-‘डिजिटल अरेस्ट’ की धमकी देकर मांगी थी मोटी रकम; समय पर दोस्त और पुलिस को संपर्क करने से टला बड़ा नुकसान
सैयद मसूद अली पटेल गैरतगंज रायसेन
जिले की गैरतगंज तहसील के थाना देव नगर क्षेत्र में पुलिस और स्थानीय जनप्रतिनिधि की त्वरित कार्रवाई तथा सतर्कता से एक ग्रामीण व्यक्ति साइबर धोखाधड़ी का शिकार होने से बाल-बाल बच गया। ठगों ने पीड़ित को वीडियो कॉल पर ‘डिजिटल अरेस्ट’ की धमकी देकर मोटी रकम अपने खाते में ट्रांसफर करने के लिए मजबूर करने की कोशिश की थी।
मिली जानकारी के अनुसार 11 दिसंबर को पुरुषोत्तम (उम्र 40 वर्ष), पिता दिनेश आदिवासी, निवासी बेहरा, थाना सुल्तानपुर, के मोबाइल फोन पर एक अपरिचित नंबर से कॉल आया। कॉल करने वाले व्यक्ति ने पुरुषोत्तम को डराया कि वह एक गंभीर पुलिस केस में नामजद है। इसके बाद ठग ने पुरुषोत्तम को वीडियो कॉल पर लिया और कथित तौर पर ‘डिजिटल अरेस्ट’ करने का नाटक किया। ठग ने पुरुषोत्तम को धमकाते हुए कहा कि यदि उसने जल्द ही उनके बताए खाते में एक मोटी रकम ट्रांसफर नहीं की, तो उसे गिरफ्तार कर जेल भेज दिया जाएगा। इन धमकियों से घबराकर पुरुषोत्तम आदिवासी रुपये ट्रांसफर करने की तैयारी कर रहा था।
जनप्रतिनिधि ने दिखाई समझदारी
घबराहट की इसी स्थिति में, पुरुषोत्तम ने समझदारी दिखाते हुए तुरंत अपने दोस्त और स्थानीय जनपद सदस्य प्रतिनिधि, दीपक धाकड़ से संपर्क किया। दीपक धाकड़ ने मामले की गंभीरता को समझा और बिना समय गंवाए तत्काल थाना प्रभारी (टी.आई.) देवनगर, श्री हरिओम अस्ताया से संपर्क किया।
जनप्रतिनिधि दीपक धाकड़ ने पीड़ित पुरुषोत्तम की बात सीधे थाना प्रभारी श्री अस्ताया से करवाई। थाना प्रभारी ने तत्काल स्थिति को स्पष्ट करते हुए पुरुषोत्तम को बताया कि वह इस तरह के साइबर फ्रॉड में कतई न फँसे। उन्होंने पीड़ित को आश्वस्त किया कि उसके ऊपर कोई भी पुलिस केस दर्ज नहीं है और उसे किसी भी व्यक्ति को पैसा ट्रांसफर करने की आवश्यकता नहीं है।
थाना प्रभारी ने आम जनता को जागरूक करते हुए बताया कि मोबाइल फोन पर किसी भी अपरिचित व्यक्ति द्वारा डरा-धमकाकर ‘डिजिटल अरेस्ट’ करने की कोशिश करना और पैसे मांगना एक साइबर अपराध है। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे ऐसे कॉल्स पर ओटीपी या बैंक खाते की निजी जानकारी किसी को न बताएं और न ही किसी प्रकार का भुगतान करें।