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नाहर फैक्ट्री में फिर मौत: श्रमिक की जान गई, प्रबंधन गेट के भीतर छिपा रहा

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15 साल से सेवाएं दे रहे इलेक्ट्रीशियन तारा चंद की ऊंचाई से गिरकर मौत,

शव रखकर परिजनों ने किया मुख्य द्वार बंद

हादसे के एक घंटे बाद तक बाहर नहीं आया प्रबंधन, मुआवजे से ज्यादा कार्रवाई की मांग

रामभरोस विश्वकर्मा, मंडीदीप रायसेन

मंडीदीप औद्योगिक क्षेत्र की नाहर फैक्ट्री में शुक्रवार को एक और दर्दनाक हादसे ने औद्योगिक सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोल दी। फैक्ट्री में पिछले 15 वर्षों से इलेक्ट्रीशियन के रूप में कार्यरत तारा चंद की काम के दौरान ऊंचाई से गिरने से मौत हो गई।
हादसे के बाद फैक्ट्री गेट पर ऐसा आक्रोश फूटा कि परिजनों ने शव को गेट पर रखकर प्रदर्शन शुरू कर दिया! देखते ही देखते माहौल तनावपूर्ण हो गया और मौके पर भारी भीड़ जमा हो गई।
एक श्रमिक की जान गई!लेकिन प्रबंधन बाहर तक नहीं आया
सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि एक श्रमिक की मौत के बाद भी फैक्ट्री प्रबंधन का कोई जिम्मेदार प्रतिनिधि एक घंटे तक बाहर नहीं आया।
परिजनों का आरोप है!कि कंपनी प्रबंधन का रवैया संवेदनहीन, गैर-जिम्मेदार और अमानवीय रहा। एक ओर परिवार अपने कमाने वाले सदस्य की लाश के सामने इंसाफ मांगता रहा! दूसरी ओर फैक्ट्री प्रबंधन दीवारों के पीछे चुप्पी साधे बैठा रहा।

मुआवजे की मांग के साथ कार्रवाई पर अड़े परिजन
मृतक के परिजन सिर्फ मुआवजा ही नहीं, बल्कि हादसे के लिए जिम्मेदार लोगों पर आपराधिक कार्रवाई, सुरक्षा में लापरवाही की जांच और परिवार के एक सदस्य को नौकरी देने की मांग कर रहे हैं।
परिजनों का कहना है! कि अगर फैक्ट्री में हेल्थ एंड सेफ्टी नियमों का सही पालन किया गया होता, तो तारा चंद की जान बच सकती थी।

पुलिस और प्रशासन मौके पर, हालात संभालने की कोशिश
घटना की सूचना मिलते ही पुलिस बल और तहसीलदार हेमंत शर्मा मौके पर पहुंचे। प्रशासन ने परिजनों को समझाने का प्रयास किया!लेकिन गुस्साए परिजन लिखित आश्वासन और ठोस कार्रवाई के बिना मानने को तैयार नहीं दिखे।
पहले भी जा चुकी हैं! जानें, फिर भी नहीं सुधरा सिस्टम
यह घटना कोई अकेली नहीं है। मंडीदीप औद्योगिक क्षेत्र में पहले भी कई हादसे हो चुके हैं, जिनमें श्रमिकों की जान गई! लेकिन हर बार मामला मुआवजे की घोषणा, कुछ समय के शोर, और फिर फाइलों में दफन कार्रवाई तक सीमित रह गया।
सवाल यह है!कि आखिर हर हादसे के बाद सिर्फ मुआवजा ही क्यों याद आता है? मौत के बाद चेक बांटना आसान है!लेकिन मौत से पहले सुरक्षा देना इतना मुश्किल क्यों!

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