कमी किसानों की मुश्किलें बढ़ा रही है। कई खेतों में मूंग के पौधे पीले पड़ने लगे हैं, जबकि कुछ जगह फसल पूरी तरह मुरझाने लगी है। किसानों का कहना है कि यदि जल्द बारिश नहीं हुई या सिंचाई की व्यवस्था नहीं बनी, तो इस बार उत्पादन पर बड़ा असर पड़ सकता है।
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार ग्रीष्मकालीन मूंग की फसल को समय-समय पर पर्याप्त पानी की आवश्यकता होती है। लेकिन इस बार लगातार गिरते जलस्तर ने स्थिति को गंभीर बना दिया है। किसानों ने प्रशासन से मांग की है कि बिजली आपूर्ति सुचारु कराई जाए और जल संरक्षण के स्थायी उपाय किए जाएं, ताकि फसल को बचाया जा सके।
क्षेत्र के किसानों का कहना है कि यदि यही हाल रहा तो आने वाले समय में खेती करना और भी कठिन हो जाएगा। जल संकट अब केवल पेयजल तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि खेती-किसानी और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर भी सीधा असर डाल रहा है।