रामभरोस विश्वकर्मा, मंडीदीप रायसेन
चिकलोद वन रेंज के कंपार्टमेंट RF 560 में भीषण आग लगने से 25,000 पौधों वाला सरकारी प्लांटेशन जलकर खाक हो गया है। लाखों रुपये की लागत से तैयार यह हरा-भरा क्षेत्र अब सिर्फ़ काली राख का ढेर बन गया है।

यह आग सिर्फ़ एक दुर्घटना नहीं, बल्कि एक बड़ी लापरवाही और साज़िश की ओर इशारा कर रही है। हैरानी की बात यह है कि जहाँ यह आग लगी, वहाँ सिर्फ़ प्लांटेशन ही जला, जबकि आस-पास का बाक़ी जंगल पूरी तरह सुरक्षित है। यह इस बात का संकेत देता है कि आग बहुत सोच-समझकर और प्लानिंग के साथ लगाई गई थी।

इस प्लांटेशन की सुरक्षा के लिए तैनात 4 चौकीदार, 1 नाकेदार और 1 सर्किल अधिकारी की टीम इस तबाही को रोकने में पूरी तरह नाकाम रही। सूत्रों के मुताबिक़, यह आंशका भी जताई जा रही है कि प्लांटेशन की खामियों को छुपाने के लिए ख़ुद ज़िम्मेदारों ने ही इसे नष्ट कर दिया हो। इस भीषण आग ने सिर्फ़ पौधों को ही नहीं, बल्कि लाखों जीव-जंतुओं और पारिस्थितिकी तंत्र को भी ख़त्म कर दिया है।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि इतनी बड़ी घटना के बावजूद अब तक किसी भी कर्मचारी की ज़िम्मेदारी तय नहीं की गई है। न कोई जाँच, न कोई नोटिस और न ही कोई दंडात्मक कार्यवाही। जाँच के नाम पर महज़ अज्ञात के ख़िलाफ़ POR काटकर मामले को रफा-दफा करने की कोशिश की जा रही है। वन परिक्षेत्र अधिकारी चिकलोद ने अन्यत्र सर्किल इंचार्ज से जाँच करवाने और कार्यवाही की बात कही है, लेकिन क्या यह वाक़ई न्यायोचित जाँच होगी?

इस पूरे मामले की राज्य स्तरीय उड़नदस्ते के माध्यम से गंभीर जाँच होनी चाहिए, ताकि सच सामने आ सके और दोषियों को कड़ी सज़ा मिले। लाखों रुपये के इस नुक़सान और पर्यावरण की तबाही के लिए ज़िम्मेदारों को जवाबदेह ठहराना ज़रूरी है।