– श्रद्धालु सुबह से लेकर दोपहर तक मंदिरों में माता रानी को जल अर्पित कर पूजा अर्चना करते रहे
-राम कथा में लक्ष्मण को लगी शक्ति का किया गया वर्णन
मुकेश साहू दीवानगंज रायसेन
चैत्र नवरात्रि का पावन पर्व श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जा रहा है। दीवानगंज, अंबाडी, सेमरा, नरखेड़ा, जमुनिया, निनोद, सरार, कयामपुर, संग्रामपुर, करैया, गिदगढ़, सत्ती, टोला, भंवरखेड़ी, हिनोतिया, टापरा, बरजोरपुर, बालमपुर, देहरी सहित आसपास के दर्जनों गांवों में धार्मिक माहौल है। मंदिर मंदिर गांव गांव भजन कीर्तन का आयोजन चल रहा है। मंदिरों को आकर्षक तरीके से सजाया गया। गांव-गांव में विशेष पूजा-अर्चना चल रही है। कई जगह धार्मिक अनुष्ठान हो रहे हैं।

खेड़ापति हनुमान माता मंदिर दीवानगंज, अंबाडी और सेमरा में प्रातः काल से ही श्रद्धालु पहुंच कर जल अर्पित कर पूजा-अर्चना कर रहे हैं। मंदिरों में माता रानी की ज्योत जल रही है और सेवक रात दिन सेवा कर रहे हैं। जगह-जगह मंदिरों में महिलाओं द्वारा भजन कीर्तन का आयोजन किया जा रहा है। घरों में भी घट स्थापना हुई है। गुफा मंदिर, राम जानकी मंदिर, इच्छापूर्ति हनुमान मंदिर, अयोध्या धाम मंदिर, गणेश मंदिर, चांदनी चौक शिव मंदिर अंबाडी, गायत्री मंदिर, खेड़ापति हनुमान मंदिर सेमरा में भी भजन-कीर्तन सहित धार्मिक अनुष्ठान हो रहे हैं।

खेड़ापति हनुमान माता मंदिर दीवानगंज चल रही राम कथा मैं कथा व्यास चंद्र मोहन तिवारी ने कहा कि अंगद द्वारा समझाने व बल दिखाने पर भी जब रावण नहीं माना तो एक तरह से युद्ध की घोषणा हुई। युद्ध में लक्ष्मण जी को शक्ति लग जाती है। इसके बाद हनुमान जी संजीवनी बूटी लेने जाते हैं। हनुमान जी पूरा पर्वत लेकर आ जाते हैं और वैद्य सुषेण ने तुरंत उपाय किया, जिससे लक्ष्मण जी उठ बैठे। दोबारा शुरु हुए युद्ध में कंभकर्ण युद्धभूमि में पहुंचता है। वह वानर सेना को तितर-बितर कर देता है। यह देखकर रामचंद्र ने तीक्ष्ण बाणों से कुंभकर्ण के सिर को धड़ से अलग कर दिया और वह सिर रावण के आगे जा गिरा, जिसे देखकर रावण व्याकुल हो गया।